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Jhansi News: साइबर ठगों का सिंडीकेट तोड़ने में फेल साबित हुई पुलिस
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। साइबर ठग रोजाना लोगों को निशाना बनाकर उनकी गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। वहीं, पुलिस इनके सिंडीकेट को तोड़ने में असफल साबित हो रही है। साइबर थाने में जितने भी मुकदमे दर्ज होते हैं, उनमें से अधिकांश मामलों के खुलासा पुलिस नहीं कर पाती। किसी भी मामले में पुलिस अब तक साइबर जालसाजों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
पिछले कुछ सालों से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इससे निपटने के लिए जनपद में साइबर थाना खोलने समेत थानावार साइबर सेल स्थापित हुआ। पुलिस के तकनीकी न समझने का फायदा उठाकर साइबर अपराधी रोजाना ही ठगी कर रहे हैं। अब साइबर ठग बिना लिंक और ओटीपी के भी लोगों के खाते से रकम उड़ा देते हैं लेकिन पुलिस जिस खाते में पैसा गया, उसे तक तलाश नहीं पाती। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि साइबर पुलिस को भी आधुनिक किया जा रहा है। कई मामलों का पुलिस ने खुलासा किया है।
इनसेट
तीन माह बाद भी शातिर जालसाजों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
अमर उजाला के प्रसार ऑफिसर रविंद्र श्रीवास्तव के खाते से साइबर बदमाशों ने मई में धोखाधड़ी करके पांच लाख रुपये पार कर दिए थे। पुलिस ने काफी हाथ पांव पटके लेकिन शातिर अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। हैरानी की बात यह है कि भुक्तभोगी ने ही तलाशकर पुलिसकर्मियों को उन सभी बैंक खातों का पूरा विवरण उपलब्ध करा दिया, जिनमें जालसाजों ने पैसा जमा कराया था। फिर भी पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी। तीन माह बाद भी रविंद्र को पुलिस अफसर सिर्फ भरोसा ही दिला रहे हैं।
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एक साल से साइबर थाने का चक्कर काट रहे बुजुर्ग
बड़ागांव गेट बाहर निवासी सोनेलाल के खाते से एक साल पहले 3 लाख रुपये जालसाज निकाल ले गए। सोनेलाल ने साइबर पुलिस को इसकी सूचना दी। साइबर पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी लेकिन आज तक जालसाजों के बारे में पुलिस पता नहीं लगा सकी। सोनेलाल का कहना है कि बुढ़ापे के लिए उनके पास यही रकम बची हुई थी।
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झांसी। साइबर ठग रोजाना लोगों को निशाना बनाकर उनकी गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। वहीं, पुलिस इनके सिंडीकेट को तोड़ने में असफल साबित हो रही है। साइबर थाने में जितने भी मुकदमे दर्ज होते हैं, उनमें से अधिकांश मामलों के खुलासा पुलिस नहीं कर पाती। किसी भी मामले में पुलिस अब तक साइबर जालसाजों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
पिछले कुछ सालों से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इससे निपटने के लिए जनपद में साइबर थाना खोलने समेत थानावार साइबर सेल स्थापित हुआ। पुलिस के तकनीकी न समझने का फायदा उठाकर साइबर अपराधी रोजाना ही ठगी कर रहे हैं। अब साइबर ठग बिना लिंक और ओटीपी के भी लोगों के खाते से रकम उड़ा देते हैं लेकिन पुलिस जिस खाते में पैसा गया, उसे तक तलाश नहीं पाती। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि साइबर पुलिस को भी आधुनिक किया जा रहा है। कई मामलों का पुलिस ने खुलासा किया है।
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तीन माह बाद भी शातिर जालसाजों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
अमर उजाला के प्रसार ऑफिसर रविंद्र श्रीवास्तव के खाते से साइबर बदमाशों ने मई में धोखाधड़ी करके पांच लाख रुपये पार कर दिए थे। पुलिस ने काफी हाथ पांव पटके लेकिन शातिर अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। हैरानी की बात यह है कि भुक्तभोगी ने ही तलाशकर पुलिसकर्मियों को उन सभी बैंक खातों का पूरा विवरण उपलब्ध करा दिया, जिनमें जालसाजों ने पैसा जमा कराया था। फिर भी पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी। तीन माह बाद भी रविंद्र को पुलिस अफसर सिर्फ भरोसा ही दिला रहे हैं।
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एक साल से साइबर थाने का चक्कर काट रहे बुजुर्ग
बड़ागांव गेट बाहर निवासी सोनेलाल के खाते से एक साल पहले 3 लाख रुपये जालसाज निकाल ले गए। सोनेलाल ने साइबर पुलिस को इसकी सूचना दी। साइबर पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी लेकिन आज तक जालसाजों के बारे में पुलिस पता नहीं लगा सकी। सोनेलाल का कहना है कि बुढ़ापे के लिए उनके पास यही रकम बची हुई थी।