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आर्थिक तंगी से परेशान प्रवासी मजदूर ने दी जान
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Pravasi laboure committed sucide
- फोटो : DEHAT
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टहरौली। थाना क्षेत्र के ग्राम बेरबई निवासी प्रवासी मजदूर प्रेमनारायण रायकवार (45) ने आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होकर अपने खेत पर ही तार व तौलिया का फंदा बनाकर जामुन के पेड़ से लटककर शनिवार की सुबह 8 बजे आत्महत्या कर ली। वह फरीदाबाद में मजदूरी करता था। दो महीने पहले लॉकडाउन में कोई साधन न मिलने पर पैदल ही अपने गांव आया था। उस पर पंजाब नेशनल बैंक का 50 हजार और साहूकारों और रिश्तेदारों का भी कर्ज था। वह कर्ज की वजह से काफी परेशान था। इधर आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था।
प्रेमनारायण रायकवार फरीदाबाद में रहकर ही मजदूरी करता था। उसका छोटा बेटा जुगेंद्र अपनी मां के साथ गांव में ही रहता था। कोरोना फैलने के बाद लॉकडाउन लगने पर काम बंद हो गया। वहां पर खाने पाने की दिक्कत होने पर वह अपने साथियों के साथ पैदल ही वहां से चल दिया। कई दिन बाद वह गांव पहुंचा था। उसके छोटे बेटे ने बताया कि पिता ने पंजाब नेशनल बैंक से हजार हजार रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा मंझले बेटे की शादी के लिए साहूकारों और रिश्तेदारों से भी कर्ज लिया था। लॉकडाउन की वजह से घर आया गया। यहां पर भी कोई काम नहीं मिला। इस पर वह काफी परेशान था। इस समय मंझला बेटा भी दिल्ली से परिवार के साथ गांव आ गया था।
महेवा खेरा निवासी मृतक के साले राम सिंह ने बताया कि वह बहन के साथ आकर उसे देख जाएं, नहीं तो वह उन्हें फिर कभी नहीं मिलेगा। इसके बाद राम सिंह ने प्रेमनारायण के बेटे जुगेंद्र को जानकारी दी। वह जल्दी से खेत पर पहुंचा तो वहां उसके पिता पेड़ पर फांसी के फंदे से लटकते मिले। इस पर वह चीखने लगा। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग भी वहां पर पहुंच गए। घटना की सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष डॉ. आशीष मिश्रा ने शव को पेड़ से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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सिर्फ ढाई बीघा है जमीन
मृतक प्रेमनारायण के पास सिर्फ ढाई बीघा जमीन है। इतनी कम जमीन पर फसल भी इतनी नहीं होती है कि परिवार के लिए साल भर का गल्ला हो जाए। वह अपने तीन बेटों की वजह से जमीन भी नहीं बेचना चाहता था। छोटे बेटे ने बताया कि इतना कर्ज न चुकाने पाने की वजह से पिता परेशान थे। वह कहते थे कि अगर जमीन बेच कर कर्ज चुका देंगे तो परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। हम लोगों को नहीं मालूम था कि इस परेशानी में वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
लॉडकाउन की वजह से आ गई मुसीबत
प्रेमनारायण के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा खंडवा में परिवार के साथ रहकर मजदूरी करता है। उससे छोटा बेटा अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था लेकिन प्रेमनारायण फरीदाबाद में रहकर मजदूरी कर रहा था। लॉकडाउन से पहले उसका काम अच्छी तरह से चल रहा था। वह पैसे भी घर भेज रहा था। लॉकडाउन लगने पर वह वहीं रुका रहा। इसके बाद अपने गांव आ गया। यहां पर आने के बाद उसका मंझला बेटा भी परिवार के साथ आ गया। यहां पर उनको किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली। कहीं पर कोई काम भी न मिलने से परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। परिवार की परेशानी उससे देखी नहीं गई और उसने आत्महत्या कर ली।
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प्रेमनारायण रायकवार फरीदाबाद में रहकर ही मजदूरी करता था। उसका छोटा बेटा जुगेंद्र अपनी मां के साथ गांव में ही रहता था। कोरोना फैलने के बाद लॉकडाउन लगने पर काम बंद हो गया। वहां पर खाने पाने की दिक्कत होने पर वह अपने साथियों के साथ पैदल ही वहां से चल दिया। कई दिन बाद वह गांव पहुंचा था। उसके छोटे बेटे ने बताया कि पिता ने पंजाब नेशनल बैंक से हजार हजार रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा मंझले बेटे की शादी के लिए साहूकारों और रिश्तेदारों से भी कर्ज लिया था। लॉकडाउन की वजह से घर आया गया। यहां पर भी कोई काम नहीं मिला। इस पर वह काफी परेशान था। इस समय मंझला बेटा भी दिल्ली से परिवार के साथ गांव आ गया था।
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महेवा खेरा निवासी मृतक के साले राम सिंह ने बताया कि वह बहन के साथ आकर उसे देख जाएं, नहीं तो वह उन्हें फिर कभी नहीं मिलेगा। इसके बाद राम सिंह ने प्रेमनारायण के बेटे जुगेंद्र को जानकारी दी। वह जल्दी से खेत पर पहुंचा तो वहां उसके पिता पेड़ पर फांसी के फंदे से लटकते मिले। इस पर वह चीखने लगा। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग भी वहां पर पहुंच गए। घटना की सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष डॉ. आशीष मिश्रा ने शव को पेड़ से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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सिर्फ ढाई बीघा है जमीन
मृतक प्रेमनारायण के पास सिर्फ ढाई बीघा जमीन है। इतनी कम जमीन पर फसल भी इतनी नहीं होती है कि परिवार के लिए साल भर का गल्ला हो जाए। वह अपने तीन बेटों की वजह से जमीन भी नहीं बेचना चाहता था। छोटे बेटे ने बताया कि इतना कर्ज न चुकाने पाने की वजह से पिता परेशान थे। वह कहते थे कि अगर जमीन बेच कर कर्ज चुका देंगे तो परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। हम लोगों को नहीं मालूम था कि इस परेशानी में वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
लॉडकाउन की वजह से आ गई मुसीबत
प्रेमनारायण के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा खंडवा में परिवार के साथ रहकर मजदूरी करता है। उससे छोटा बेटा अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था लेकिन प्रेमनारायण फरीदाबाद में रहकर मजदूरी कर रहा था। लॉकडाउन से पहले उसका काम अच्छी तरह से चल रहा था। वह पैसे भी घर भेज रहा था। लॉकडाउन लगने पर वह वहीं रुका रहा। इसके बाद अपने गांव आ गया। यहां पर आने के बाद उसका मंझला बेटा भी परिवार के साथ आ गया। यहां पर उनको किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली। कहीं पर कोई काम भी न मिलने से परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। परिवार की परेशानी उससे देखी नहीं गई और उसने आत्महत्या कर ली।