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पुलिस घर पहुंचकर करेगी पासपोर्ट की जांच
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पासपोर्ट के लिए आवेदकों की घर में ही पुलिस करेगी जांच
झांसी। अब पुलिस घर पहुंचकर पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों की जांच करेगी। इसके लिए जिले के 40 उपनिरीक्षकों को टैबलेट देने की तैयारी है। जुलाई के पहले सप्ताह में टैबलेट मिलने केे बाद घर पहुंचकर जांच कर रिपोर्ट पेश की जाएगी। एलआईयू विभाग के लोग सिर्फ आवेदन के अभिलेखों का सत्यापन करेंगे।
पासपोर्ट के लिए आनलाइन आवेदन होने के बाद पुलिस संबंधित को थाने बुलाकर जांच करती थी, रिश्वत लेकर कुछ लोग गलत रिपोर्ट लगा देते थे। इससे विभाग सहित अन्य की किरकिरी होती थी। इसको देखते हुए शासन ने जिले के 40 उपनिरीक्षकों को टैबलेट देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके जरिये उपनिरीक्षक स्वयं मौके पर जाकर आवेदन की जांच करेंगे। बगैर टैबलेट से आवेदक के घर का फोटो खींचकर लोड किए फार्म स्वीकार ही नहीं होगा। ऐसे में पासपोर्ट की जांच करने वाले उपनिरीक्षकों को हर हाल में आवेदक के घर जाना ही पड़ेगा।
अभी तक पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोगों की जांच ऑफलाइन होती थी, लेकिन अब शासन के आदेश पर ऑफलाइन की व्यवस्था खत्म कर ऑनलाइन कर दिया गया है। शासन की तरफ से एम - पासपोर्ट सेवा की शुरुआत की गई है, इसके जरिये घर बैठे ही आवेदन किया जा सकेगा।
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छवि भी होगी उजागर
उपनिरीक्षक की जांच में सच भी उजागर हो जाएगा कि आवेदन किस छवि वाला व्यक्ति है। घर पहुंचकर उपनिरीक्षक पड़ोसियों से छवि की भी जानकारी लेगा। पड़ताल के दौरान गड़बड़ी नजर आने पर पासपोर्ट बनने में भी परेशानी आएगी। जिले में प्रत्येक प्रति माह एक से डेढ़ माह आवेदन करते हैं। पासपोर्ट के लिए आवेदन के सात दिन के भीतर दरोगा को रिपोर्ट लगाकर मुख्यालय भेज देनी है। यहां से जांचकर पासपोर्ट सेल लखनऊ के लिए फार्म भेज दिया जाएगा।
पासपोर्ट की जांच प्रक्रिया ऑनलाइन करने से आवेदक को घर बैठे ही पूरी जानकारी हासिल हो जाएगी कि उसकी पासपोर्ट की पत्रावली पर पुलिस ने क्या रिपोर्ट लगाई है। उसकी पत्रावली कहां तक पहुंची है। आवेदक को भाग दौड़ अब नहीं करना होगा। सारा विवरण अब ऑनलाइन कर दिया गया है, इसके तहत टैबलेट दिए जाने की तैयारी है। राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक
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झांसी। अब पुलिस घर पहुंचकर पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों की जांच करेगी। इसके लिए जिले के 40 उपनिरीक्षकों को टैबलेट देने की तैयारी है। जुलाई के पहले सप्ताह में टैबलेट मिलने केे बाद घर पहुंचकर जांच कर रिपोर्ट पेश की जाएगी। एलआईयू विभाग के लोग सिर्फ आवेदन के अभिलेखों का सत्यापन करेंगे।
पासपोर्ट के लिए आनलाइन आवेदन होने के बाद पुलिस संबंधित को थाने बुलाकर जांच करती थी, रिश्वत लेकर कुछ लोग गलत रिपोर्ट लगा देते थे। इससे विभाग सहित अन्य की किरकिरी होती थी। इसको देखते हुए शासन ने जिले के 40 उपनिरीक्षकों को टैबलेट देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके जरिये उपनिरीक्षक स्वयं मौके पर जाकर आवेदन की जांच करेंगे। बगैर टैबलेट से आवेदक के घर का फोटो खींचकर लोड किए फार्म स्वीकार ही नहीं होगा। ऐसे में पासपोर्ट की जांच करने वाले उपनिरीक्षकों को हर हाल में आवेदक के घर जाना ही पड़ेगा।
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अभी तक पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोगों की जांच ऑफलाइन होती थी, लेकिन अब शासन के आदेश पर ऑफलाइन की व्यवस्था खत्म कर ऑनलाइन कर दिया गया है। शासन की तरफ से एम - पासपोर्ट सेवा की शुरुआत की गई है, इसके जरिये घर बैठे ही आवेदन किया जा सकेगा।
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छवि भी होगी उजागर
उपनिरीक्षक की जांच में सच भी उजागर हो जाएगा कि आवेदन किस छवि वाला व्यक्ति है। घर पहुंचकर उपनिरीक्षक पड़ोसियों से छवि की भी जानकारी लेगा। पड़ताल के दौरान गड़बड़ी नजर आने पर पासपोर्ट बनने में भी परेशानी आएगी। जिले में प्रत्येक प्रति माह एक से डेढ़ माह आवेदन करते हैं। पासपोर्ट के लिए आवेदन के सात दिन के भीतर दरोगा को रिपोर्ट लगाकर मुख्यालय भेज देनी है। यहां से जांचकर पासपोर्ट सेल लखनऊ के लिए फार्म भेज दिया जाएगा।
पासपोर्ट की जांच प्रक्रिया ऑनलाइन करने से आवेदक को घर बैठे ही पूरी जानकारी हासिल हो जाएगी कि उसकी पासपोर्ट की पत्रावली पर पुलिस ने क्या रिपोर्ट लगाई है। उसकी पत्रावली कहां तक पहुंची है। आवेदक को भाग दौड़ अब नहीं करना होगा। सारा विवरण अब ऑनलाइन कर दिया गया है, इसके तहत टैबलेट दिए जाने की तैयारी है। राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक