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25 दिन में बनकर तैयार हो गया ऑक्सीजन प्लांट का ढांचा
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झांसी। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। इसी का नतीजा है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के परिसर में महज 25 दिन के भीतर ऑक्सीजन प्लांट का ढांचा तैयार कर दिया गया है। एक सप्ताह के भीतर डीआरडीओ की टीम इसमें मशीन फिट करेगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ऑक्सीजन को पाइप लाइन के जरिये वार्डों तक ले जाने का इंतजाम करेगा।
कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर के दस्तक देने के साथ ही ऑक्सीजन की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तमाम मरीजों की सांसों की डोर तक टूट गई थी। हालांकि, दूसरी लहर की रफ्तार पूरी तरह से शांत पड़ चुकी है, लेकिन अब तीसरी लहर का खतरा सिर पर बना हुआ है। इससे निपटने के पहले से ही इंतजाम किए जाने लगे हैं। खासतौर पर ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्ध सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक हजार लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने की योजना बनाई गई थी। प्लांट का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को सौंपी गई थी। एनएचएआई ने एक जून को काम शुरू किया था और 25 जून को काम पूरा कर लिया गया। अठारह लाख रुपये की लागत से ये बनाया गया है। अब डीआरडीओ की टीम आकर इसमें मशीन फिट करेगी। प्लांट से वार्डों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति पाइप लाइन के जरिये की जाएगी। ये काम मेडिकल कॉलेज द्वारा किया जाएगा।
कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। शासन - प्रशासन का ध्यान ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्ध सुनिश्चित करने पर लगा हुआ है। एनएचएआई को ऑक्सीजन प्लांट का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी, जिससे महज 25 दिन में ही तैयार कर दिया गया है।
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- राजीव पाठक, परियोजना प्रबंधक - एनएचएआई
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कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर के दस्तक देने के साथ ही ऑक्सीजन की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तमाम मरीजों की सांसों की डोर तक टूट गई थी। हालांकि, दूसरी लहर की रफ्तार पूरी तरह से शांत पड़ चुकी है, लेकिन अब तीसरी लहर का खतरा सिर पर बना हुआ है। इससे निपटने के पहले से ही इंतजाम किए जाने लगे हैं। खासतौर पर ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्ध सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक हजार लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने की योजना बनाई गई थी। प्लांट का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को सौंपी गई थी। एनएचएआई ने एक जून को काम शुरू किया था और 25 जून को काम पूरा कर लिया गया। अठारह लाख रुपये की लागत से ये बनाया गया है। अब डीआरडीओ की टीम आकर इसमें मशीन फिट करेगी। प्लांट से वार्डों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति पाइप लाइन के जरिये की जाएगी। ये काम मेडिकल कॉलेज द्वारा किया जाएगा।
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कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। शासन - प्रशासन का ध्यान ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्ध सुनिश्चित करने पर लगा हुआ है। एनएचएआई को ऑक्सीजन प्लांट का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी, जिससे महज 25 दिन में ही तैयार कर दिया गया है।
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- राजीव पाठक, परियोजना प्रबंधक - एनएचएआई