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पारीछा विद्युत प्लांट को 72 करोड़ मिलेंगे
झांसी / ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:30 AM IST
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उत्तर प्रदेश राज्य उत्पादन निगम लिमिटेड व उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक इं. एपी मिश्र ने कहा कि विद्युत उत्पादन के मामले में पारीछा तापीय विद्युत परियोजना प्रदेश में श्रेष्ठ है। यहां क्षमता के अनुरूप अच्छा उत्पादन हो रहा है। यहां की बंद पड़ी इकाई व अन्य कार्य के लिए 72 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। वह परियोजना के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि क्षमता के मुकाबले पारीछा परियोजना में 856 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जो प्रदेश में श्रेष्ठ है। यह उस स्थिति में है, जब यहां की 110 मेगावाट की एक इकाई नवीनीकरण हेतु बंद चल रही है। प्रदेश शासन ने इकाई के कार्य के लिए एवं पारीछा में रेलवे लाइन एवं वैगन ट्रिप्लर की उचित व्यवस्था हेतु 72 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इससे पारीछा थर्मल पावर को फायदा होगा। अभी जल्द कोयला खाली न हो पाने के कारण परियोजना को पांच से छह करोड़ रुपए प्रति वर्ष रेलवे को जुर्माना देना पड़ता है। यह कार्य होने से परियोजना जुर्माने से बच जाएगी। 2016 तक 110 मेगावाट वाली इकाई में ईएसपी लगने से प्रदूषण की समस्या भी समाप्त हो जाएगी।
अभी पूरे प्रदेश को 12,500 से 13000 मेगावाट बिजली मिल रही है, जिसमें प्रदेश इकाइयों से 3500, केन्द्र से 5800 एवं निजी क्षेत्र से 3000 मेगावाट बिजली मिल रही है। शासन ने 653 इंजीनियर्स की भर्ती की भी स्वीकृति दे दी है, जिससे स्टाफ की कमी की समस्या का समाधान होगा।
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इस मौके पर इं. रामविलास पांडे डायरेक्टर पर्सनल, सीजीएम अखलेश कुमार व जीएम जीपी वर्मा मौजूद रहे। इससे पूर्व अभियंता संघ के सचिव इं. हरिजीत सिंह, आरके अग्रवाल, उमेश पांडेय, एके पांडेय, देवेंद्र राय आदि ने प्रबंध निदेशक का स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि क्षमता के मुकाबले पारीछा परियोजना में 856 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है, जो प्रदेश में श्रेष्ठ है। यह उस स्थिति में है, जब यहां की 110 मेगावाट की एक इकाई नवीनीकरण हेतु बंद चल रही है। प्रदेश शासन ने इकाई के कार्य के लिए एवं पारीछा में रेलवे लाइन एवं वैगन ट्रिप्लर की उचित व्यवस्था हेतु 72 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इससे पारीछा थर्मल पावर को फायदा होगा। अभी जल्द कोयला खाली न हो पाने के कारण परियोजना को पांच से छह करोड़ रुपए प्रति वर्ष रेलवे को जुर्माना देना पड़ता है। यह कार्य होने से परियोजना जुर्माने से बच जाएगी। 2016 तक 110 मेगावाट वाली इकाई में ईएसपी लगने से प्रदूषण की समस्या भी समाप्त हो जाएगी।
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अभी पूरे प्रदेश को 12,500 से 13000 मेगावाट बिजली मिल रही है, जिसमें प्रदेश इकाइयों से 3500, केन्द्र से 5800 एवं निजी क्षेत्र से 3000 मेगावाट बिजली मिल रही है। शासन ने 653 इंजीनियर्स की भर्ती की भी स्वीकृति दे दी है, जिससे स्टाफ की कमी की समस्या का समाधान होगा।
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इस मौके पर इं. रामविलास पांडे डायरेक्टर पर्सनल, सीजीएम अखलेश कुमार व जीएम जीपी वर्मा मौजूद रहे। इससे पूर्व अभियंता संघ के सचिव इं. हरिजीत सिंह, आरके अग्रवाल, उमेश पांडेय, एके पांडेय, देवेंद्र राय आदि ने प्रबंध निदेशक का स्वागत किया।