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बिजली कटौती से शहर में हाहाकार, ‘माननीय’- जिम्मेदार खा रहे एसी की बयार
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बिजली कटौती से शहर में हाहाकार, ‘माननीय’- जिम्मेदार खा रहे एसी की बयार
झांसी। गर्मी और झुंझला देने वाली उमस के बीच महानगर के बाशिंदे पिछले चार दिनों से बिजली विभाग का अत्याचार झेलने को मजबूर हैं। अंधाधुंध कटौती के रूप में यह सरकारी सितम ट्रांसफार्मर बदलने के नाम पर किया जा रहा है। समाचार पत्रों में कटौती का रोस्टर जारी कर विभाग ने अपनी फाइलों में जिम्मेदारी निभा ली। हालात ये हैं कि मुन्नालाल सब स्टेशन से जुड़े क्षेत्रों में तो पिछले 24 घंटे के दरम्यान 40 से अधिक बार बिजली गुल हुई। इससे शहर में हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। लोग पसीना-पसीना, मरीज बेहाल और बच्चे बिलबिला रहे हैं। नींद को तरस रहे बाशिंदे कोस रहे हैं ऐसी व्यवस्था को जो ट्रांसफार्मर बदलने के लिए मौसम का ध्यान तक नहीं रख रही। पूछ रहे हैं, क्या यही ट्रांसफार्मर नवंबर, दिसंबर में नहीं बदला जा सकता था...। उधर, कमिश्नर-जिलाधिकारी समेत शीर्ष प्रशासनिक अमला वातानुकूलित कमरों में सुकून भरी नींद ले रहा है। आम आदमी की पैरोकारी करने वाले जनप्रतिनिधि भी एयरकंडीशंड जीवनशैली में ‘चैन की बंसी’ बजा रहे हैं।
हंसारी ट्रांसमिशन सबस्टेशन पर 40 एमवीए की जगह 63 एमवीए उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाने का काम चल रहा है। 20 जुलाई से शुरु हुआ काम 25 तक पूरा होगा। बाकी बचे दो 40 व 63 एमवीए के ट्रांसफार्मरों के जरिये शहर को विद्युतापूर्ति की जा रही है। यह दो ट्रांसफार्मर उक्त सबस्टेशनों को एक साथ भार नहीं उठा सकते हैं, इस कारण विभाग ने कटौती का रोस्टर बना रखा है लेकिन, ये कागजों में दर्ज इबारत भर बनकर रह गया है। हकीकत में स्थिति ये है कि न तो बिजली के आने का समय है और न जाने का।
इनवर्टर भी साथ छोड़ गए हैं। लोग करवटें बदल-बदल कर रातें गुजार रहे हैं। दिन में भी लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं। दफ्तरों में कर्मचारी पसीने से तरबतर नजर आते हैं तो स्कूलों में बच्चे। रात में नींद पूरी नहीं हो रही है। ब्लड प्रेशर, दिल के मरीजों को ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं।
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लोगों को सबसे ज्यादा शिकायत बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर बदलने के लिए चुने गए वक्त को लेकर है। उनका कहना है कि गर्मी चरम पर है, ऐसे समय में निर्बाध बिजली की आपूर्ति की जानी चाहिए थी, लेकिन हो उलट रहा है। बगैर किसी सूचना के बेतहाशा रूप से बिजली काटी जा रही है।
2016 जैसे बन गए हैं हालात, चीफ इंजीनियर हो गए थे पसीना- पसीना
बिजली के हालात ठीक वैसे ही बन गए हैं, जैसे कि मई 2016 की गर्मियों में थे। बिजली कटौती के कारण लोगों को पल- पल काटना मुश्किल हो गया था। उस वक्त 23 मई को कांग्रेसियों ने मुख्य अभियंता वितरण पीके जैन का घेराव कर उनके कक्ष में एसी, पंखे बंद कर दिए थे, जिससे वह पसीना- पसीना हो गए थे। कांग्रेसियों ने नारे लगाए थे कि रात में बच्चा रोता है, चीफ इंजीनियर सोता है। उस वक्त राजनीतिक दलों ने खूब हो हल्ला इसलिए किया था, क्योंकि अगले साल चुनाव होने थे। अब न तो सत्तापक्ष के लोग कुछ बोल रहे हैं और विपक्षी भी मौन साधे बैठे हैं।
‘बुधवार को बिजली विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया है। रोस्टिंग ऐसे समय में कराई जाएगी, जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा’
शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी
‘मैं लखनऊ में हूं। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री से बात करूंगा। कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा’
रवि शर्मा, सदर विधायक
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झांसी। गर्मी और झुंझला देने वाली उमस के बीच महानगर के बाशिंदे पिछले चार दिनों से बिजली विभाग का अत्याचार झेलने को मजबूर हैं। अंधाधुंध कटौती के रूप में यह सरकारी सितम ट्रांसफार्मर बदलने के नाम पर किया जा रहा है। समाचार पत्रों में कटौती का रोस्टर जारी कर विभाग ने अपनी फाइलों में जिम्मेदारी निभा ली। हालात ये हैं कि मुन्नालाल सब स्टेशन से जुड़े क्षेत्रों में तो पिछले 24 घंटे के दरम्यान 40 से अधिक बार बिजली गुल हुई। इससे शहर में हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। लोग पसीना-पसीना, मरीज बेहाल और बच्चे बिलबिला रहे हैं। नींद को तरस रहे बाशिंदे कोस रहे हैं ऐसी व्यवस्था को जो ट्रांसफार्मर बदलने के लिए मौसम का ध्यान तक नहीं रख रही। पूछ रहे हैं, क्या यही ट्रांसफार्मर नवंबर, दिसंबर में नहीं बदला जा सकता था...। उधर, कमिश्नर-जिलाधिकारी समेत शीर्ष प्रशासनिक अमला वातानुकूलित कमरों में सुकून भरी नींद ले रहा है। आम आदमी की पैरोकारी करने वाले जनप्रतिनिधि भी एयरकंडीशंड जीवनशैली में ‘चैन की बंसी’ बजा रहे हैं।
हंसारी ट्रांसमिशन सबस्टेशन पर 40 एमवीए की जगह 63 एमवीए उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाने का काम चल रहा है। 20 जुलाई से शुरु हुआ काम 25 तक पूरा होगा। बाकी बचे दो 40 व 63 एमवीए के ट्रांसफार्मरों के जरिये शहर को विद्युतापूर्ति की जा रही है। यह दो ट्रांसफार्मर उक्त सबस्टेशनों को एक साथ भार नहीं उठा सकते हैं, इस कारण विभाग ने कटौती का रोस्टर बना रखा है लेकिन, ये कागजों में दर्ज इबारत भर बनकर रह गया है। हकीकत में स्थिति ये है कि न तो बिजली के आने का समय है और न जाने का।
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इनवर्टर भी साथ छोड़ गए हैं। लोग करवटें बदल-बदल कर रातें गुजार रहे हैं। दिन में भी लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं। दफ्तरों में कर्मचारी पसीने से तरबतर नजर आते हैं तो स्कूलों में बच्चे। रात में नींद पूरी नहीं हो रही है। ब्लड प्रेशर, दिल के मरीजों को ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं।
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लोगों को सबसे ज्यादा शिकायत बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर बदलने के लिए चुने गए वक्त को लेकर है। उनका कहना है कि गर्मी चरम पर है, ऐसे समय में निर्बाध बिजली की आपूर्ति की जानी चाहिए थी, लेकिन हो उलट रहा है। बगैर किसी सूचना के बेतहाशा रूप से बिजली काटी जा रही है।
2016 जैसे बन गए हैं हालात, चीफ इंजीनियर हो गए थे पसीना- पसीना
बिजली के हालात ठीक वैसे ही बन गए हैं, जैसे कि मई 2016 की गर्मियों में थे। बिजली कटौती के कारण लोगों को पल- पल काटना मुश्किल हो गया था। उस वक्त 23 मई को कांग्रेसियों ने मुख्य अभियंता वितरण पीके जैन का घेराव कर उनके कक्ष में एसी, पंखे बंद कर दिए थे, जिससे वह पसीना- पसीना हो गए थे। कांग्रेसियों ने नारे लगाए थे कि रात में बच्चा रोता है, चीफ इंजीनियर सोता है। उस वक्त राजनीतिक दलों ने खूब हो हल्ला इसलिए किया था, क्योंकि अगले साल चुनाव होने थे। अब न तो सत्तापक्ष के लोग कुछ बोल रहे हैं और विपक्षी भी मौन साधे बैठे हैं।
‘बुधवार को बिजली विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया है। रोस्टिंग ऐसे समय में कराई जाएगी, जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा’
शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी
‘मैं लखनऊ में हूं। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री से बात करूंगा। कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा’
रवि शर्मा, सदर विधायक