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पुलिस कप्तान को भारी पड़ गई विधायकों की नाराजगी
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झांसी। दो महीने पहले झांसी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पदभार संभालने के बाद से ही आईपीएस रोहन पी कनय विवादों से घिर गए थे। उनके एक अधीनस्थ ने कार्यशैली पर असंतोष जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर दी थी। ये मामला ठंडा नहीं पड़ पाया था कि वे विधायकों के निशाने पर आ गए। एक के बाद एक शिकायतें लखनऊ पहुंच रहीं थीं, जिसे संज्ञान में लेते हुए शासन ने उनके स्थानांतरण पर मुहर लगा दी।
आईपीएस रोहन पी कनय ने 27 मार्च को झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद का कार्यभार संभाला था। इसके कुछ दिन बाद ही उनके अधीनस्थ सीओ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल की थी, जिसमें गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों के बाद भी छुट्टी न दिए जाने का आरोप लगाया था। ये मामला शासन तक पहुुंच गया था। इसके बाद पंचायत चुनाव के मतदान के दौरान दतावली गांव में विवाद हो गया था। इस मामले में पुलिस ने गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत के बस्ते से कुछ लोगों को उठाया था। विधायक का आरोप था कि पुलिस ने निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है। उन्हें छुड़ाने के लिए विधायक को आधी रात को थाने में धरने पर बैठना पड़ गया था। इसके बाद बैकफुट पर आई पुलिस को कइयों को छोड़ना पड़ गया था। यह मामला भी शासन तक पहुंच गया था। जबकि, हाल ही में खंडेराव गेट चौकी इंचार्ज के खिलाफ पार्षद और व्यापारियों ने थाना कोतवाली में धरना दिया था। धरना दे रहे लोगों के बीच नगर विधायक रवि शर्मा भी पहुंच गए थे। विधायक ने चौकी इंचार्ज की शिकायत एसएसपी ने की थी। बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानकारों का कहना है कि इसके बाद नगर विधायक ने भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष को पूरा मामला बताया। क्षेत्रीय अध्यक्ष की पहल के बाद भी कार्यवाही शून्य रही। इसके बाद ये मामला आगे बढ़कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंच गया था। गंभीरता को देखते उन्होंने भी एसएसपी से मामले में कार्यवाही करने को कहा था, लेकिन हालात नहीं बदले। इससे भाजपा के विधायकों की खूब किरकिरी हो रही थी। बीते रोज बुधवार को लखनऊ में नगर विधायक व गरौठा विधायक ने खुलकर एसएसपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद शासन ने उन्हें स्थानांतरित कर पुलिस अधीक्षक लॉजिस्टिक मुख्यालय पुलिस महानिदेशक के पद पर भेज दिया। जबकि, उनके स्थान पर प्रतीक्षारत शिवहरि मीणा को झांसी का एसएसपी बनाया गया है।
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आईपीएस रोहन पी कनय ने 27 मार्च को झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद का कार्यभार संभाला था। इसके कुछ दिन बाद ही उनके अधीनस्थ सीओ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल की थी, जिसमें गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों के बाद भी छुट्टी न दिए जाने का आरोप लगाया था। ये मामला शासन तक पहुुंच गया था। इसके बाद पंचायत चुनाव के मतदान के दौरान दतावली गांव में विवाद हो गया था। इस मामले में पुलिस ने गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत के बस्ते से कुछ लोगों को उठाया था। विधायक का आरोप था कि पुलिस ने निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है। उन्हें छुड़ाने के लिए विधायक को आधी रात को थाने में धरने पर बैठना पड़ गया था। इसके बाद बैकफुट पर आई पुलिस को कइयों को छोड़ना पड़ गया था। यह मामला भी शासन तक पहुंच गया था। जबकि, हाल ही में खंडेराव गेट चौकी इंचार्ज के खिलाफ पार्षद और व्यापारियों ने थाना कोतवाली में धरना दिया था। धरना दे रहे लोगों के बीच नगर विधायक रवि शर्मा भी पहुंच गए थे। विधायक ने चौकी इंचार्ज की शिकायत एसएसपी ने की थी। बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानकारों का कहना है कि इसके बाद नगर विधायक ने भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष को पूरा मामला बताया। क्षेत्रीय अध्यक्ष की पहल के बाद भी कार्यवाही शून्य रही। इसके बाद ये मामला आगे बढ़कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंच गया था। गंभीरता को देखते उन्होंने भी एसएसपी से मामले में कार्यवाही करने को कहा था, लेकिन हालात नहीं बदले। इससे भाजपा के विधायकों की खूब किरकिरी हो रही थी। बीते रोज बुधवार को लखनऊ में नगर विधायक व गरौठा विधायक ने खुलकर एसएसपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद शासन ने उन्हें स्थानांतरित कर पुलिस अधीक्षक लॉजिस्टिक मुख्यालय पुलिस महानिदेशक के पद पर भेज दिया। जबकि, उनके स्थान पर प्रतीक्षारत शिवहरि मीणा को झांसी का एसएसपी बनाया गया है।
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