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चित्रकूट धाम की भीड़ नियंत्रित करने को रेलवे ने बनाया प्लान
ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2015 01:08 AM IST
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झांसी। चित्रकूट धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के हिसाब से रेल प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। मजबूरन यात्रियों को पैसेंजर ट्रेनों की छत पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती हैं। इससे रेल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है, वहीं हादसे की संभावना भी हर समय बनी रहती है। इस स्थिति में रेल प्रशासन अब सुरक्षा की दृष्टि से चित्रकूट धाम स्टेशन के लिए नया प्लान तैयार कर रहा है। योजना के तहत पैसेंजर ट्रेन के आने के पहले एक हजार से बारह सौ यात्रियों को ही स्टेशन के अंदर प्रवेश दिया जाएगा।
चित्रकूट धाम कर्वी में हर माह लगने वाले मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के दौरान हर रोज चित्रकूट धाम स्टेशन पर बीस हजार से अधिक टिकट बिकते हैं। जबकि सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु बिना टिकट यात्रा भी करते हैं। इनमें अधिकांश श्रद्धालु सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर क्षेत्र के ही होते हैं, मगर वह बस के महंगे किराए से बचने के लिए जान जोखिम में डालकर ट्रेन का सफर करने से गुरेज नहीं करते हैं। सभी यात्रियों को अगर डिब्बे में बिठाकर यात्रा करानी है तो कम से कम बीस ट्रेनों का संचालन करना होगा।
एकल रेल मार्ग होने के कारण रेल प्रशासन के लिए ऐसा करना संभव नहीं है। आम दिनों में जहां झांसी व कानपुर से एक- एक ही पैसेंजर उपलब्ध हैं तो वहीं मेले के दौरान झांसी से तीन व कानपुर से एक अतिरिक्त पैसेंजर चलाई जाती हैं। यही कारण हैं कि चित्रकूट स्टेशन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण यात्री कोचों में तो भूसे की तरह भरे ही रहते हैं, छत पर यात्रा करने से भी गुरेज नहीं करते हैं।
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यात्रियों की भीड़ को रोकना रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के बस से बाहर होता है। रेल प्रशासन अब सुरक्षा की दृष्टि से चित्रकूट धाम स्टेशन के लिए नया प्लान तैयार कर रहा है। योजना के तहत पैसेंजर ट्रेन के आने के पहले एक हजार से बारह सौ यात्रियों को ही स्टेशन के अंदर प्रवेश दिया जाएगा। बाकी यात्रियों को स्टेशन के बाहर ही यात्री शेड में रोका जाएगा। यात्रियों के लिए स्टेशन के बाहर और शौचालय बनाने की भी योजना है। इसके अलावा बांदा के जिला प्रशासन से आग्रह कर स्टेशन के बाहर बसों का अतिरिक्त इंतजाम कराया जाएगा।
‘चित्रकूट धाम में मेले के दौरान और अधिक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन संभव नहीं हैं। भीड़ को स्टेशन के बाहर रोकने के लिए आरपीएफ प्लान तैयार कर रही है। इसके अलावा बसों का संचालन कर भीड़ को कम किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन से मदद ली जा रही है।’
एस के अग्रवाल
मंडल रेल प्रबंधक, झांसी रेल मंडल।
चित्रकूट धाम कर्वी में हर माह लगने वाले मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के दौरान हर रोज चित्रकूट धाम स्टेशन पर बीस हजार से अधिक टिकट बिकते हैं। जबकि सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु बिना टिकट यात्रा भी करते हैं। इनमें अधिकांश श्रद्धालु सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर क्षेत्र के ही होते हैं, मगर वह बस के महंगे किराए से बचने के लिए जान जोखिम में डालकर ट्रेन का सफर करने से गुरेज नहीं करते हैं। सभी यात्रियों को अगर डिब्बे में बिठाकर यात्रा करानी है तो कम से कम बीस ट्रेनों का संचालन करना होगा।
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एकल रेल मार्ग होने के कारण रेल प्रशासन के लिए ऐसा करना संभव नहीं है। आम दिनों में जहां झांसी व कानपुर से एक- एक ही पैसेंजर उपलब्ध हैं तो वहीं मेले के दौरान झांसी से तीन व कानपुर से एक अतिरिक्त पैसेंजर चलाई जाती हैं। यही कारण हैं कि चित्रकूट स्टेशन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण यात्री कोचों में तो भूसे की तरह भरे ही रहते हैं, छत पर यात्रा करने से भी गुरेज नहीं करते हैं।
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यात्रियों की भीड़ को रोकना रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के बस से बाहर होता है। रेल प्रशासन अब सुरक्षा की दृष्टि से चित्रकूट धाम स्टेशन के लिए नया प्लान तैयार कर रहा है। योजना के तहत पैसेंजर ट्रेन के आने के पहले एक हजार से बारह सौ यात्रियों को ही स्टेशन के अंदर प्रवेश दिया जाएगा। बाकी यात्रियों को स्टेशन के बाहर ही यात्री शेड में रोका जाएगा। यात्रियों के लिए स्टेशन के बाहर और शौचालय बनाने की भी योजना है। इसके अलावा बांदा के जिला प्रशासन से आग्रह कर स्टेशन के बाहर बसों का अतिरिक्त इंतजाम कराया जाएगा।
‘चित्रकूट धाम में मेले के दौरान और अधिक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन संभव नहीं हैं। भीड़ को स्टेशन के बाहर रोकने के लिए आरपीएफ प्लान तैयार कर रही है। इसके अलावा बसों का संचालन कर भीड़ को कम किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन से मदद ली जा रही है।’
एस के अग्रवाल
मंडल रेल प्रबंधक, झांसी रेल मंडल।