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Jhansi News: अवर अभियंताओं की कमी से जूझ रही विद्युत वितरण व्यवस्था
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। अवर अभियंताओं को विद्युत वितरण व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसके बावजूद, महकमे में अवर अभियंताओं की कमी बनी हुई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में दो पावर हाउस पर एक अवर अभियंता ही तैनात है। जबकि, शहरी क्षेत्र में 33 केवी की लाइन के रखरखाव के लिए केवल दो अवर अभियंता ही तैनात हैं।
फॉल्ट व ब्रेकडाउन या अन्य तकनीकी मामला सामने आने पर अवर अभियंता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा विभाग से जुड़े अन्य कार्यों की जिम्मेदारी भी अवर अभियंता की होती है। यही वजह है कि प्रत्येक पावर हाउस में न्यूनतम एक अवर अभियंता की नियुक्ति निर्धारित है। लेकिन, यहां स्थिति एकदम इतर है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 39 पावर हाउस हैं। इनमें केवल 19 अवर अभियंता ही तैनात हैं। एक अवर अभियंता को दो पावर हाउस का काम देखना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनें लंबी हैं। ऐसे में वितरण व्यवस्था का सुचारु रखने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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16 पावर हाउस हैं शहर में
शहरी क्षेत्र में 33 केवी लाइन के जेल चौराहा, नंदनपुरा, सीपरी, रानीमहल समेत 16 पावर हाउस हैं। केवल दो अवर अभियंता ही पूरे शहर की 33 केवी लाइन की व्यवस्था को देखते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें कॉल किया जाता है और तब कहीं तकनीकी खामियां दूर होती हैं। यही नहीं रेलवे एमईएस आदि की बिजली व्यवस्था भी इन्हीं के हवाले है।
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वर्टिकल व्यवस्था ने बिगाड़ा गणित
एक फरवरी से शहरी क्षेत्र में वर्टिकल व्यवस्था शुरू हुई थी। उस वक्त व्यावसायिक खंड-एक में तीन और व्यावसायिक खंड-2 में चार अवर अभियंता को काम पर लगा दिया गया था। जबकि, पावर हाउस पर रख रखाव और अनुरक्षण कार्य, ब्रेकडाउन अन्य कार्य के लिए केवल दो अवर अभियंता मिल सके। हालांकि, 11 केवी की वितरण व्यवस्था के लिए पांच अवर अभियंता पदस्थ हैं । अधीक्षण अभियंता (शहरी क्षेत्र) पुष्कर सिंह का कहना है कि वर्टीकल व्यवस्था के तहत स्वीकृत पदों के हिसाब से अवर अभियंता काम कर रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में 19 अवर अभियंता हैं, जबकि 39 पावर हाउस हैं। इससे लाइनों के रखरखाव में परेशानी का सामना करना पड़ता है। - मोहम्मद अफरोज आलम, अधीक्षण अभियंता-ग्रामीण
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झांसी। अवर अभियंताओं को विद्युत वितरण व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसके बावजूद, महकमे में अवर अभियंताओं की कमी बनी हुई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में दो पावर हाउस पर एक अवर अभियंता ही तैनात है। जबकि, शहरी क्षेत्र में 33 केवी की लाइन के रखरखाव के लिए केवल दो अवर अभियंता ही तैनात हैं।
फॉल्ट व ब्रेकडाउन या अन्य तकनीकी मामला सामने आने पर अवर अभियंता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा विभाग से जुड़े अन्य कार्यों की जिम्मेदारी भी अवर अभियंता की होती है। यही वजह है कि प्रत्येक पावर हाउस में न्यूनतम एक अवर अभियंता की नियुक्ति निर्धारित है। लेकिन, यहां स्थिति एकदम इतर है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 39 पावर हाउस हैं। इनमें केवल 19 अवर अभियंता ही तैनात हैं। एक अवर अभियंता को दो पावर हाउस का काम देखना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनें लंबी हैं। ऐसे में वितरण व्यवस्था का सुचारु रखने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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16 पावर हाउस हैं शहर में
शहरी क्षेत्र में 33 केवी लाइन के जेल चौराहा, नंदनपुरा, सीपरी, रानीमहल समेत 16 पावर हाउस हैं। केवल दो अवर अभियंता ही पूरे शहर की 33 केवी लाइन की व्यवस्था को देखते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें कॉल किया जाता है और तब कहीं तकनीकी खामियां दूर होती हैं। यही नहीं रेलवे एमईएस आदि की बिजली व्यवस्था भी इन्हीं के हवाले है।
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वर्टिकल व्यवस्था ने बिगाड़ा गणित
एक फरवरी से शहरी क्षेत्र में वर्टिकल व्यवस्था शुरू हुई थी। उस वक्त व्यावसायिक खंड-एक में तीन और व्यावसायिक खंड-2 में चार अवर अभियंता को काम पर लगा दिया गया था। जबकि, पावर हाउस पर रख रखाव और अनुरक्षण कार्य, ब्रेकडाउन अन्य कार्य के लिए केवल दो अवर अभियंता मिल सके। हालांकि, 11 केवी की वितरण व्यवस्था के लिए पांच अवर अभियंता पदस्थ हैं । अधीक्षण अभियंता (शहरी क्षेत्र) पुष्कर सिंह का कहना है कि वर्टीकल व्यवस्था के तहत स्वीकृत पदों के हिसाब से अवर अभियंता काम कर रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में 19 अवर अभियंता हैं, जबकि 39 पावर हाउस हैं। इससे लाइनों के रखरखाव में परेशानी का सामना करना पड़ता है। - मोहम्मद अफरोज आलम, अधीक्षण अभियंता-ग्रामीण