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प्री मानसून 20 के बाद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:09 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। केरल में मानसून लेट हो जाने की वजह से तापमान में लगातार उतार चढ़ाव बना हुआ है। कभी तपिश भरी गर्मी हो जाती है, तो कभी ठंडी हवाएं चलने से तापमान में नरमी आ जाती है। मंगलवार को भी झांसी का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। इससे जनपद के लोग गर्मी में झुलस गए। अब प्री मानसून 20 जून के बाद आने की संभावना है, तभी लोगों को राहत मिल सकेगी।
भारत में हर साल केरल से मानसून की शुरूआत होती है। 31 मई या एक जून को केरल में मानसून आ जाता है लेकिन इस बार एक सप्ताह देरी से आया। मंगलवार को केरल में मानसून पहुंचा। इस कारण लगातार मौसम नरम-गरम बना रहा। आम तौर पर बुंदेलखंड में 22 जून के आसपास मानसून आता है, पर अब इसके 25 जून के बाद आने की संभावना मौसम विभाग जता रहा है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि प्री मानसून 20 जून के बाद आ सकता है। फिलहाल कुछ दिन और 45 के आसपास तापमान रहने से लोगों को गर्मी झेलनी पड़ेगी।
प्री मानसून के बाद करें बुआई
लंबी अवधि की फसलें जैसे मूंगफली, सोयाबीन, मक्का की बुआई प्री मानसून आने की पुख्ता सूचना या फिर आ जाने के बाद ही किसानों को करने की सलाह मौसम वैज्ञानिक दे रहे हैं। उनकी सलाह है कि प्री मानसून में कई बार बारिश नहीं भी होती है। इसलिए यदि किसान जल्दबाजी में लंबी अवधि की फसलों की बुआई कर देते हैं, तो बारिश न होने पर उन्हें नुकसान भी हो सकता है।
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60 से 65 प्रतिशत रही आर्द्रता
जनपद में आर्द्रता भी 60 से 65 के बीच बनी हुई है। इससे घरों में कूलर भी लोगों को राहत नहीं दे पा रहे हैं। बीच-बीच में बारिश हो जाने से वाष्पीकरण दर बढ़ जाती है। इसके साथ ही नमी के प्रतिशत में भी इजाफा हो जाता है। इस कारण उमस में बढ़ोतरी हो जाती है और लोगों का पसीना छूटने लगता है।
ऐसे बदलता रहा मौसम का रंग
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प्री मानसून के बाद करें बुआई
लंबी अवधि की फसलें जैसे मूंगफली, सोयाबीन, मक्का की बुआई प्री मानसून आने की पुख्ता सूचना या फिर आ जाने के बाद ही किसानों को करने की सलाह मौसम वैज्ञानिक दे रहे हैं। उनकी सलाह है कि प्री मानसून में कई बार बारिश नहीं भी होती है। इसलिए यदि किसान जल्दबाजी में लंबी अवधि की फसलों की बुआई कर देते हैं, तो बारिश न होने पर उन्हें नुकसान भी हो सकता है।
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जनपद में आर्द्रता भी 60 से 65 के बीच बनी हुई है। इससे घरों में कूलर भी लोगों को राहत नहीं दे पा रहे हैं। बीच-बीच में बारिश हो जाने से वाष्पीकरण दर बढ़ जाती है। इसके साथ ही नमी के प्रतिशत में भी इजाफा हो जाता है। इस कारण उमस में बढ़ोतरी हो जाती है और लोगों का पसीना छूटने लगता है।
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