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Jhansi News: बारिश ने फसल छीनी, बीमा ने उम्मीद बचाई
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-4.10 लाख पुरुष किसानों के मुकाबले 42,766 महिला किसान बीमा के दायरे में, गुरसराय में सबसे ज्यादा 7,858 महिलाओं की फसल बीमित
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लगातार बारिश ने खरीफ की फसल पर संकट खड़ा कर दिया है। उड़द, मूंग और सोयाबीन समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेत में खड़ी फसल बर्बाद होने के बाद अब किसानों की नजर नुकसान के सर्वे और फसल बीमा के क्लेम पर है। जिन किसानों ने पहले से फसल का बीमा करा रखा है, उनके लिए यह योजना नुकसान के बाद आर्थिक सहारे की उम्मीद बनी हुई है। इनमें हजारों महिला किसान भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के खरीफ 2026 के डैशबोर्ड के लिंग के आधार पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार झांसी में 4,10,977 पुरुष किसानों के मुकाबले 42,766 महिला किसान दर्ज हैं। यानी करीब हर 10 पुरुष किसानों पर एक महिला किसान बीमा के दायरे में है। इसके अलावा 132 अन्य भी दर्ज हैं। महिला किसानों की संख्या के लिहाज से गुरसराय सबसे आगे है। यहां 7,858 महिला किसानों की फसल बीमित दर्ज है। इसके बाद बामौर में 7,651 और बंगरा में 7,100 महिला किसान हैं।
गुरसराय में सबसे ज्यादा और बबीना में कम महिला किसान
जिले के आठ ब्लॉकों में महिला किसानों की संख्या एक जैसी नहीं है। गुरसराय में सबसे ज्यादा 7,858 महिला किसानों का बीमा दर्ज है। बामौर में 7,651 और बंगरा में 7,100 महिला किसान बीमा के दायरे में हैं। इसके बाद मऊरानीपुर में 5,803, चिरगांव में 4,580, बड़ागांव में 3,741 और मोंठ में 3,672 महिला किसान हैं। सबसे कम बबीना में 2,361 महिला किसान दर्ज हैं।
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महिला किसानों के ये आंकड़े बताते हैं कि खेती की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं फसल को आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा का भी हिस्सा बन रही हैं। बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने के बाद अब इस बीमा की उपयोगिता और बढ़ गई है।
बारिश के बाद अब क्लेम पर नजर
लगातार बारिश से खरीफ की फसल को हुए नुकसान के बाद अब किसानों की निगाहें सर्वे और क्लेम प्रक्रिया पर हैं। कितने बीमित किसानों की फसल प्रभावित हुई है और उन्हें कितनी बीमा राशि मिलेगी, यह नुकसान के आकलन के बाद स्पष्ट होगा। उड़द, मूंग और सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान ने किसानों के सामने अगली फसल की तैयारी की चुनौती भी खड़ी कर दी है। ऐसे में बीमा क्लेम की राशि किसानों को आर्थिक नुकसान से उबरने और रबी की तैयारी में मदद कर सकती है।
महिला किसानों की हिस्सेदारी में ब्लॉकवार अंतर
आंकड़ों में पुरुष किसानों की संख्या सभी ब्लॉकों में महिला किसानों से काफी अधिक है, लेकिन महिला किसानों की संख्या में ब्लॉकवार अंतर साफ दिखाई देता है। गुरसराय में सबसे ज्यादा महिला किसान दर्ज हैं, जबकि बबीना में संख्या सबसे कम है।
आठ ब्लॉकों में महिला किसानों की तस्वीर
ब्लॉक
पुरुष किसान
महिला किसान
बबीना
23,301
2,361
बड़ागांव 29,335
3,741
बमौर 84,664
7,651
बंगरा 60,585
7,100
चिरगांव 41,530
4,580
गुरसराय 80,079
7,858
मऊरानीपुर 53,450
5,803
मोंठ 38,033
3,672
कुल
4,10,977 42,766
अन्य : 132
कुल : 4,53,875
स्रोत : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, खरीफ 2026 का आधिकारिक डैशबोर्ड।
वर्जन..
बारिश के दौरान हुए फसल के नुकसान को लेकर प्लॉट-टू-प्लॉट सर्वे का काम अंतिम चरण में है। इसी सप्ताह पूरा होने की संभावना है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- पल्लवी मिश्रा, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लगातार बारिश ने खरीफ की फसल पर संकट खड़ा कर दिया है। उड़द, मूंग और सोयाबीन समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेत में खड़ी फसल बर्बाद होने के बाद अब किसानों की नजर नुकसान के सर्वे और फसल बीमा के क्लेम पर है। जिन किसानों ने पहले से फसल का बीमा करा रखा है, उनके लिए यह योजना नुकसान के बाद आर्थिक सहारे की उम्मीद बनी हुई है। इनमें हजारों महिला किसान भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के खरीफ 2026 के डैशबोर्ड के लिंग के आधार पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार झांसी में 4,10,977 पुरुष किसानों के मुकाबले 42,766 महिला किसान दर्ज हैं। यानी करीब हर 10 पुरुष किसानों पर एक महिला किसान बीमा के दायरे में है। इसके अलावा 132 अन्य भी दर्ज हैं। महिला किसानों की संख्या के लिहाज से गुरसराय सबसे आगे है। यहां 7,858 महिला किसानों की फसल बीमित दर्ज है। इसके बाद बामौर में 7,651 और बंगरा में 7,100 महिला किसान हैं।
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गुरसराय में सबसे ज्यादा और बबीना में कम महिला किसान
जिले के आठ ब्लॉकों में महिला किसानों की संख्या एक जैसी नहीं है। गुरसराय में सबसे ज्यादा 7,858 महिला किसानों का बीमा दर्ज है। बामौर में 7,651 और बंगरा में 7,100 महिला किसान बीमा के दायरे में हैं। इसके बाद मऊरानीपुर में 5,803, चिरगांव में 4,580, बड़ागांव में 3,741 और मोंठ में 3,672 महिला किसान हैं। सबसे कम बबीना में 2,361 महिला किसान दर्ज हैं।
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महिला किसानों के ये आंकड़े बताते हैं कि खेती की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं फसल को आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा का भी हिस्सा बन रही हैं। बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने के बाद अब इस बीमा की उपयोगिता और बढ़ गई है।
बारिश के बाद अब क्लेम पर नजर
लगातार बारिश से खरीफ की फसल को हुए नुकसान के बाद अब किसानों की निगाहें सर्वे और क्लेम प्रक्रिया पर हैं। कितने बीमित किसानों की फसल प्रभावित हुई है और उन्हें कितनी बीमा राशि मिलेगी, यह नुकसान के आकलन के बाद स्पष्ट होगा। उड़द, मूंग और सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान ने किसानों के सामने अगली फसल की तैयारी की चुनौती भी खड़ी कर दी है। ऐसे में बीमा क्लेम की राशि किसानों को आर्थिक नुकसान से उबरने और रबी की तैयारी में मदद कर सकती है।
महिला किसानों की हिस्सेदारी में ब्लॉकवार अंतर
आंकड़ों में पुरुष किसानों की संख्या सभी ब्लॉकों में महिला किसानों से काफी अधिक है, लेकिन महिला किसानों की संख्या में ब्लॉकवार अंतर साफ दिखाई देता है। गुरसराय में सबसे ज्यादा महिला किसान दर्ज हैं, जबकि बबीना में संख्या सबसे कम है।
आठ ब्लॉकों में महिला किसानों की तस्वीर
ब्लॉक
पुरुष किसान
महिला किसान
बबीना
23,301
2,361
बड़ागांव 29,335
3,741
बमौर 84,664
7,651
बंगरा 60,585
7,100
चिरगांव 41,530
4,580
गुरसराय 80,079
7,858
मऊरानीपुर 53,450
5,803
मोंठ 38,033
3,672
कुल
4,10,977 42,766
अन्य : 132
कुल : 4,53,875
स्रोत : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, खरीफ 2026 का आधिकारिक डैशबोर्ड।
वर्जन..
बारिश के दौरान हुए फसल के नुकसान को लेकर प्लॉट-टू-प्लॉट सर्वे का काम अंतिम चरण में है। इसी सप्ताह पूरा होने की संभावना है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- पल्लवी मिश्रा, एडीएम वित्त एवं राजस्व।