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डाक विभाग : पंद्रह साल में भी परवान नहीं चढ़ सकी फ्रेंचाइजी योजना
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झांसी। आम लोगों की सहूलियत के लिए लगभग 15 साल पहले डाक विभाग द्वारा शुरू की गई फ्रेंचाइजी योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। योजना के तहत कोई भी व्यक्ति डाकघर की फ्रेंचाइजी लेकर डाक विभाग के काम कर सकता था। मगर 15 साल में मंडल भर में कुल चार लोगों ने ही फ्रेंचाइजी को लिया। आमदनी नहीं होने के कारण तीन निष्क्रिय हो गए हैं। जबकि सिर्फ एक ही सक्रिय है।
योजना के तहत कोई भी व्यक्ति डाक विभाग में पांच हजार रुपये जमा कर फ्रें चाइजी ले सकता है। इसके एवज में विभाग द्वारा कमीशन दिया जाता है। जिसके तहत पंजीकृत पत्रों की बुकिंग करने पर तीन रुपये, स्पीड पोस्ट की बुकिंग पर पांच, मनीआर्डर बुकिंग, डाक टिकटों और स्टेशनरी की बिक्री पर बीस फीसदी कमीशन दिया जाता है। जबकि रिटेल सर्विस मय राजस्व टिकटों व पोस्टल ऑर्डर स्टांप सहित की बिक्री पर चालीस प्रतिशत का कमीशन देने का प्रावधान है। योजना की शुरुआत होते ही झांसी, ललितपुर, उरई व रामपुरा में फ्रेंचाइजी दी गई थी। वर्तमान में उरई की छोड़ कर बाकी सभी निष्क्रिय हो गई हैं।
इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत मंडल में चार लोगों को फ्रेंचाइजी दी गई थी। वर्तमान में तीन निष्क्रिय हो गई हैं।
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योजना के तहत कोई भी व्यक्ति डाक विभाग में पांच हजार रुपये जमा कर फ्रें चाइजी ले सकता है। इसके एवज में विभाग द्वारा कमीशन दिया जाता है। जिसके तहत पंजीकृत पत्रों की बुकिंग करने पर तीन रुपये, स्पीड पोस्ट की बुकिंग पर पांच, मनीआर्डर बुकिंग, डाक टिकटों और स्टेशनरी की बिक्री पर बीस फीसदी कमीशन दिया जाता है। जबकि रिटेल सर्विस मय राजस्व टिकटों व पोस्टल ऑर्डर स्टांप सहित की बिक्री पर चालीस प्रतिशत का कमीशन देने का प्रावधान है। योजना की शुरुआत होते ही झांसी, ललितपुर, उरई व रामपुरा में फ्रेंचाइजी दी गई थी। वर्तमान में उरई की छोड़ कर बाकी सभी निष्क्रिय हो गई हैं।
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इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत मंडल में चार लोगों को फ्रेंचाइजी दी गई थी। वर्तमान में तीन निष्क्रिय हो गई हैं।