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Jhansi News: रानी के झांसी में तेजी से सिमट रही महाराष्ट्र समाज की आबादी
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी में लगभग सवा सौ सालों तक मराठा शासन रहा। इसके चलते यहां की आबादी में महाराष्ट्र समाज की खासी हिस्सेदारी थी। अब से 25-30 साल पहले तक यहां आठ सौ से अधिक महाराष्ट्रीयन परिवार निवास करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर दो सौ पर सिमट गई है। यह बात महाराष्ट्रीय गणेश मंदिर कमेटी की ओर से किए गए एक अध्ययन में भी निकलकर सामने आई है। घटती संख्या की प्रमुख वजह नौकरियों के अभाव को माना जा रहा है।
झांसी की पहली पहचान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई हैं, जो महाराष्ट्रीयन समाज से आती थीं। झांसी में मराठा शासन 1729 से रानी के वीरगति के प्राप्त होने तक 1858 तक रहा। मराठा शासनकाल में महाराष्ट्र समाज के लोग उच्च पदों पर विराजमान थे। देश की आजादी के आंदोलन में यहां महाराष्ट्र समाज अग्रणी भूमिका में रहा, जबकि स्वतंत्रता के बाद भी महाराष्ट्र समाज का यहां अच्छा प्रभाव रहा। झांसी के पहले सांसद आचार्य रघुनाथ विनायक धुलेकर बने थे। इसके बाद वे विधान परिषद के सभापति भी रहे थे।
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उनकी गिनती यहां के लोकप्रिय नेताओं में होती थी। इसके अलावा, महाराष्ट्र समाज के आत्माराम गोविंद खैर यहां से विधायक चुने गए थे और विधानसभा अध्यक्ष भी बने थे, लेकिन बाद के दिनों में महाराष्ट्र समाज ने सियासत से दूरी बना ली। सरकारी नौकरी महाराष्ट्र समाज के लोगों की आय का प्रमुख जरिया बन गया। खासतौर पर महाराष्ट्रीय समाज के ज्यादातर लोग रेलवे में कार्यरत रहे।
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महाराष्ट्रीय गणेश मंदिर कमेटी की ओर से किए गए अध्ययन में सामने आया कि 25-30 साल पहले महाराष्ट्र समाज के ज्यादातर परिवार पुराने शहर में रहते थे। इसके अलावा, सीपरी बाजार में भी महाराष्ट्रीय परिवारों की खासी संख्या थी, लेकिन समाज के उच्च शिक्षित बच्चों को यहां नौकरियां नहीं मिल पाईं। ऐसे में उन्होंने मुंबई, नागपुर, पुणे समेत देश के अन्य महानगरों की ओर रुख कर लिया। बाद के दिनों में उनके परिवार के बुजुर्ग भी अपने बच्चों के पास चले गए, जिससे झांसी में महाराष्ट्र समाज के लोगों की संख्या घट गई। अब लगभग दो सौ परिवार ही यहां बचे हैं। इनके ज्यादातर बुजुर्ग ही यहां रह रहे हैं।
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व्यापार और कृषि से नहीं रहा नाता
महाराष्ट्र समाज के लोग जीवन-यापन के लिए सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहे। व्यापार से उनका कोई सरोकार नहीं रहा। इसके अलावा, कृषि से भी उनकी दूरी रही। कृषि और व्यापार से जुड़े महाराष्ट्र समाज के लोगों की संख्या इक्का-दुक्का ही है। ऐसे में नौकरियों की कमी होने पर उन्हें मजबूरी में झांसी छोड़ना पड़ा।
झांसी में महाराष्ट्र समाज के लोगों की संख्या कम होने की प्रमुख वजह यहां रोजगार का अभाव रहा है। समाज के शिक्षित युवा रोजगार के लिए देश के महानगरों की ओर चले गए। एक बार जो गया, फिर वह लौटकर नहीं आया। अब तो गाहे-बगाहे पर्यटकों की तरह आते हैं और चंद दिन रुकने के बाद चले जाते हैं। - गजानन खानवलकर, सचिव- महाराष्ट्रीय गणेश मंदिर कमेटी
महाराष्ट्र समाज के लोगों ने कभी व्यापार नहीं किया। कृषि से भी खास जुड़ाव नहीं रहा। समाज के लोग नौकरियों पर ही आश्रित रहे। विरासत में वे अपने बच्चों को शिक्षा तो दे पाए, परंतु रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाए। ऐसे में शिक्षा हासिल करने के बाद बच्चों ने बाहर की ओर रुख कर लिया। कई मकान खाली पड़े हुए हैं या उनमें बुजुर्ग ही रह रहे हैं। कई मकान बिक भी चुके हैं। - - निरंजन धुलेकर, वरिष्ठ सदस्य-महाराष्ट्र समाज