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‘पंजे’ पर शिकंजे से मुक्ति के लिए मिले हाथ

Mon, 09 Jul 2018 12:59 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 09 Jul 2018 12:59 AM IST
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panje pr sikanje se mukti ko mile hat
congress, jhansi news - फोटो : demo
स्थानीय राजनीति में कांग्रेस भले ही हाशिये पर हो, परंतु संगठन की अंदरूनी सियासत गरमाई हुई है। लंबे समय से शांत बैठे कांग्रेसियों में अब सक्रियता देखी जा रही है। उनमें हाथ के पंजे को ‘एक हाथ’ से निकालने की छटपटाहट महसूस की जा रही है। इसके लिए लामबंदी तेज हो गई है।  
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कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में पिछले कुछ समय से ‘वन मैन शो’ का आलम पसरा हुआ है। चुनाव हों या संगठनात्मक गतिविधियां, सभी जगह पूर्व मंत्री प्रदीप जैन की तूती बोल रही है। इससे असंतुष्ट होकर कई दिग्गज कांग्रेसी संगठन से ही कन्नी काटकर अपने घरों में बैठे हुए हैं। यदा कदा वह कांग्रेस के कार्यक्रमों में नजर आते भी हैं तो उनकी उपस्थिति रस्म अदायगी भर के लिए होती है। उनका मानना है कि दशकों से पार्टी के लिए पसीना बहाए जाने के बाद भी अब उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। जबकि, नए लोगों को तरजीह मिल रही है।
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हालांकि, इस बारे में खुलकर कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन, अंदरखाने में उनके विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। खासतौर पर पूर्व जिलाध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने के बाद से हाशिये पर चल रहे कांग्रेसी सक्रिय हो गए हैं। वह सुधांशु को झंडाबरदार मानते हुए पूर्व मंत्री की बादशाहत को खत्म करने के लिए जमीनी कांग्रेसियों को एकजुट करने में लग गए हैं। अब यह अभियान कितना सफल होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन दोबारा राजनीतिक जमीन बनाने की कवायद में जुटे पूर्व मंत्री की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। जनता के बीच एक बार फिर जड़ें जमाने के साथ-साथ पूर्व मंत्री के सामने अपनी पार्टी के लोगों का भी विश्वास हासिल की चुनौती बनी हुई है।
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कभी वर्चस्व की राजनीति नहीं की
मैंने कभी वर्चस्व की राजनीति नहीं की। जो लोग यह मानते हैं, वे गलत हैं। कांग्रेस में शुरुआत वार्ड अध्यक्ष पद से की थी और आज भी मैं अपने को सामान्य कार्यकर्ता ही मानता हूं। पार्टी से कभी टिकट मांगा नहीं, पार्टी ने स्वयं दिया तो चुनाव लड़ा। पिछला महापौर पद का चुनाव भी मैं पार्टी के लोगों की मर्जी से लड़ा था। नए कार्यकर्ताओं को तरजीह देने का काम पार्टी के निर्देश पर किया जा रहा है। पुराने कांग्रेसियों को भी भरपूर सम्मान किया जा रहा है।
- प्रदीप जैन, कांग्रेस नेता


कार्यकर्ता किसी को भी मान सकते हैं नेता
प्रदीप और सुधांशु दोनों ही कांग्रेस के नेता हैं। कार्यकर्ता इनमें से किसी के साथ भी जा सकते हैं। काम तो पार्टी का ही करेंगे। पार्टी के लोगों में किसी बात को लेकर मनभेद हो सकता है, परंतु मतभेद की स्थिति नहीं है। युवाओं की ऊर्जा और पुराने नेताओं के अनुभव से पार्टी को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। पार्टी में किसी का वर्चस्व नहीं है। सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।

- चंद्रशेखर तिवारी, जिलाध्यक्ष - कांग्रेस

भरोसे पर हमेशा खरा उतरा और उतरूंगा
पार्टी ने जब भी मुझे जो जिम्मेदारी दी, उसे पूरी शिद्दत से निभाया। संगठन ने भरोसा जताते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है, अब मेरा पूरा फोकस वहीं है। रही बात धड़ेबाजी की, तो इससे मुझे कभी कोई सरोकार नहीं रहा। हमेशा एक जिम्मेदार कार्यकर्ता की भूमिका में रहा। पार्टी के कार्यकर्ताओं के भरोसे पर हमेशा खरा उतरा और आगे भी उतरूंगा। जब उन्हें जरूरत होगी, मैं साथ खड़ा नजर आऊंगा।
- सुधांशु त्रिपाठी, राष्ट्रीय सचिव - कांग्रेस
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