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करगुवां में क्षमा के अवतार पार्श्वनाथ ने किए चमत्कार

Thu, 09 Sep 2021 01:44 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Sep 2021 01:44 AM IST
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Parshvanath, the embodiment of forgiveness, performed miracles in Karguwan
Parshvanath, the embodiment of forgiveness, performed miracles in Karguwan - फोटो : REPORTERS
झांसी। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को क्षमा का अवतार माना जाता है। उन्होंने तपस्या के दौरान उपसर्ग करने वाले कमठ को भी क्षमा कर दिया था। बुंदेलखंड क्षेत्र में भगवान पार्श्वनाथ के कई चमत्कार हुए हैं। झांसी का करगुवां जैन तीर्थ भी भगवान पार्श्वनाथ के अतिशयों के चलते पूरे विश्व में जैन धर्म की पताका फहरा रहा है। यहां विराजित भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा 230 वर्ष पहले खुदाई से प्राप्त हुई थी। अतिशयकारी प्रतिमा के दर्शन करने के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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झांसी मेडिकल कॉलेज के सामने पहाड़ी पर स्थित करगुवां जैन तीर्थ को जैन धर्म के प्रमुख स्थलों मेें से एक माना जाता है। जैन श्रद्धालु बुंदेलखंड यात्रा का प्रारंभिक स्थल इस क्षेत्र को मानते हैं। यहां पर बने मंदिर में पहले काफी सारी प्रतिमाएं थीं, लेकिन 18वीं शताब्दी में आक्रमण के दौरान अंग्रेजों ने यहां की कई मूर्तियों को तोड़ दिया। कुछ सालों बाद प्रतिमाएं खुदाई में प्राप्त हुईं। जैन तीर्थ पर कुछ साल पहले तक भगवान की प्रतिमाएं गुफा (भौंयरे) में थी। अब यहां विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया है। मंदिर में विराजित सात प्रतिमाएं 1343 संवत की हैं। मंदिर के मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस प्रतिमा के निकट प्राय: सर्प देखे गये हैं, लेकिन उन्होंने किसी को हानि नहीं पहुंचाई। इस कारण यह अतिशय क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहां 71 फुट ऊ ंचे शिखर वाले मंदिर का निर्माण चल रहा है।
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चलते-चलते रुक गई थी गाड़ी
बताया जाता है कि आज जिस स्थान पर मंदिर है, वहां से 230 साल पहले खंडित जिन प्रतिमाओं से भरी हुई एक गाड़ी चलते-चलते रुक गई। तीर्थ के मंत्री राजेश जैन का कहना है कि उस समय झांसी का नाम बलवंतनगर था। सूचना पर तमाम लोग यहां आए, लेकिन गाड़ी को चला न सके। गाड़ी वाले को रात में स्वप्न हुआ कि जिस स्थान पर गाड़ी रूकी है उसके नीचे जमीन में जैन मूर्तियां हैं। उन्हें तुम निकलवाओ। उन्होंने उस स्थान की खुदाई कराई तो कुछ गहरा खोदने पर मूर्तियां दिखाई देने लगीं। तब यह निश्चय हुआ कि पहले रक्षा का प्रबंध हो जाये, तभी आगे खुदाई करायी जाए। सूचना झांसी में बाजीराव पेशवा द्वितीय का शासन था। उन तक समाचार पहुंचा तो वे खुद स्थान पर पहुंचे और खुदाई कराई। उनके सामने छह भव्य जिनप्रतिमाएं प्रकट हुई। इन प्रतिमाओं को यहां विराजित किया गया।
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जैन संतों का होता रहा चातुर्मास
पंचायत महामंत्री प्रवीण जैन बताते हैं कि करगुवां जैन तीर्थ पर तमाम जैन संतों का चातुर्मास और प्रवास हो चुका है। यहां पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज, आचार्य देशभूषण महाराज, आचार्य विमल सागर महाराज, आचार्य सन्मति सागर, आचार्य विरागसागर महाराज, आचार्य चंद्र सागर, आचार्य ज्ञान सागर, मुनि क्षमा सागर, मुनि विशुद्ध सागर, मुनि सरल सागर, मुनि पुलक सागर, मुनि विनम्र सागर महाराज, आर्यिका पूर्णमति माताजी, मुनि आदित्य सागर महाराज का चातुर्मास और प्रवास हो चुका है। मौजूदा समय में यहां आर्यिका विविक्तश्री माताजी चातुर्मास कर रही हैं।
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