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बारिश ने बचाया नर्सिंगहोम
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Thu, 07 Sep 2017 01:16 AM IST
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hospital jhansi news
- फोटो : demo pic
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नक्शे के विपरीत बनी नर्सिंगहोम की बिल्डिंग बुधवार को बारिश के कारण सील होने से बच गई। एक घंटे से अधिक बारिश होने के कारण झांसी विकास प्राधिकरण की टीम कार्रवाई करने नहीं जा सकी। अब बृहस्पतिवार को कार्रवाई होगी।
लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में जुलाई में आगजनी की घटना के बाद अमर उजाला ने महानगर में मानकों के विपरीत बने नर्सिंगहोमों के खिलाफ अभियान चलाया था। यह अभियान का ही असर था कि मानक पूरे नहीं करने वाले 11 नर्सिंगहोम के नक्शे जेडीए ने निरस्त कर दिए थे। एक बिल्डिंग में नक्शा के विपरीत निर्माण था, इसलिए उसे सील करने तथा बिना मानचित्र के बने अन्य नर्सिंगहोम को सील करने के निर्देश दे दिए गए हैं। बुधवार को जेडीए में बिल्डिंग सील करने की तैयारी कर ली गई थी। सूचना थाना नवाबाद पुलिस को भी दे दी गई थी, ताकि पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की कार्रवाई हो सके। पुलिस बल लेने के लिए जेडीए की टीम करीब 12 बजे थाना नवाबाद पहुंची ही थी कि पानी बरसने लगा। पहले हल्की बूंदाबांदी हुई, फिर तेज पानी बरसने के कारण जेडीए की टीम पानी रुकने का इंतजार करने लगी। करीब एक बजे तक पानी नहीं रुका तो टीम ने सीलिंग की कार्रवाई का इरादा बदल दिया और वापस चली गई।
बताया गया कि बेतवा विहार कॉलोनी में सड़क, पार्क व नाला निर्माण के टेंडर व पंचतंत्र पार्क के रखरखाव के टेंडर जेडीए में डाले जा रहे थे। ठेकेदारों की जेडीए कार्यालय में भीड़ लगी थी। इस कारण विभागीय कर्मचारी व्यस्त थे। सचिव सीपी तिवारी ने बताया कि बरसात होने और टेंडर के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई, अब बृहस्पतिवार को कार्रवाई होगी।
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स्वास्थ्य विभाग की जांच ठंडे बस्ते में
- टीम ने सिर्फ एक दिन की छापेमारी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शहर के नर्सिंगहोमों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। एक दिन छापेमारी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चुप्पी साध ली है। हालांकि, सीएमओ का कहना है कि अस्पताल संचालकों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की जांच चल रही है। इसके पूरा होने के बाद अस्पतालों की टीम जांच करेगी।
शहर के अधिकांश नर्सिंगहोम मानकों को ताक पर रखकर बने हुए हैं। नर्सिंगहोम न तो जेडीए के बिल्डिंग के मानक पूर्ण किए हैं और न ही अग्निशमन विभाग के नियम लागू किए हैं। ज्यादातर अस्पताल सरकार के राजस्व को चूना लगाकर आवासीय नक्शे पर चल रहे हैं। हाल यह है कि ऊपर डॉक्टरों का घर बना है और नीच अस्पताल। नर्सिंगहोमों में मानकों के अनुरूप स्टाफ भी नहीं है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि पंजीकृत 120 अस्पतालों में 468 स्टाफ कार्यरत है। यानी कि एक अस्पताल में औसतन चार कर्मचारी भी नहीं हैं। इसके अलावा फायर ब्रिगेड के मानक अनुसार अस्पतालों को चारों तरफ सेट बैक की जगह छोड़नी चाहिए, ताकि आग लगने पर विभाग की गाड़ी बिल्डिंग में दाखिल हो पाए। आवासीय नक्शा होने के चलते अस्पतालों ने सेट बैक की व्यवस्था भी नहीं की है। नर्सिंगहोम संचालकों की मनमानी से तो ऐसा लगता है कि पूर्ववर्ती अधिकारी या तो आंखों में पट्टी बांधे रहे या फिर किसी अन्य वजह से चुप रहे। अमर उजाला द्वारा अभियान छेड़ने के बाद जेडीए, अग्निशमन विभाग द्वारा जांच करने पर कई खामियां उजागर हुई हैं। वहीं, प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह को औचक निरीक्षण में कहीं बेसमेंट में मरीज भर्ती मिले, तो कहीं अन्य कमियां मिलीं। इस पर वो जांच के निर्देश दे चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पतालों से चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी मगर निर्धारित समयसीमा में चुनिंदा नर्सिंगहोमों ने जानकारी दी। इस पर सीएमओ द्वारा गठित टीम ने एक दिन छापेमारी की थी, उसके बाद से टीम शांत है। जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नर्सिंगहोमों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की जांच चल रही है। जल्द ही रिपोर्ट कंपाइल कर ली जाएगी। इसके बाद छापेमारी शुरू होगी। मानकों से खिलवाड़ करने वाले अस्पतालों को बक्शा नहीं
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लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में जुलाई में आगजनी की घटना के बाद अमर उजाला ने महानगर में मानकों के विपरीत बने नर्सिंगहोमों के खिलाफ अभियान चलाया था। यह अभियान का ही असर था कि मानक पूरे नहीं करने वाले 11 नर्सिंगहोम के नक्शे जेडीए ने निरस्त कर दिए थे। एक बिल्डिंग में नक्शा के विपरीत निर्माण था, इसलिए उसे सील करने तथा बिना मानचित्र के बने अन्य नर्सिंगहोम को सील करने के निर्देश दे दिए गए हैं। बुधवार को जेडीए में बिल्डिंग सील करने की तैयारी कर ली गई थी। सूचना थाना नवाबाद पुलिस को भी दे दी गई थी, ताकि पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की कार्रवाई हो सके। पुलिस बल लेने के लिए जेडीए की टीम करीब 12 बजे थाना नवाबाद पहुंची ही थी कि पानी बरसने लगा। पहले हल्की बूंदाबांदी हुई, फिर तेज पानी बरसने के कारण जेडीए की टीम पानी रुकने का इंतजार करने लगी। करीब एक बजे तक पानी नहीं रुका तो टीम ने सीलिंग की कार्रवाई का इरादा बदल दिया और वापस चली गई।
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बताया गया कि बेतवा विहार कॉलोनी में सड़क, पार्क व नाला निर्माण के टेंडर व पंचतंत्र पार्क के रखरखाव के टेंडर जेडीए में डाले जा रहे थे। ठेकेदारों की जेडीए कार्यालय में भीड़ लगी थी। इस कारण विभागीय कर्मचारी व्यस्त थे। सचिव सीपी तिवारी ने बताया कि बरसात होने और टेंडर के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई, अब बृहस्पतिवार को कार्रवाई होगी।
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स्वास्थ्य विभाग की जांच ठंडे बस्ते में
- टीम ने सिर्फ एक दिन की छापेमारी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शहर के नर्सिंगहोमों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। एक दिन छापेमारी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चुप्पी साध ली है। हालांकि, सीएमओ का कहना है कि अस्पताल संचालकों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की जांच चल रही है। इसके पूरा होने के बाद अस्पतालों की टीम जांच करेगी।
शहर के अधिकांश नर्सिंगहोम मानकों को ताक पर रखकर बने हुए हैं। नर्सिंगहोम न तो जेडीए के बिल्डिंग के मानक पूर्ण किए हैं और न ही अग्निशमन विभाग के नियम लागू किए हैं। ज्यादातर अस्पताल सरकार के राजस्व को चूना लगाकर आवासीय नक्शे पर चल रहे हैं। हाल यह है कि ऊपर डॉक्टरों का घर बना है और नीच अस्पताल। नर्सिंगहोमों में मानकों के अनुरूप स्टाफ भी नहीं है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि पंजीकृत 120 अस्पतालों में 468 स्टाफ कार्यरत है। यानी कि एक अस्पताल में औसतन चार कर्मचारी भी नहीं हैं। इसके अलावा फायर ब्रिगेड के मानक अनुसार अस्पतालों को चारों तरफ सेट बैक की जगह छोड़नी चाहिए, ताकि आग लगने पर विभाग की गाड़ी बिल्डिंग में दाखिल हो पाए। आवासीय नक्शा होने के चलते अस्पतालों ने सेट बैक की व्यवस्था भी नहीं की है। नर्सिंगहोम संचालकों की मनमानी से तो ऐसा लगता है कि पूर्ववर्ती अधिकारी या तो आंखों में पट्टी बांधे रहे या फिर किसी अन्य वजह से चुप रहे। अमर उजाला द्वारा अभियान छेड़ने के बाद जेडीए, अग्निशमन विभाग द्वारा जांच करने पर कई खामियां उजागर हुई हैं। वहीं, प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह को औचक निरीक्षण में कहीं बेसमेंट में मरीज भर्ती मिले, तो कहीं अन्य कमियां मिलीं। इस पर वो जांच के निर्देश दे चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पतालों से चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी मगर निर्धारित समयसीमा में चुनिंदा नर्सिंगहोमों ने जानकारी दी। इस पर सीएमओ द्वारा गठित टीम ने एक दिन छापेमारी की थी, उसके बाद से टीम शांत है। जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नर्सिंगहोमों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की जांच चल रही है। जल्द ही रिपोर्ट कंपाइल कर ली जाएगी। इसके बाद छापेमारी शुरू होगी। मानकों से खिलवाड़ करने वाले अस्पतालों को बक्शा नहीं