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भाजपा की बढ़त, सपा को झटका, निर्दलियों का रहा दबदबा
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झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का ट्रेलर माना जा रहा है। यही वजह रही कि राजनीतिक दल गांवों के इस चुनाव में अपनी जमीन मजबूत करने में पूरी ताकत झोंके रहे। जिला पंचायत की बात करें तो भाजपा को इस बार सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जबकि सपा को नुकसान उठाना पड़ा। बसपा की भी एक सीट कम हुई। जबकि, निर्दलियों को दबदबा रहा।
पिछले पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इकतरफा जीत हासिल की थी। जिला पंचायत के 24 सदस्यों में 16 समाजवादी पार्टी के थे। जबकि, चार - चार सदस्य भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के थे। सदन में पूर्ण बहुमत होने की वजह से सपा आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना ले गई थी। हालांकि, पिछले चुनाव में प्रदेश में सरकार होने की वजह से सपा के लिए परिस्थितियां एकदम अनुकूल थी। इस चुनाव में सियासी समीकरण एकदम बदल गए हैं। सोमवार की देर रात तक आए परिणाम और रुझानों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के खाते में आठ सीटे गईं हैं। भाजपा को चार सीटों का इजाफा हुआ है। जबकि, सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सपा 16 सीटों से सिमट कर 8 पर आ गई है। बसपा को भी एक सीट का नुकसान हुआ। बसपा के खाते से तीन सदस्य ही जिला पंचायत में पहुंचे। निर्दलियों ने खासा दबदबा दिखाया। नौ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। हालांकि, इनमें से सपा और भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले कुछ चेहरे भी शामिल हैं। जिला पंचायत की ज्यादा सीटें हासिल करने के बाद भी भाजपा निर्दलियों की ओर देखना होगा। यही स्थिति सपा के साथ भी है। अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए को भी निर्दलियों का साथ हासिल करना होगा। इसे लेकर जोड़तोड़ का दौर भी शुरू हो चुका है।
गांव की सियासत में भाजपा को बढ़त
झांसी। इस पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी क्षेत्र पंचायत व ग्राम सभाओं में भी बढ़त बनाने में कामयाब रही। हालांकि, इस चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल सीधे तौर पर शामिल नहीं था। लेकिन, भाजपा, सपा, बसपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर मैदान में उतरे। पिछले चुनाव में इन पदों पर भाजपा के तमाम लोग इसमें जीत हासिल करने में कामयाब रहे। सपा और बसपा ने भी अपना वजूद कायम रखा।
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सरकार की कल्याणकारी नीतियों का पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को लाभ मिला। जिला पंचायत से लेकर ग्राम सभा तक में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा का होगा। विपक्षी दल हार से बौखलाकर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्हें पहले अपनी गिरेबान में झांकना चाहिए।
- मुकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष - भाजपा
जिला पंचायत में नौ निर्दलियों ने बढ़त बनाई है। इनमें से ज्यादातर सपा के कार्यकर्ता ही हैं। क्योंकि, कई सीटों पर पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किए थे। सपा के ही लोग वहां आमने-सामने थे और जीतकर ही सपाई आए। भाजपा के इशारे पर पहले मतगणना में खूब खेल किया गया। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में सपा का दबदबा कायम रहा।
- संत सिंह सेरसा, पूर्व जिलाध्यक्ष - सपा
तमाम हथकंडों के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीन तैयार नहीं कर पाई। बहुजन समाज पार्टी को ग्रामीण जनता का अभूतपूर्व साथ मिला। ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के पद भी बसपा के तमाम कार्यकर्ताओं ने जीत हासिल की। जिला पंचायत में भी बहुजन समाज पार्टी नुकसान में नहीं रही।
- राजू राजगढ़, जिलाध्यक्ष - बसपा
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पिछले पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इकतरफा जीत हासिल की थी। जिला पंचायत के 24 सदस्यों में 16 समाजवादी पार्टी के थे। जबकि, चार - चार सदस्य भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के थे। सदन में पूर्ण बहुमत होने की वजह से सपा आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना ले गई थी। हालांकि, पिछले चुनाव में प्रदेश में सरकार होने की वजह से सपा के लिए परिस्थितियां एकदम अनुकूल थी। इस चुनाव में सियासी समीकरण एकदम बदल गए हैं। सोमवार की देर रात तक आए परिणाम और रुझानों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के खाते में आठ सीटे गईं हैं। भाजपा को चार सीटों का इजाफा हुआ है। जबकि, सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सपा 16 सीटों से सिमट कर 8 पर आ गई है। बसपा को भी एक सीट का नुकसान हुआ। बसपा के खाते से तीन सदस्य ही जिला पंचायत में पहुंचे। निर्दलियों ने खासा दबदबा दिखाया। नौ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। हालांकि, इनमें से सपा और भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले कुछ चेहरे भी शामिल हैं। जिला पंचायत की ज्यादा सीटें हासिल करने के बाद भी भाजपा निर्दलियों की ओर देखना होगा। यही स्थिति सपा के साथ भी है। अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए को भी निर्दलियों का साथ हासिल करना होगा। इसे लेकर जोड़तोड़ का दौर भी शुरू हो चुका है।
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गांव की सियासत में भाजपा को बढ़त
झांसी। इस पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी क्षेत्र पंचायत व ग्राम सभाओं में भी बढ़त बनाने में कामयाब रही। हालांकि, इस चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल सीधे तौर पर शामिल नहीं था। लेकिन, भाजपा, सपा, बसपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर मैदान में उतरे। पिछले चुनाव में इन पदों पर भाजपा के तमाम लोग इसमें जीत हासिल करने में कामयाब रहे। सपा और बसपा ने भी अपना वजूद कायम रखा।
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सरकार की कल्याणकारी नीतियों का पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को लाभ मिला। जिला पंचायत से लेकर ग्राम सभा तक में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा का होगा। विपक्षी दल हार से बौखलाकर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्हें पहले अपनी गिरेबान में झांकना चाहिए।
- मुकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष - भाजपा
जिला पंचायत में नौ निर्दलियों ने बढ़त बनाई है। इनमें से ज्यादातर सपा के कार्यकर्ता ही हैं। क्योंकि, कई सीटों पर पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किए थे। सपा के ही लोग वहां आमने-सामने थे और जीतकर ही सपाई आए। भाजपा के इशारे पर पहले मतगणना में खूब खेल किया गया। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में सपा का दबदबा कायम रहा।
- संत सिंह सेरसा, पूर्व जिलाध्यक्ष - सपा
तमाम हथकंडों के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीन तैयार नहीं कर पाई। बहुजन समाज पार्टी को ग्रामीण जनता का अभूतपूर्व साथ मिला। ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के पद भी बसपा के तमाम कार्यकर्ताओं ने जीत हासिल की। जिला पंचायत में भी बहुजन समाज पार्टी नुकसान में नहीं रही।
- राजू राजगढ़, जिलाध्यक्ष - बसपा