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कोरोना मरीजों के इलाज से दूरी बनाए हुए हैं निजी अस्पताल
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अस्पताल
- फोटो : ???????
झांसी। झांसी में निजी अस्पतालों की भरमार है, लेकिन कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अब तक एक भी नर्सिंगहोम आगे नहीं आया है। जबकि, मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या की वजह से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध संसाधन अब कम पड़ने लगे हैं। यदि विपत्ति के इस दौर में भी नर्सिंग होम अपनी जिम्मेदारी से कन्नी काटे रहे, तो आने वाले दिनों में हालात भयावह हो सकते हैं।
झांसी में 120 निजी अस्पताल, 450 निजी चिकित्सक, निजी अस्पतालों में 35 वेंटिलेटर व 1200 पैरा मेडिकल स्टाफ है। लेकिन, ये संसाधन कोरोना मरीजों के इलाज में अब तक काम नहीं आए हैं। जबकि, प्रदेश के कई जिलों में निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जबकि, स्थिति ये है कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या की वजह से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध संसाधन अब कमतर साबित होने लगे हैं। स्थिति ये है कि इमरजेंसी में भर्ती होने वाले संदिग्ध रोगियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए बेड के खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। बावजूद, आपदा के इस दौर में भी निजी अस्पताल अपनी जिम्मेदारी से दूरी बनाए हुए हैं। झांसी के निजी अस्पतालों में इलाज न मिलने की वजह से कोरोना के तमाम मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम के अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
60 आईसीयू बेड, 130 ऑक्सीजन पर
मेडिकल कॉलेज में एल-3 के 210 बेड हैं। इसमें से 60 आईसीयू के हैं। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज में 130 मरीज ऑक्सीजन पर चल रहे हैं। इनमें से कुछ वेंटिलेटर तो कई हाई फ्लो ऑक्सीजन पर रखे गए हैं। आइसोलेशन वार्ड में भी गंभीर रोगी भर्ती हैं।
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गंभीर रोगी 15 दिन में होता डिस्चार्ज
आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना 100 से अधिक कोरोना के केस आने लगे हैं। इनमें से 10 फीसदी ही गंभीर रोगी आते हैं तो भी इनकी संख्या 10 से ज्यादा हो जाती है। जबकि, एक गंभीर रोगी को डिस्चार्ज होने में लगभग 15 दिन तो लग ही जाते हैं। वहीं, कोविड आईसीयू फुल हैं। आगे भी इसी संख्या में केस आते रहे तो पता नहीं गंभीर रोगियों को कहां और कैसे भर्ती किया जाएगा।
झांसी। नर्सिंगहोमों में कोविड मरीजों का इलाज शुरू करने पर मंगलवार को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए की बैठक हुई। इसमें तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि नर्सिंगहोमों को आगे आकर कोविड मरीजों का उपचार शुरू करना होगा। इसके बाद तय हुआ कि निजी अस्पताल कोविड मरीजों का इलाज करेंगे।
कोरोना मरीजों का उपचार निजी अस्पतालों ने अब तक शुरू नहीं किया है। जबकि, कई बार प्रशासन के अधिकारियों के साथ आईएमए और नर्सिंगहोम एसोसिएशन की बैठक हो चुकी है। ऐसे हालातों में कोविड के मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कई मरीजों को झांसी से 450 किलोमीटर दूर दिल्ली जाकर उपचार कराना पड़ रहा है। मरीजों की इस समस्या को मंगलवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। इसके बाद विकास भवन सभागार में हुई बैठक इस पर मंथन हुआ। बैठक में डीएम आंद्रा वामसी ने कहा कि जनपद में कोविड पेशेंट की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकारी अस्पताल लगभग भर गए हैं। इस समय कोविड के 1044 सक्रिय मरीज है और उन्हें भर्ती करना चुनौती है। यदि नर्सिंग होम मिलकर काम करें तो इस समस्या से निपटा जा सकेगा। प्राइवेट नर्सिंग होम आगे आएं और अपना कर्तव्य निभाएं। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि ऐसे नर्सिंगहोम जहां सारी व्यवस्थाएं हैं। वह आगे आएं और इलाज करें। उन्होंने कहा कि यदि एमबीबीएस नहीं मिल रहे हैं तो बीएएमएस डॉक्टर अस्पताल में लगाएं। नर्सिंगहोमों के मरीजों का इलाज नहीं करने से काफी समस्या हो रही है। कोविड मरीजों को बेवजह दूसरे शहरों की भागदौड़ करनी पड़ रही है। विधायक रवि शर्मा ने नर्सिंग होम एसोसिएशन से कहा कि आपसे आग्रह है कि आप सेवाएं दें, प्रशासन सुरक्षा देगा। आर्थिक क्षति न हो उसके लिए गाइडलाइन के अनुसार भुगतान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें बेहद अफसोस है कि हम मरीजों को होटल में रखें हैं क्योंकि नर्सिंग होम आगे आकर मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे। मेयर रामतीर्थ सिंघल ने कहा कि आपातकाल व सामान्य काल में व्यवहार एक-सा रखना ही बेहतर है। आप डॉक्टर को धरती का भगवान मानकर सम्मानित करते हैं। आप स्वयं आगे आएं और कोविड पेशेंट का इलाज करें। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे नर्सिंगहोम चिन्हित करें, जहां बेडों की संख्या अधिक और सुविधाएं भी पर्याप्त हों। नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एके सांवल ने कहा कि यह लड़ाई हम सभी की साझा है, जो भी प्रशासन तय करेगा, हम उस कार्य को करने के लिए तैयार हैं। इस दौरान बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा, पूर्व मंत्री रणजीत सिंह जूदेव, संजीव ऋंगऋषि, सुदेश पटेल, सीडीओ शैलेष कुमार, नगर आयुक्त अवनीश राय, उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित, संजय पटवारी, मेडिकल कॉलेज उप प्राचार्य डॉ. एसएन सेंगर, सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्या, डॉ. वीके गुप्ता मौजूद रहे।
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झांसी में 120 निजी अस्पताल, 450 निजी चिकित्सक, निजी अस्पतालों में 35 वेंटिलेटर व 1200 पैरा मेडिकल स्टाफ है। लेकिन, ये संसाधन कोरोना मरीजों के इलाज में अब तक काम नहीं आए हैं। जबकि, प्रदेश के कई जिलों में निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जबकि, स्थिति ये है कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या की वजह से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध संसाधन अब कमतर साबित होने लगे हैं। स्थिति ये है कि इमरजेंसी में भर्ती होने वाले संदिग्ध रोगियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए बेड के खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। बावजूद, आपदा के इस दौर में भी निजी अस्पताल अपनी जिम्मेदारी से दूरी बनाए हुए हैं। झांसी के निजी अस्पतालों में इलाज न मिलने की वजह से कोरोना के तमाम मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम के अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
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60 आईसीयू बेड, 130 ऑक्सीजन पर
मेडिकल कॉलेज में एल-3 के 210 बेड हैं। इसमें से 60 आईसीयू के हैं। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज में 130 मरीज ऑक्सीजन पर चल रहे हैं। इनमें से कुछ वेंटिलेटर तो कई हाई फ्लो ऑक्सीजन पर रखे गए हैं। आइसोलेशन वार्ड में भी गंभीर रोगी भर्ती हैं।
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गंभीर रोगी 15 दिन में होता डिस्चार्ज
आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना 100 से अधिक कोरोना के केस आने लगे हैं। इनमें से 10 फीसदी ही गंभीर रोगी आते हैं तो भी इनकी संख्या 10 से ज्यादा हो जाती है। जबकि, एक गंभीर रोगी को डिस्चार्ज होने में लगभग 15 दिन तो लग ही जाते हैं। वहीं, कोविड आईसीयू फुल हैं। आगे भी इसी संख्या में केस आते रहे तो पता नहीं गंभीर रोगियों को कहां और कैसे भर्ती किया जाएगा।
झांसी। नर्सिंगहोमों में कोविड मरीजों का इलाज शुरू करने पर मंगलवार को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए की बैठक हुई। इसमें तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि नर्सिंगहोमों को आगे आकर कोविड मरीजों का उपचार शुरू करना होगा। इसके बाद तय हुआ कि निजी अस्पताल कोविड मरीजों का इलाज करेंगे।
कोरोना मरीजों का उपचार निजी अस्पतालों ने अब तक शुरू नहीं किया है। जबकि, कई बार प्रशासन के अधिकारियों के साथ आईएमए और नर्सिंगहोम एसोसिएशन की बैठक हो चुकी है। ऐसे हालातों में कोविड के मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कई मरीजों को झांसी से 450 किलोमीटर दूर दिल्ली जाकर उपचार कराना पड़ रहा है। मरीजों की इस समस्या को मंगलवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। इसके बाद विकास भवन सभागार में हुई बैठक इस पर मंथन हुआ। बैठक में डीएम आंद्रा वामसी ने कहा कि जनपद में कोविड पेशेंट की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकारी अस्पताल लगभग भर गए हैं। इस समय कोविड के 1044 सक्रिय मरीज है और उन्हें भर्ती करना चुनौती है। यदि नर्सिंग होम मिलकर काम करें तो इस समस्या से निपटा जा सकेगा। प्राइवेट नर्सिंग होम आगे आएं और अपना कर्तव्य निभाएं। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि ऐसे नर्सिंगहोम जहां सारी व्यवस्थाएं हैं। वह आगे आएं और इलाज करें। उन्होंने कहा कि यदि एमबीबीएस नहीं मिल रहे हैं तो बीएएमएस डॉक्टर अस्पताल में लगाएं। नर्सिंगहोमों के मरीजों का इलाज नहीं करने से काफी समस्या हो रही है। कोविड मरीजों को बेवजह दूसरे शहरों की भागदौड़ करनी पड़ रही है। विधायक रवि शर्मा ने नर्सिंग होम एसोसिएशन से कहा कि आपसे आग्रह है कि आप सेवाएं दें, प्रशासन सुरक्षा देगा। आर्थिक क्षति न हो उसके लिए गाइडलाइन के अनुसार भुगतान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें बेहद अफसोस है कि हम मरीजों को होटल में रखें हैं क्योंकि नर्सिंग होम आगे आकर मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे। मेयर रामतीर्थ सिंघल ने कहा कि आपातकाल व सामान्य काल में व्यवहार एक-सा रखना ही बेहतर है। आप डॉक्टर को धरती का भगवान मानकर सम्मानित करते हैं। आप स्वयं आगे आएं और कोविड पेशेंट का इलाज करें। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे नर्सिंगहोम चिन्हित करें, जहां बेडों की संख्या अधिक और सुविधाएं भी पर्याप्त हों। नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एके सांवल ने कहा कि यह लड़ाई हम सभी की साझा है, जो भी प्रशासन तय करेगा, हम उस कार्य को करने के लिए तैयार हैं। इस दौरान बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा, पूर्व मंत्री रणजीत सिंह जूदेव, संजीव ऋंगऋषि, सुदेश पटेल, सीडीओ शैलेष कुमार, नगर आयुक्त अवनीश राय, उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित, संजय पटवारी, मेडिकल कॉलेज उप प्राचार्य डॉ. एसएन सेंगर, सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्या, डॉ. वीके गुप्ता मौजूद रहे।