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कूड़ा उठवाने को अब चुकाना होगा तीन गुना अधिक यूजर चार्ज
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झांसी। शहरवासियों के लिए घरों से कूड़ा कलेक्शन महंगा हो गया। नगर निगम ने पिछली बार के मुकाबले यूजर चार्ज में तीन गुने की बढ़ोत्तरी करते हुए 125 रुपये प्रतिमाह तय कर दिया। पहले इसी काम के लिए हर घर से महज चालीस रुपये ही लिए जाते थे। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम नए सिरे से 15 जुलाई से आरंभ होना है।
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों पर नगर निगम ने पिछले साल पुरानी कंपनियों का ठेका निरस्त कर दिया था। उसके बाद उसने नई दिल्ली की एयरो एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया। नई कंपनी 15 जुलाई से काम आरंभ करने जा रही है। एबीडी एरिया के 13 वार्डों से इसकी शुरूआत होगी लेकिन, नई व्यवस्था का पूरा बोझ शहरवासियों को वहन करना होगा। पहले हर घर से कूड़ा उठाने की एवज में चालीस रुपये हर महीने लिए जाते थे लेकिन, अब इसे बढ़ाकर 125 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। निगम प्रशासन ने भवनों के क्षेत्रफल के आधार पर भी कोई स्लैब नहीं बनाया जबकि शासन की नियमावली में इसके साफ निर्देश थे। भवनस्वामियों पर भार कम करने के लिए निगम प्रशासन को छोटे दुकानदार समेत भवनों की संख्या बढा़ने को कहा गया था लेकिन, इस कवायद बचने के लिए अफसरों ने भवनों की संख्या न बढ़ाकर यूजर चार्ज में ही भारी-भरकम बढ़ोत्तरी कर दी।
महानगरों के मुकाबले झांसीवालों पर दो गुना अधिक यूजर चार्ज
- नगर निगम ने नहीं बनाए कोई भी स्लैब
नगर विकास महकमे की ग्रेडिंग में झांसी तीसरी श्रेणी में शुमार है लेकिन, यहां लगाया गया यूजर चार्ज महानगरों को भी मात कर रहा है। उप्र ठोस अपशिष्ट प्रंबधन, संचालन एवं स्वच्छता नियमावली के मुताबिक यूजर चार्ज वर्गफीट के आधार पर तय किया जाना चाहिए लेकिन, निगम प्रशासन इसका भी पालन नहीं कर रहा है। नियमावली के मुताबिक छह लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 500 वर्गफीट से कम क्षेत्रफल वाले भवनों से 40 रुपये रुपये लिए जाने चाहिए। प्रयागराज, कानपुर लखनऊ जैसे महानगरों में 30-70 रुपये विभिन्न श्रेणियों के भवनों से लिए जा रहे। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के भवनों को इन महानगरों में छूट है लेकिन, यहां कोई स्लैब ही नहीं बनाया गया। सभी छोटे-बड़े घरों से एकसमान 125 रुपये तय कर दिए गए। निगम अफसरों का कहना है अभी इसी आधार पर वसूली होगी। उन्होंने आने वाले समय में इसमें बढ़ोत्तरी की संभावना भी जताई है।
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काफी सोच-विचार के बाद यह यूजर चार्ज तय हुआ है। कम भवनों की संख्या के चलते यह रकम बढ़ गई। इसे कम नहीं किया जा सकता है।
अवनीश राय, नगर आयुक्त
- पहले से ही काफी अधिक मंहगाई है। कूड़ा उठाने के लिए यह काफी अधिक है। इतना सामान्य परिवार वहन नहीं कर सकता
रीता वर्मा
यूजर चार्ज इतना अधिक लगाएंगे, तब लोग कूड़ा देंगे नहीं। वह लोग अपने से ही सड़कों पर फेंकना शुरू कर देंगे। निगम को इसमें कमी करनी चाहिए
शैलेष गौतम
इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं करनी चाहिए। अधिकतम 70 रुपये ही करना चाहिए था। इतनी बढ़ोत्तरी काफी अधिक है।
शशि शुक्ला
महंगाई से सभी पहले से परेशान हैं। यह काफी अधिक बढ़ोत्तरी है। इसे कम किया जाना चाहिए
सीमा राय
रसोई गैस, सब्जी का दाम पहले ही आसमान पर है। अब यूजर चार्ज भी बढ़ा दिया। इससे सभी को परेशानी होगी।
रश्मि साहू
पहले सिर्फ हाउसटैक्स लिया जाता था। अब कूड़ा उठाने के लिए अलग से पैसा लिया जाने लगा। यह गलत है। इसे पूरी तरह खत्म किया जाए।
आशा नगरिया
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डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों पर नगर निगम ने पिछले साल पुरानी कंपनियों का ठेका निरस्त कर दिया था। उसके बाद उसने नई दिल्ली की एयरो एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया। नई कंपनी 15 जुलाई से काम आरंभ करने जा रही है। एबीडी एरिया के 13 वार्डों से इसकी शुरूआत होगी लेकिन, नई व्यवस्था का पूरा बोझ शहरवासियों को वहन करना होगा। पहले हर घर से कूड़ा उठाने की एवज में चालीस रुपये हर महीने लिए जाते थे लेकिन, अब इसे बढ़ाकर 125 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। निगम प्रशासन ने भवनों के क्षेत्रफल के आधार पर भी कोई स्लैब नहीं बनाया जबकि शासन की नियमावली में इसके साफ निर्देश थे। भवनस्वामियों पर भार कम करने के लिए निगम प्रशासन को छोटे दुकानदार समेत भवनों की संख्या बढा़ने को कहा गया था लेकिन, इस कवायद बचने के लिए अफसरों ने भवनों की संख्या न बढ़ाकर यूजर चार्ज में ही भारी-भरकम बढ़ोत्तरी कर दी।
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महानगरों के मुकाबले झांसीवालों पर दो गुना अधिक यूजर चार्ज
- नगर निगम ने नहीं बनाए कोई भी स्लैब
नगर विकास महकमे की ग्रेडिंग में झांसी तीसरी श्रेणी में शुमार है लेकिन, यहां लगाया गया यूजर चार्ज महानगरों को भी मात कर रहा है। उप्र ठोस अपशिष्ट प्रंबधन, संचालन एवं स्वच्छता नियमावली के मुताबिक यूजर चार्ज वर्गफीट के आधार पर तय किया जाना चाहिए लेकिन, निगम प्रशासन इसका भी पालन नहीं कर रहा है। नियमावली के मुताबिक छह लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 500 वर्गफीट से कम क्षेत्रफल वाले भवनों से 40 रुपये रुपये लिए जाने चाहिए। प्रयागराज, कानपुर लखनऊ जैसे महानगरों में 30-70 रुपये विभिन्न श्रेणियों के भवनों से लिए जा रहे। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के भवनों को इन महानगरों में छूट है लेकिन, यहां कोई स्लैब ही नहीं बनाया गया। सभी छोटे-बड़े घरों से एकसमान 125 रुपये तय कर दिए गए। निगम अफसरों का कहना है अभी इसी आधार पर वसूली होगी। उन्होंने आने वाले समय में इसमें बढ़ोत्तरी की संभावना भी जताई है।
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काफी सोच-विचार के बाद यह यूजर चार्ज तय हुआ है। कम भवनों की संख्या के चलते यह रकम बढ़ गई। इसे कम नहीं किया जा सकता है।
अवनीश राय, नगर आयुक्त
- पहले से ही काफी अधिक मंहगाई है। कूड़ा उठाने के लिए यह काफी अधिक है। इतना सामान्य परिवार वहन नहीं कर सकता
रीता वर्मा
यूजर चार्ज इतना अधिक लगाएंगे, तब लोग कूड़ा देंगे नहीं। वह लोग अपने से ही सड़कों पर फेंकना शुरू कर देंगे। निगम को इसमें कमी करनी चाहिए
शैलेष गौतम
इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं करनी चाहिए। अधिकतम 70 रुपये ही करना चाहिए था। इतनी बढ़ोत्तरी काफी अधिक है।
शशि शुक्ला
महंगाई से सभी पहले से परेशान हैं। यह काफी अधिक बढ़ोत्तरी है। इसे कम किया जाना चाहिए
सीमा राय
रसोई गैस, सब्जी का दाम पहले ही आसमान पर है। अब यूजर चार्ज भी बढ़ा दिया। इससे सभी को परेशानी होगी।
रश्मि साहू
पहले सिर्फ हाउसटैक्स लिया जाता था। अब कूड़ा उठाने के लिए अलग से पैसा लिया जाने लगा। यह गलत है। इसे पूरी तरह खत्म किया जाए।
आशा नगरिया