{"_id":"57b75d3c4f1c1b363c6ebc0e","slug":"rain-problem","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश ने तोड़ा रिकार्ड, जमकर बरसे मेघ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश ने तोड़ा रिकार्ड, जमकर बरसे मेघ
jhansi
Updated Sat, 20 Aug 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
rain
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। सूखे की आग से झुलस रही बुंदेलखंड की धरती पर इस बार मेघ मेहरबान हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल अब तक झांसी में 62.66 प्रतिशत वर्षा हो चुकी है। यह आंकड़ा जालौन में तो 137.76 फीसदी को पार कर गया है, जबकि ललितपुर जिले में 65.91 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। तीस सितंबर तक वर्षा होने का अनुमान है। ऐसे में अनुमान है कि इस बार की बरसात से तीन साल का सूखा धुल जाएगा।
दो दिन से शहर में झमाझम बरसात हो रही है। यह बरसात अकेले झांसी में ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी हो रही है। कभी रिमझिम, कभी झमाझम बरसात से न केवल तापमान गिर गया है, बल्कि मौसम भी सुहाना हो गया है। सावन के महीने में रक्षाबंधन के दिन तीन साल बाद पहली बार झमाझम बरसात हुई है। बृहस्पतिवार की रात तेज बरसात का सिलसिला लगातार जारी रहा। शुक्रवार को भी दिन भर बरसात होने से लोगों को उम्मीद जाग गई है कि पिछले तीन साल से लगातार सूखा झेल रही बुंदेलखंड की धरती इस बार पानी से तृप्त हो जाएगी।
बृहस्पतिवार को झांसी में 12.96 मिमी गिरा पानी
बुधवार को झांसी में 7.20 मिमी वर्षा के स्थान पर 5.20 मिमी और ललितपुर में 5.80 मिमी वर्षा के स्थान पर पानी नहीं बरसा। जालौन में औसत 8.30 मिमी वर्षा के स्थान पर 6.35 मिमी वर्षा हुई। बृहस्पतिवार को जालौन में 7.90 मिमी वर्षा के स्थान पर 25.53 मिमी, झांसी में 8.60 मिमी वर्षा के स्थान पर 12.96 मिमी और ललितपुर में 10.50 मिमी वर्षा के स्थान पर 23.66 मिमी वर्षा हुई।
विज्ञापन
जालौन में पानी ही पानी
झांसी में जून में वर्षा 276.20 मिमी होती है, जबकि 34.06 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 282.10 मिमी वर्षा के स्थान पर 309.22 मिमी हुई। अगस्त में 154.00 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 103.30 मिमी वर्षा हुई है। जबकि जालौन में जून में वर्षा 242.70 मिमी होती है, लेकिन 87.06 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 106.20 मिमी वर्षा के स्थान पर 400.96 मिमी हुई। अगस्त में 131.00 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 173.08 मिमी वर्षा हुई है। ललितपुर में जून में वर्षा 337.00 मिमी होती है, जबकि 27.32 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 339.50 मिमी वर्षा के स्थान पर 422.23 मिमी हुई। अगस्त में 170.30 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 108.58 मिमी वर्षा हुई है।
अब तक मंडल में हुई इतनी बारिश
जालौन में 479.90 मिमी वर्षा होने का औसत है। अब तक 661.10 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो वर्षा का 137.76 प्रतिशत है। इसी तरह झांसी में 712.30 मिमी वर्षा होने का औसत है, जिसमें से अब तक 446.31 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो 62.66 प्रतिशत है। ललितपुर में 846.80 मिमी वर्षा होती है, जिसमें से अब तक 558.13 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो 65.91 प्रतिशत है।
किसानों को खरीफ में नुकसान
किसान लगातार खेती में नुकसान झेलता चला आ रहा है। पहले तीन साल तो फसल ही न के बराबर हुई। इस बार अच्छी बरसात होने के बाद भी किसान को खरीफ की फसल में नुकसान हो गया। तिल की फसल तो ज्यादा पानी बरसने के कारण बेकार हो ही गई है, उर्द और मूंग की फसलें भी ज्यादा पानी नहीं झेल पा रही हैं। उर्द की फसल में ग्रोथ हो जाएगी, लेकिन फसल या तो कमजोर होगी या फिर खराब हो जाएगी। मूंगफली के लिए यह पानी फायदेमंद साबित होगा। हां, उन किसानों को जरूर फायदा होगा, जिनके खेतों में जलभराव नहीं होता है।
यदि तीन- चार दिन से ज्यादा पानी बरसता है, तो उर्द व मूंग की फसल को काफी नुकसान होगा। केवल मूंगफली ही ऐसी फसल है, जिसमें पानी का बेहतर लाभ होगा।
- डॉ. बीआर मौर्य, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
दो दिन से शहर में झमाझम बरसात हो रही है। यह बरसात अकेले झांसी में ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी हो रही है। कभी रिमझिम, कभी झमाझम बरसात से न केवल तापमान गिर गया है, बल्कि मौसम भी सुहाना हो गया है। सावन के महीने में रक्षाबंधन के दिन तीन साल बाद पहली बार झमाझम बरसात हुई है। बृहस्पतिवार की रात तेज बरसात का सिलसिला लगातार जारी रहा। शुक्रवार को भी दिन भर बरसात होने से लोगों को उम्मीद जाग गई है कि पिछले तीन साल से लगातार सूखा झेल रही बुंदेलखंड की धरती इस बार पानी से तृप्त हो जाएगी।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को झांसी में 12.96 मिमी गिरा पानी
बुधवार को झांसी में 7.20 मिमी वर्षा के स्थान पर 5.20 मिमी और ललितपुर में 5.80 मिमी वर्षा के स्थान पर पानी नहीं बरसा। जालौन में औसत 8.30 मिमी वर्षा के स्थान पर 6.35 मिमी वर्षा हुई। बृहस्पतिवार को जालौन में 7.90 मिमी वर्षा के स्थान पर 25.53 मिमी, झांसी में 8.60 मिमी वर्षा के स्थान पर 12.96 मिमी और ललितपुर में 10.50 मिमी वर्षा के स्थान पर 23.66 मिमी वर्षा हुई।
विज्ञापन
जालौन में पानी ही पानी
झांसी में जून में वर्षा 276.20 मिमी होती है, जबकि 34.06 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 282.10 मिमी वर्षा के स्थान पर 309.22 मिमी हुई। अगस्त में 154.00 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 103.30 मिमी वर्षा हुई है। जबकि जालौन में जून में वर्षा 242.70 मिमी होती है, लेकिन 87.06 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 106.20 मिमी वर्षा के स्थान पर 400.96 मिमी हुई। अगस्त में 131.00 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 173.08 मिमी वर्षा हुई है। ललितपुर में जून में वर्षा 337.00 मिमी होती है, जबकि 27.32 मिमी वर्षा हुई। जुलाई में 339.50 मिमी वर्षा के स्थान पर 422.23 मिमी हुई। अगस्त में 170.30 मिमी मानक के स्थान पर अब तक 108.58 मिमी वर्षा हुई है।
अब तक मंडल में हुई इतनी बारिश
जालौन में 479.90 मिमी वर्षा होने का औसत है। अब तक 661.10 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो वर्षा का 137.76 प्रतिशत है। इसी तरह झांसी में 712.30 मिमी वर्षा होने का औसत है, जिसमें से अब तक 446.31 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो 62.66 प्रतिशत है। ललितपुर में 846.80 मिमी वर्षा होती है, जिसमें से अब तक 558.13 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो 65.91 प्रतिशत है।
किसानों को खरीफ में नुकसान
किसान लगातार खेती में नुकसान झेलता चला आ रहा है। पहले तीन साल तो फसल ही न के बराबर हुई। इस बार अच्छी बरसात होने के बाद भी किसान को खरीफ की फसल में नुकसान हो गया। तिल की फसल तो ज्यादा पानी बरसने के कारण बेकार हो ही गई है, उर्द और मूंग की फसलें भी ज्यादा पानी नहीं झेल पा रही हैं। उर्द की फसल में ग्रोथ हो जाएगी, लेकिन फसल या तो कमजोर होगी या फिर खराब हो जाएगी। मूंगफली के लिए यह पानी फायदेमंद साबित होगा। हां, उन किसानों को जरूर फायदा होगा, जिनके खेतों में जलभराव नहीं होता है।
यदि तीन- चार दिन से ज्यादा पानी बरसता है, तो उर्द व मूंग की फसल को काफी नुकसान होगा। केवल मूंगफली ही ऐसी फसल है, जिसमें पानी का बेहतर लाभ होगा।
- डॉ. बीआर मौर्य, जिला कृषि अधिकारी