{"_id":"5f6e4d138ebc3e9b833773f8","slug":"police-hospital-jhansi-news-jhs177150653","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेफर सेंटर बना झांसी का पुलिस अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेफर सेंटर बना झांसी का पुलिस अस्पताल
विज्ञापन
पुलिस अस्पताल।
- फोटो : REPORTERS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। जिले में पुलिस कर्मियों के इलाज के लिए बना पुलिस अस्पताल वर्तमान में रेफर सेंटर बना हुआ है। यहां केवल दवाएं देकर ही मरीज को चलता कर दिया जाता है। यहां की बदहाल इमारत को देखकर पुलिसकर्मी आकर इलाज कराना भी मुनासिब नहीं समझते। यहां की टूटी खिड़कियां व छत से गिरता सीमेंट हर समय कर्मचारियोें के लिए मुसीबत बनता है। स्टाफ की कमी से अस्पताल जूझ रहा है।
अस्पताल के ओपीडी में औसतन हर रोज 40 मरीज आते हैं। लेकिन यहां न बेड है, न ही बेहतर बिल्डिंग और न साफ सफाई की व्यवस्था। अस्पताल के इर्दगिर्द गंदगी पसरी दिखाई देती है। यहां की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हैं। सीलन और बदबू के कारण अस्पताल परिसर में अधिक समय तक बैठना भी मुश्किल होता है। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को भर्ती करने की सुविधा नहीं है। जिस कारण हर समय इलाज कराने आने वाले मरीजों को केवल दवा देकर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में कम से कम दस लोगों के स्टाफ की कमी है। लेकिन यहां एक इंचार्ज डॉ. शाहिदा परवीन, डॉ. सूर्यकांत गुप्ता, फार्मासिस्ट रामप्रकाश बंसल व चतुर्थ कर्मचारी विनोद कुमार की देखरेख में चल रहा है। एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही यहाँ की समस्याएं दूर कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। अन्य जानकारियां भी जुटाई जा रहीं हैं।
लंबे समय से है बदहाली का शिकार
पुलिस अस्पताल का संचालन जिले का स्वास्थ्य महकमा करता है। इसमें पुलिस महकमे से सहयोग लिया जाता है। सीएमओ से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों को कई बार बदहाली के बारे में बताया जा चुका है। इसके इसके बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि वार्ड तो हैं लेकिन बेड, स्टाफ, वेंटिलेटर और स्टाफ जैसी सुविधाओं की कमी है जिसके कारण यहां मरीजों को भर्ती किया जाना संभव नहीं है। अस्पताल के संचालन के लिए चौबीस घंटे स्टाफ की जरूरत होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अस्पताल के ओपीडी में औसतन हर रोज 40 मरीज आते हैं। लेकिन यहां न बेड है, न ही बेहतर बिल्डिंग और न साफ सफाई की व्यवस्था। अस्पताल के इर्दगिर्द गंदगी पसरी दिखाई देती है। यहां की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हैं। सीलन और बदबू के कारण अस्पताल परिसर में अधिक समय तक बैठना भी मुश्किल होता है। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को भर्ती करने की सुविधा नहीं है। जिस कारण हर समय इलाज कराने आने वाले मरीजों को केवल दवा देकर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में कम से कम दस लोगों के स्टाफ की कमी है। लेकिन यहां एक इंचार्ज डॉ. शाहिदा परवीन, डॉ. सूर्यकांत गुप्ता, फार्मासिस्ट रामप्रकाश बंसल व चतुर्थ कर्मचारी विनोद कुमार की देखरेख में चल रहा है। एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही यहाँ की समस्याएं दूर कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। अन्य जानकारियां भी जुटाई जा रहीं हैं।
विज्ञापन
लंबे समय से है बदहाली का शिकार
पुलिस अस्पताल का संचालन जिले का स्वास्थ्य महकमा करता है। इसमें पुलिस महकमे से सहयोग लिया जाता है। सीएमओ से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों को कई बार बदहाली के बारे में बताया जा चुका है। इसके इसके बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि वार्ड तो हैं लेकिन बेड, स्टाफ, वेंटिलेटर और स्टाफ जैसी सुविधाओं की कमी है जिसके कारण यहां मरीजों को भर्ती किया जाना संभव नहीं है। अस्पताल के संचालन के लिए चौबीस घंटे स्टाफ की जरूरत होती है।
विज्ञापन