{"_id":"61ce113409dbea41867dcc10","slug":"people-who-came-from-far-away-did-not-get-treatment-returned-disappointed-people-who-came-from-far-away-did-not-get-treatment-returned-disappointed-jhansi-news-jhs212103241","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूरदराज से आए लोगों को नहीं मिला इलाज, निराश होकर लौट गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूरदराज से आए लोगों को नहीं मिला इलाज, निराश होकर लौट गए
विज्ञापन
झांसी। दूरदराज से इलाज की आस में पैसे खर्च करके आए मरीजों को मेडिकल कॉलेज में पर्चा काउंटर बंद होने की वजह से बैरंग लौटना पड़ा। सुबह से ही जूनियर डॉक्टरों ने काउंटर बंद करा दिए थे। इस कारण एक भी पर्चा नहीं बन पाया। कई मरीजों को सीनियर डॉक्टरों ने सारे पर्चे पर ही दवाएं लिखीं।
मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार से फिर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि नीट काउंसलिंग में लगातार देरी हो रही है। इस कारण पहले साल का बैच नहीं आ पाया है। इससे जूनियर डॉक्टरों की संख्या कम हो गई है और सब पर काम का बोझ भी ज्यादा पड़ रहा है। इसलिए उन्होंने फिर से काम ठप कर दिया है। बृहस्पतिवार को जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर बंद करा दिया। काउंटर के कर्मचारियों पर भी दबाव बनाया कि एक भी पर्चा न बनाया जाए। ऐसे में सभी काउंटर सुबह ही बंद कर दिए गए। कई मरीज काउंटर बंद देख बिना इलाज कराए ही वहां से लौट गए। कुछ मरीज पुराने पर्चे लेकर ओपीडी में बैठे सीनियर डॉक्टरों के पास पहुंच गए तो डॉक्टरों ने सादे पर्चे पर दवाएं लिख दीं।
ये बोले मरीज
पैर में काफी दिनों से दर्द है। काउंटर पर आया तो पर्चा नहीं बना। फिर ओपीडी में पहुंच गया। सीनियर डॉक्टरों से विनती की तो पुराने पर्चे पर उन्होंने देख लिया। - प्रवेश पखारिया, चिरंगाव।
विज्ञापन
बच्चे को दिखाने मेडिकल कॉलेज आया था। किराया भी खर्च हो गया। पर्चा भी नहीं बन पाया। अब लौटना पड़ रहा है। कल फिर दिखाने के लिए आऊंगा। - देवेंद्र राजपूत, पृथ्वीपुर।
काफी समय से पथरी की समस्या है। इसका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। पर्चा नहीं बना तो डॉक्टर ने ओपीडी में पुराने पर्चे पर ही दवाएं लिख दी हैं। - राजेंद्र कुमार, मऊरानीपुर।
जूनियर डॉक्टरों ने जबरन पर्चा काउंटर बंद करा दिए हैं। इससे रोजाना सैकड़ों मरीज बिना इलाज कराए ही लौट रहे हैं। कॉलेज प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था देखनी चाहिए। - क्रांति, मऊरानीपुर।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार से फिर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि नीट काउंसलिंग में लगातार देरी हो रही है। इस कारण पहले साल का बैच नहीं आ पाया है। इससे जूनियर डॉक्टरों की संख्या कम हो गई है और सब पर काम का बोझ भी ज्यादा पड़ रहा है। इसलिए उन्होंने फिर से काम ठप कर दिया है। बृहस्पतिवार को जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर बंद करा दिया। काउंटर के कर्मचारियों पर भी दबाव बनाया कि एक भी पर्चा न बनाया जाए। ऐसे में सभी काउंटर सुबह ही बंद कर दिए गए। कई मरीज काउंटर बंद देख बिना इलाज कराए ही वहां से लौट गए। कुछ मरीज पुराने पर्चे लेकर ओपीडी में बैठे सीनियर डॉक्टरों के पास पहुंच गए तो डॉक्टरों ने सादे पर्चे पर दवाएं लिख दीं।
विज्ञापन
ये बोले मरीज
पैर में काफी दिनों से दर्द है। काउंटर पर आया तो पर्चा नहीं बना। फिर ओपीडी में पहुंच गया। सीनियर डॉक्टरों से विनती की तो पुराने पर्चे पर उन्होंने देख लिया। - प्रवेश पखारिया, चिरंगाव।
विज्ञापन
बच्चे को दिखाने मेडिकल कॉलेज आया था। किराया भी खर्च हो गया। पर्चा भी नहीं बन पाया। अब लौटना पड़ रहा है। कल फिर दिखाने के लिए आऊंगा। - देवेंद्र राजपूत, पृथ्वीपुर।
काफी समय से पथरी की समस्या है। इसका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। पर्चा नहीं बना तो डॉक्टर ने ओपीडी में पुराने पर्चे पर ही दवाएं लिख दी हैं। - राजेंद्र कुमार, मऊरानीपुर।
जूनियर डॉक्टरों ने जबरन पर्चा काउंटर बंद करा दिए हैं। इससे रोजाना सैकड़ों मरीज बिना इलाज कराए ही लौट रहे हैं। कॉलेज प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था देखनी चाहिए। - क्रांति, मऊरानीपुर।