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पंचायत चुनाव: अब कारतूसों पर निगहबानी
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झांसी। पंचायत चुनावों के मद्देनजर पुलिस ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने पिछले तीन माह के भीतर 20 से 50 कारतूस खरीदे हैं। पुलिस कारतूस खरीदारों से पूरा ब्यौरा जुटाएगी।
प्रत्येक चुनाव से पहले लाइसेंसी असलहे जमा करा लिए जाते हैं। ऐसे में हिंसा फैलाने वाले अवैध असलहों का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि देशी ब्रांड अवैध असलहों की कीमत व कारतूसों की खपत बढ़ जाती है। सूत्रों के अनुसार अवैध असलहों के खरीदारों के सामने सबसे बड़ी समस्या कारतूसों की होती है। उनकी जरूरत तमाम लाइसेंसधारी ब्लैक में कारतूस बेचकर पूरी करते हैं। ब्लैक मार्केट में कारतूस काफी ऊंची कीमत पर बिकते हैं। लाइसेंसधारकों को पिस्टल के कारतूस 100 रुपये, जबकि डबल बैरल के 50-100 रुपये के बीच मिल जाते हैं। एक लाइसेंस पर एक बार में 100 कारतूस और साल भर में 200 कारतूस मिलते हैं। जिन लाइसेंसधारकों की सांठगांठ होती है, वह इसका फायदा उठाते हैं। सूत्रों का दावा है ब्लैक मार्केट में पिस्टल के कारतूस की कीमत 500 रुपये और तमंचे में इस्तेमाल होने वाला कारतूस करीब 300 रुपये में मिलता है। सरकारी लाइसेंस जमा होने के बाद इन कारतूसों की मांग बढ़ जाती है।
उधर, पुलिस प्रशासन इन स्थितियों को देखते हुए पहले से चौकन्ना हो गया है। पंचायत चुनावों से पहले सूची तैयार की जा रही है, जिन्होंने पिछले तीन माह के भीतर 20-50 कारतूस एकमुश्त लिए हैं। इनके पिछले कारतूस खरीद का ब्यौरा भी जांचा जाएगा।
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वारदात में सबसे अधिक पिस्टल का इस्तेमाल
हाल के वर्षों में जितनी भी वारदात हुई हैं, उसमें बदमाशों ने सबसे अधिक पिस्टल का इस्तेमाल किया। झांसी ही नहीं, बल्कि ललितपुर एवं जालौन तक में पिछले एक वर्ष के दौरान जितने अवैध असलहे बरामद हुए, उनमें पिस्टल की संख्या तमंचे के करीब बराबर थी। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश पिस्टल बिहार के मुंगेर से ही यहां आई है। इनके कारतूस काफी महंगे होते हैं।
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प्रत्येक चुनाव से पहले लाइसेंसी असलहे जमा करा लिए जाते हैं। ऐसे में हिंसा फैलाने वाले अवैध असलहों का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि देशी ब्रांड अवैध असलहों की कीमत व कारतूसों की खपत बढ़ जाती है। सूत्रों के अनुसार अवैध असलहों के खरीदारों के सामने सबसे बड़ी समस्या कारतूसों की होती है। उनकी जरूरत तमाम लाइसेंसधारी ब्लैक में कारतूस बेचकर पूरी करते हैं। ब्लैक मार्केट में कारतूस काफी ऊंची कीमत पर बिकते हैं। लाइसेंसधारकों को पिस्टल के कारतूस 100 रुपये, जबकि डबल बैरल के 50-100 रुपये के बीच मिल जाते हैं। एक लाइसेंस पर एक बार में 100 कारतूस और साल भर में 200 कारतूस मिलते हैं। जिन लाइसेंसधारकों की सांठगांठ होती है, वह इसका फायदा उठाते हैं। सूत्रों का दावा है ब्लैक मार्केट में पिस्टल के कारतूस की कीमत 500 रुपये और तमंचे में इस्तेमाल होने वाला कारतूस करीब 300 रुपये में मिलता है। सरकारी लाइसेंस जमा होने के बाद इन कारतूसों की मांग बढ़ जाती है।
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उधर, पुलिस प्रशासन इन स्थितियों को देखते हुए पहले से चौकन्ना हो गया है। पंचायत चुनावों से पहले सूची तैयार की जा रही है, जिन्होंने पिछले तीन माह के भीतर 20-50 कारतूस एकमुश्त लिए हैं। इनके पिछले कारतूस खरीद का ब्यौरा भी जांचा जाएगा।
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वारदात में सबसे अधिक पिस्टल का इस्तेमाल
हाल के वर्षों में जितनी भी वारदात हुई हैं, उसमें बदमाशों ने सबसे अधिक पिस्टल का इस्तेमाल किया। झांसी ही नहीं, बल्कि ललितपुर एवं जालौन तक में पिछले एक वर्ष के दौरान जितने अवैध असलहे बरामद हुए, उनमें पिस्टल की संख्या तमंचे के करीब बराबर थी। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश पिस्टल बिहार के मुंगेर से ही यहां आई है। इनके कारतूस काफी महंगे होते हैं।