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पंचायत चुनाव : बदल जाएगा सीटों का गणित, उम्मीदवारों की निगाहें आरक्षण पर टिकीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अगले कुछ महीनों में आरक्षण तय हो जाएगा। इस बार चक्रानुक्रम व्यवस्था से ही आरक्षण होंगे। पिछले चुनाव की आरक्षित सीटों में बदलाव होना लगभग तय है। इससे कई सीटों का गणित बिगड़ जाएगा। पंचायत चुनाव में हाथ आजमाने के लिए तैयार लोगों की नजर आरक्षण पर टिकी है।
आरक्षण पिछले चुनाव के रिकॉर्ड देखने के बाद तय होगा। इसे ऐसे समझें जैसे अगर किसी ग्राम पंचायत का प्रधान पद वर्ष 2021 में पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित था, तो इस बार उसके पिछड़ा वर्ग के खाते में जाने की संभावना अधिक है। इसी तरह एससी आरक्षित सीट से बदलकर एससी महिला में बदलने की गुंजाइश अधिक होगी। फिलहाल डीपीआरओ कार्यालय में पिछले चुनावों के आरक्षण फीड किए जा रहे हैं। नियमावली के मुताबिक शासन स्तर से जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख के आरक्षण तय होंगे, जबकि ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं ग्राम प्रधान का आरक्षण जिला प्रशासन तय करेगा।
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कम आबादी पर भी सीट हो सकती है आरक्षित : अगर पंचायत में किसी वर्ग की आबादी कम है तो भी उसी वर्ग विशेष को वह सीट आरक्षित हो सकती है। वहीं, यह भी संभव है कि जहां किसी वर्ग विशेष की आबादी अधिक हो, फिर भी दूसरे वर्ग को वह सीट आरक्षित कर दी जाए। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर किसी पंचायत में एससी आबादी महज 20 फीसदी है लेकिन, दूसरी आबादी अधिक है तो भी यह सीट एससी को आरक्षित हो सकती है।
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