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प्रमुख सचिव ने मांगा एक माह की जांचों का रिकॉर्ड
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में लगातार खराब चल रहीं मशीनों की गूंज शासन के कानों तक पहुंच गई है। शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा ने प्राचार्य को फोन कर डॉक्टरों द्वारा बाहर से जांचें लिखने पर नाराजगी जताई। साथ ही, एक महीने में कितनी जांचें बाहर और रेडियोलॉजी विभाग में हुई हैं, इसका रिकॉर्ड मांगा है।
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की मशीनें लंबे समय से खराब चल रही थीं। वहीं, मरीजों की इस समस्या को अमर उजाला लगातार उठा रहा है। बृहस्पतिवार के अपने अंक में अमर उजाला ने जांच ठप, अधिकारी मस्त, मरीज पस्त और शुक्रवार को लाखों की कमाई का सवाल, मशीन क्यों न हों खराब शीर्षक से प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कीं। शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक को फोन किया। उन्होंने कंसल्टेंट द्वारा बाहर की जांचें लिखने पर नाराजगी जताई। कहा कि डॉक्टरों की बैठक बुलाकर सख्त हिदायत दी जाए। प्रमुख सचिव ने पूछा कि कितनी जांचें बाहर, कितनी रेडियोलॉजी विभाग से हुई हैं। पिछले एक महीने का विस्तृत ब्योरा बनाकर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पूछा कि सीटी स्कैन मशीन की स्थिति क्या है? कब तक ठीक हो जाएगी? उन्हें बताया गया कि सोमवार को इंजीनियर आ रहा है।
इसके बाद तत्काल प्राचार्य ने विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक में प्राचार्य ने सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हाल में मरीज को बाहर की जांचें न लिखी जाएंगी। पैथोलॉजी जांचें भी चिकित्सालय में कराई जाएं। समय से ओपीडी में पहुंचकर डॉक्टर पूरे समय तक बैठें। मरीजों को जेनरिक दवाएं ही लिखी जाएं। वह निरीक्षण कर खुद हकीकत को परखेंगी। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की मशीनें लंबे समय से खराब चल रही थीं। वहीं, मरीजों की इस समस्या को अमर उजाला लगातार उठा रहा है। बृहस्पतिवार के अपने अंक में अमर उजाला ने जांच ठप, अधिकारी मस्त, मरीज पस्त और शुक्रवार को लाखों की कमाई का सवाल, मशीन क्यों न हों खराब शीर्षक से प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कीं। शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक को फोन किया। उन्होंने कंसल्टेंट द्वारा बाहर की जांचें लिखने पर नाराजगी जताई। कहा कि डॉक्टरों की बैठक बुलाकर सख्त हिदायत दी जाए। प्रमुख सचिव ने पूछा कि कितनी जांचें बाहर, कितनी रेडियोलॉजी विभाग से हुई हैं। पिछले एक महीने का विस्तृत ब्योरा बनाकर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पूछा कि सीटी स्कैन मशीन की स्थिति क्या है? कब तक ठीक हो जाएगी? उन्हें बताया गया कि सोमवार को इंजीनियर आ रहा है।
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इसके बाद तत्काल प्राचार्य ने विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक में प्राचार्य ने सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हाल में मरीज को बाहर की जांचें न लिखी जाएंगी। पैथोलॉजी जांचें भी चिकित्सालय में कराई जाएं। समय से ओपीडी में पहुंचकर डॉक्टर पूरे समय तक बैठें। मरीजों को जेनरिक दवाएं ही लिखी जाएं। वह निरीक्षण कर खुद हकीकत को परखेंगी। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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