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उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बने प्रीपेड विद्युत मीटर
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झांसी। बिजली उपभोक्ताओं के लिए अस्थायी कनेक्शन में प्रीपेड मीटर लगवाना मुसीबत बन गया है। इस मीटर को रिचार्ज कराने की कठिन प्रक्रिया के कारण लोगों को बेहद परेशान होना पड़ रहा है। विभाग ने भी ऐसे उपभोक्ताओं की समस्या निपटाने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं कर रखी है।
बिजली विभाग भवन निर्माण के लिए अस्थायी कनेक्शन प्रदान करता है। शहर में पांच हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता भी हैं जो नए विकसित क्षेत्रों में रह रहे हैं। क्षेत्र में विद्युतीकरण न होने के कारण अस्थायी कनेक्शन लेकर ही दूर- दूर केबिल डालकर बिजली जला रहे हैं। इस कनेक्शन में उपभोक्ता को हर हफ्ते 450 रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से बिल अदा करना पड़ता है। साथ ही साढ़े सात प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी लगती है। पहले विद्युत विभाग उपभोक्ताओं के यहां सामान्य मीटर लगाता था। अगर आपने हफ्ते में 450 रुपये से अधिक की बिजली जलाई तो वह अंतिम भुगतान में जुड़कर बिल बन जाता है। इसमें बिजली कटने का डर नहीं रहता था।
मगर विभाग अब नए अस्थायी कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर लगाने लगा है। इसमें उपभोक्ता को हर तीन महीने में रिचार्ज कराना पड़ता है। रिचार्ज कराते वक्त आपको मीटर में आने वाला 40 नंबरों का कोड भी बताना होगा। अगर उसमें एक भी नंबर गलत हो गया तो दोबारा घर जाकर उसे लिखकर लाना पड़ता है। दूसरा, संबंधित कार्यालय में जाकर पहले बिल बनवाना पड़ता है कि आपने एक हफ्ते में 450 रुपये से कम बिजली जलाई तो उसके अंतर, साढ़े सात प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूूटी व ब्याज जमा करना होगा। तब जाकर ही रिचार्ज होगा। इन सभी नियमों के कारण प्रीपेड मीटर वाले चकरघिन्नी बने हुए हैं। इस संबंध में अधिशासी अभियंता डी. यादवेंदु ने बताया कि अस्थायी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को नियमों का पालन करना ही होगा।
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बिजली विभाग भवन निर्माण के लिए अस्थायी कनेक्शन प्रदान करता है। शहर में पांच हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता भी हैं जो नए विकसित क्षेत्रों में रह रहे हैं। क्षेत्र में विद्युतीकरण न होने के कारण अस्थायी कनेक्शन लेकर ही दूर- दूर केबिल डालकर बिजली जला रहे हैं। इस कनेक्शन में उपभोक्ता को हर हफ्ते 450 रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से बिल अदा करना पड़ता है। साथ ही साढ़े सात प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी लगती है। पहले विद्युत विभाग उपभोक्ताओं के यहां सामान्य मीटर लगाता था। अगर आपने हफ्ते में 450 रुपये से अधिक की बिजली जलाई तो वह अंतिम भुगतान में जुड़कर बिल बन जाता है। इसमें बिजली कटने का डर नहीं रहता था।
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मगर विभाग अब नए अस्थायी कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर लगाने लगा है। इसमें उपभोक्ता को हर तीन महीने में रिचार्ज कराना पड़ता है। रिचार्ज कराते वक्त आपको मीटर में आने वाला 40 नंबरों का कोड भी बताना होगा। अगर उसमें एक भी नंबर गलत हो गया तो दोबारा घर जाकर उसे लिखकर लाना पड़ता है। दूसरा, संबंधित कार्यालय में जाकर पहले बिल बनवाना पड़ता है कि आपने एक हफ्ते में 450 रुपये से कम बिजली जलाई तो उसके अंतर, साढ़े सात प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूूटी व ब्याज जमा करना होगा। तब जाकर ही रिचार्ज होगा। इन सभी नियमों के कारण प्रीपेड मीटर वाले चकरघिन्नी बने हुए हैं। इस संबंध में अधिशासी अभियंता डी. यादवेंदु ने बताया कि अस्थायी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को नियमों का पालन करना ही होगा।
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