फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Railway workers are harming the environment by filling up Pahuj.

Jhansi News: पहूज को पाट पर्यावरण को पीड़ा पहुंचा रहा रेलकर्मी

Thu, 04 Dec 2025 01:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2025 01:48 AM IST
विज्ञापन
Railway workers are harming the environment by filling up Pahuj.
झांसी। पहूज नदी का अति संवेदनशील डूब क्षेत्र फिर भूमाफिया की निगाह में है। जमीन के कारोबारी नदी के अस्तित्व को खतरे में डालकर यहां कॉलोनी बसाने की फिराक में हैं। सीपरी बाजार के लहरगिर्द इलाके में नदी से महज 50 मीटर दूर उसके डूब क्षेत्र को पाटा जा रहा है। मिट्टी डालकर नदी के स्वाभाविक बहाव को बदला जा चुका है। खाली जमीन में मिट्टी डाली जा रही है। रोजाना यहां जेसीबी चल रही है। बाहर एक बोर्ड पर रेलवे में कार्यरत सीटीआई का नाम, मोबाइल नंबर के साथ प्रस्तावित कॉलोनी का नाम तक लिखा है लेकिन किसी महकमे को इसकी भनक नहीं है। कुछ लोगों ने नगर निगम, जेडीए समेत जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत भी की। इसके बावजूद कोई प्रशासनिक अमला मौके पर नहीं पहुंचा।
विज्ञापन

नदी के डूब क्षेत्र को पर्यावरणीय लिहाज से अति संवेदनशील माना जाता है। इस वजह से हर तरीके के निर्माण पर पूरी पाबंदी है। इसके बावजूद जमीन कारोबारी नदी के डूब क्षेत्र को पाटकर उस पर कब्जा जमाने से बाज नहीं आ रहे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लहरगिर्द के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के पास नदी के डूब क्षेत्र में मिट्टी डालकर उसके बहाव को बदल दिया गया है। वहां करीब 0.83 एकड़ जमीन पर कॉलोनी के लिए प्लाटिंग की तैयारी है। जेसीबी से पूरी जमीन समतल कर दी गई है। बाउंड्रीवाल समेत अन्य निर्माण आरंभ करा दिया गया है।
विज्ञापन

जानकारों का कहना है कि पर्यावरणीय लिहाज से संवेदनशील होने के साथ नदी के डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन स्टेट लैंड के तौर पर दर्ज होती है। स्थानीय निवासियों ने 24 नवंबर को इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन




00
अवैध निर्माण के चलते अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही पहूज
झांसी के बैदोरा गांव के पास से निकली पहूज जालौन में सिंध नदी से मिलती है। यह नदी झांसी के एक तिहाई इलाके की प्यास बुझाने के साथ ही कई गांव की जीवनरेखा मानी जाती है लेकिन दुख की बात यह कि यह सबसे अधिक अतिक्रमण का शिकार झांसी में ही है। इस नदी के दोनों किनारों पर मंदिर हैं। कई जगह नदी का स्वरूप व्यापक है लेकिन झांसी शहर में यह नदी काफी सिकुड़ चुकी है। इसके दोनों किनारों पर आवासीय कालोनियां विकसित हो चुकी हैं। कई हिस्सों के गंदे नालों का पानी भी इसी नदी में बहाया जाता है। पूर्व सांसद उमा भारती ने नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया था। उस दौरान झांसी विकास प्राधिकरण भी हरकत में आया। उसने डूब क्षेत्र में बनी कॉलोनी चिन्हित करनी शुरू की थी। निषिद्ध क्षेत्र में बोर्ड लगवाए गए लेकिन कुछ समय बाद जमीन माफिया की सांठगांठ से यह काम ठंडे बस्ते में चला गया।

0000

नदी किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं : भानु सहाय
पहूज नदी को लेकर एनजीटी में पैरवी कर रहे बुंदेलखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय का कहना है कि नदी की जमीन पर किसी भी दशा में मकान नहीं बनाया जा सकता। नदी कभी किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हो सकती। डूब क्षेत्र नदी की जमीन है। समय पर ध्यान न दिए जाने की वजह से पहूज नदी की यह स्थिति है। अगर अब ध्यान न दिया गया तो नदी को बचा पाना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि एनजीटी के समक्ष भी यह मामला पेश करेंगे।


0000
इस मामले की जिलाधिकारी से जांच कराई जाएगी। किसी को भी नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण की इजाजत नहीं है। शिकायत सही मिलने पर कार्रवाई भी होगी। पहूज नदी को संरक्षित कराने के लिए उसकी मैपिंग कराई गई है। उसकी मदद से भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नदी के डूब क्षेत्र से किसी तरह की छेड़छाड़ न होने पाए।
बिमल कुमार दुबे, मंडलायुक्त
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed