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पारीछा की आब- ओ- हवा में राख ही राख
झांसी / ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2015 12:30 AM IST
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट की चिमनियों में लगी ईएसपी (धुएं को कंट्रोल करने वाला उपकरण) कम चार्ज होने के कारण धुएं के साथ राख उड़ रही है। इससे आसपास के गांवों व हाइवे से गुजरने वाले लोगों का बुरा हाल है। सुबह जागने पर लोगों को राख की परत छतों पर जमी मिल रही है। इससे अफसर अनभिज्ञ बने हुए हैं।
वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की एक, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा है। 110 मेगावाट की नंबर दो इकाई मरम्मत कार्य के चलते बंद चल रही है। सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए। उत्पादन के लिए तीन चिमनियां बनाई गई हैं।
उत्पादन पश्चात चौदह हजार मीट्रिक टन फ्लाई एश प्रतिदिन पानी के घोल के रूम में डैम तक पहुंचायी जाती है। चिमनियों से धुएं के रूप में राख न उड़े इसके लिए ईएसपी उपकरण लगाए गए हैं। मगर, पिछले दो दिनों से ईएसपी कम चार्ज होने के कारण धुएं के साथ राख भी वातावरण में उड़ रही है। इससे थर्मल पावर हाउस के निकट स्थित ग्राम गुलारा, महेबा, पारीछा, मुराटा आदि गांवों के लोगों का रहना दूभर हो गया है। राख उड़कर उनके घरों तक पहुंच रही है। हवा में राख उड़ने से लोगों को दो पहिया वाहन चलाने में भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्लांट प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की एक, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा है। 110 मेगावाट की नंबर दो इकाई मरम्मत कार्य के चलते बंद चल रही है। सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए। उत्पादन के लिए तीन चिमनियां बनाई गई हैं।
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उत्पादन पश्चात चौदह हजार मीट्रिक टन फ्लाई एश प्रतिदिन पानी के घोल के रूम में डैम तक पहुंचायी जाती है। चिमनियों से धुएं के रूप में राख न उड़े इसके लिए ईएसपी उपकरण लगाए गए हैं। मगर, पिछले दो दिनों से ईएसपी कम चार्ज होने के कारण धुएं के साथ राख भी वातावरण में उड़ रही है। इससे थर्मल पावर हाउस के निकट स्थित ग्राम गुलारा, महेबा, पारीछा, मुराटा आदि गांवों के लोगों का रहना दूभर हो गया है। राख उड़कर उनके घरों तक पहुंच रही है। हवा में राख उड़ने से लोगों को दो पहिया वाहन चलाने में भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्लांट प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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