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‘राख’ को चाहिए 577 एकड़ जमीन

Sun, 22 Nov 2015 01:05 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sun, 22 Nov 2015 01:05 AM IST
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power plant
झांसी। पारीछा थर्मल प्लांट उत्पादन इकाइयों से निकलने वाली एश (राख) को रखने के लिए जल्द ही आसपास के गांवों की 577 एकड़ भूमि को अधिग्रहीत किया जाएगा। प्लांट प्रशासन ने इसके लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि, पहले चरण में किसानों से बात होगी, उनकी सहमति के बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया पर कदम उठाया जाएगा। मुआवजा राशि तय करने में जिला प्रशासन की मदद ली जाएगी।
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वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा है। शुरुआत में थर्मल पावर प्लांट के अंदर 110- 110 मेगवाट की दो इकाइयों से उत्पादन शुरू हुआ था। उस समय एश (राख) को एकत्रित करने के लिए 110 मेगावाट का डैम बेतवा नहर के किनारे बनाया गया था।
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इसी तरह 210- 210 मेगावाट की नई इकाइयों से उत्पादन शुरू होने पर 210 मेगावाट क्षमता का एश डैम तैयार कर लिया गया। लेकिन, साढ़े तीन साल पहले तैयार हुईं 250-250 मेगावाट की नई इकाइयों से निकलने वाली राख के निस्तारण के लिए अभी तक कोई विकल्प तैयार नहीं किया गया है।
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इस कारण सभी एश डैम में क्षमता से अधिक राख भर चुकी है। इस कारण पारीछा थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा अगले बीस से पच्चीस साल तक कोई परेशानी न हो, इस बात का ध्यान रखकर नए एश डैम बनाने के लिए 577 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।

योजना के तहत थर्मल पावर हाउस के निकट स्थित ग्राम गुलारा, महेबा व मुराटा में इसके लिए जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। शासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए मंजूरी दे दी  है। प्लांट प्रशासन ने भूमि अधिग्रहीत के पहले चरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए फंड एकत्रित किया जा रहा है। जल्द ही किसानों से सहमति बनाकर आगे की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

‘नए एश डैम बनाना अत्यंत आवश्यक है। भूमि अधिग्रहीत करने की कार्रवाई प्रारंभिक चरण में चल रही है।  जल्द ही किसानों से बात कर इस कार्य को गति दी जाएगी। बजट की भी व्यवस्था की जा रही है।’
अखिलेश सिंह
मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट

‘किसानों से सहमति बनाकर भूमि अधिग्रहण का काम करना है। भूमि की मुआवजा दर जिला प्रशासन तय करेगा’
अनुराग यादव
जिलाधिकारी, झांसी।

प्रतिदिन निकलती है 14 हजार मीट्रिक टन राख
प्लांट में सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए।


उत्पादन के बाद चौदह हजार मीट्रिक टन एश प्रतिदिन पानी के घोल के रूम में डैम तक पहुंचाई जाती है। पूर्व में प्रबंध तंत्र ने योजना बनाई थी कि इन नई इकाइयों से जो राख निकलेगी, उसमें से अस्सी प्रतिशत सीमेंट फैक्ट्रियों को बेच दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। राख खरीदने को कोई फर्म सामने नहीं आई।
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