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पिछले पांच चुनावों के डेटा अपलोड का काम पूरा
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झांसी। पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की कवायद तेज कर दी गई है। वर्ष 1995 से 2015 के बीच जनपद के सभी 496 ग्राम पंचायतों के आरक्षण का ब्योरा पंचायती राज विभाग के पोर्टल पर अपलोड करने का काम पूरा कर लिया गया। अफसरों के मुताबिक इस बार मैनुअल के बजाए विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए आरक्षण तय होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी के शुरुआती सप्ताह में आरक्षण प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी।
पंचायत चुनाव में सर्वाधिक विवाद सीटों के आरक्षण तय करने में फंसता है। हर सीट पर प्रत्येक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के इरादे से वर्ष 1995 से चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था लागू हुई। अमूमन जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित हुई उसके अगले चुनाव में उसे छोड़, दूसरे वर्ग को वह सीट मिलनी चाहिए लेकिन, कई बार राजनीतिक एवं स्थानीय दबाव में एक वर्ग को ही सीटें आरक्षित हो जाती हैं। इस वजह से चुनाव के बाद तक विवाद बना रहता है। पिछले चुनावों में हुए विवादों से सीख लेते हुए पंचायती राज महकमा अब पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने की कवायद में जुटा है।
इसके लिए पंचायत चुनाव-2020 नाम से साफ्टवेयर अपलोड किया गया है। इसके लिए वर्ष 1995-2015 के बीच सभी ग्राम पंचायतों की आबादी समेतआरक्षण के ब्यौरे अपलोड कराए गए। पिछले कई दिनों से डीपीआरओ कार्यालय में इसकी फीडिंग चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है। अधिकारियों का कहना है चुनावी प्रक्रिया आरंभ होते ही शासन के फैसले के मुताबिक साफ्टवेयर के जरिए आरक्षण तय कर दिया जाएगा हालांकि स्थानीय जरूरतों को देखते हुए दो प्रतिशत सीटों में बदलाव का अधिकार स्थानीय अफसरों को भी दिया गया है।
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पंचायत चुनाव में सर्वाधिक विवाद सीटों के आरक्षण तय करने में फंसता है। हर सीट पर प्रत्येक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के इरादे से वर्ष 1995 से चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था लागू हुई। अमूमन जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित हुई उसके अगले चुनाव में उसे छोड़, दूसरे वर्ग को वह सीट मिलनी चाहिए लेकिन, कई बार राजनीतिक एवं स्थानीय दबाव में एक वर्ग को ही सीटें आरक्षित हो जाती हैं। इस वजह से चुनाव के बाद तक विवाद बना रहता है। पिछले चुनावों में हुए विवादों से सीख लेते हुए पंचायती राज महकमा अब पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने की कवायद में जुटा है।
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इसके लिए पंचायत चुनाव-2020 नाम से साफ्टवेयर अपलोड किया गया है। इसके लिए वर्ष 1995-2015 के बीच सभी ग्राम पंचायतों की आबादी समेतआरक्षण के ब्यौरे अपलोड कराए गए। पिछले कई दिनों से डीपीआरओ कार्यालय में इसकी फीडिंग चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है। अधिकारियों का कहना है चुनावी प्रक्रिया आरंभ होते ही शासन के फैसले के मुताबिक साफ्टवेयर के जरिए आरक्षण तय कर दिया जाएगा हालांकि स्थानीय जरूरतों को देखते हुए दो प्रतिशत सीटों में बदलाव का अधिकार स्थानीय अफसरों को भी दिया गया है।
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