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टेंशन में पुलिसकर्मी, रोगों ने घेरा
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police man dipressed
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झांसी। परिजनों से दूर चौबीस घंटे, सप्ताह के सातों दिन ड्यूटी पर रहने वाले पुलिसकर्मी तनाव से जूझ रहे हैं। किसी को अपने बीमार बुजुर्ग माता-पिता की चिंता है, कोई अपनी पत्नी बच्चों को लेकर चिंतित है। इस कारण बड़ी तादाद में पुलिस कर्मी मधुमेह, ब्लडप्रेशर, अवसाद, अनिद्रा आदि रोगों का शिकार हो रहे हैं। जरूरत पर छुट्टियां तो दूर इन्हें साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिल रहा। इन हालात से जूझते हुए जिले में तैनात 200 पुलिस वालों ने गृह जनपद के पास स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है।
काम के दबाव की वजह से ज्यादातर पुलिसकर्मी डिप्रेशन, शुगर व दिल की बीमारी का शिकार हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता भी कम हुई है। मर्ज और तनाव उन्हेें लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उनका पेशेवर और पारिवारिक जीवन दोनों अव्यवस्थित हुए हैं। पुलिस वालों की नियमित जांच करने वाले डॉक्टरों ने माना कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर उनके शरीर को खोखला कर रहे हैं।
उपनिरीक्षक संजीव भी हाई ब्लड प्रेशर के बाद हार्ट अटैक व ब्रेन हेमरेज का शिकार हुए। जिले में तैनात पुलिसकर्मियों का समय- समय पर चिकित्सीय परीक्षण होता रहता है। पिछले दिनों कराए गए परीक्षण में हाई ब्लड प्रेशर की बात सामने आई थी। कई पुलिसकर्मी तो ऐसे भी हैं, जिनको अपनी बीमारी का ही पता नहीं है। उपनिरीक्षक संजीव भी घर के करीब तैनाती चाहते थे। उन्होंने एक साल पहले से ही आवेदन कर रखा था, लेकिन जीते जी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उनकी मौत की खबर सुनकर साथी पुलिसकर्मियों को भी सदमा लगा है।
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केस-1
शहर में तैनात एक दरोगा की मां की किडनी खराब हैं। बुजुर्ग अवस्था में उन्हें समय-समय पर डायलिसिस और नियमित चेकअप की जरूरत पड़ती है। घर से दूर होने के कारण वे चाहते हुए भी मां की उचित देखभाल नहीं कर पाते। उन्होंने गृह जनपद के पास तबादले की मांग की है।
केस-2
जिले में तैनात एक हेडकांस्टेबल की पत्नी को अस्थमा की शिकायत है। उनके बच्चे महानगर में पढ़ रहे हैं। पत्नी घर पर अकेले ही रहती हैं। उन्हें कभी भी सांस का दौरा पड़ जाता है। पुलिसकर्मी ने कई महीने पहले घर के पास तबादला मांगा है ताकि वे पत्नी का इलाज और ड्यूटी दोनों संभाल सकें।
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काम के दबाव की वजह से ज्यादातर पुलिसकर्मी डिप्रेशन, शुगर व दिल की बीमारी का शिकार हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता भी कम हुई है। मर्ज और तनाव उन्हेें लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उनका पेशेवर और पारिवारिक जीवन दोनों अव्यवस्थित हुए हैं। पुलिस वालों की नियमित जांच करने वाले डॉक्टरों ने माना कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर उनके शरीर को खोखला कर रहे हैं।
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उपनिरीक्षक संजीव भी हाई ब्लड प्रेशर के बाद हार्ट अटैक व ब्रेन हेमरेज का शिकार हुए। जिले में तैनात पुलिसकर्मियों का समय- समय पर चिकित्सीय परीक्षण होता रहता है। पिछले दिनों कराए गए परीक्षण में हाई ब्लड प्रेशर की बात सामने आई थी। कई पुलिसकर्मी तो ऐसे भी हैं, जिनको अपनी बीमारी का ही पता नहीं है। उपनिरीक्षक संजीव भी घर के करीब तैनाती चाहते थे। उन्होंने एक साल पहले से ही आवेदन कर रखा था, लेकिन जीते जी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उनकी मौत की खबर सुनकर साथी पुलिसकर्मियों को भी सदमा लगा है।
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केस-1
शहर में तैनात एक दरोगा की मां की किडनी खराब हैं। बुजुर्ग अवस्था में उन्हें समय-समय पर डायलिसिस और नियमित चेकअप की जरूरत पड़ती है। घर से दूर होने के कारण वे चाहते हुए भी मां की उचित देखभाल नहीं कर पाते। उन्होंने गृह जनपद के पास तबादले की मांग की है।
केस-2
जिले में तैनात एक हेडकांस्टेबल की पत्नी को अस्थमा की शिकायत है। उनके बच्चे महानगर में पढ़ रहे हैं। पत्नी घर पर अकेले ही रहती हैं। उन्हें कभी भी सांस का दौरा पड़ जाता है। पुलिसकर्मी ने कई महीने पहले घर के पास तबादला मांगा है ताकि वे पत्नी का इलाज और ड्यूटी दोनों संभाल सकें।