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अमर उजाला अभियान: ऑक्सीजन में आत्मनिर्भर बना झांसी, कोरोना काल में तैयार हो गए 10 प्लांट
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झांसी। ऑक्सीजन के मामले में झांसी अब आत्मनिर्भर हो चुका है। कोरोना काल में जिले में दस ऑक्सीजन प्लांट तैयार हुए हैं। यहां अब प्राण वायु की कमी नहीं होगी। दूसरी लहर जैसी स्थिति आई तो ये प्लांट ही जिले की मांग को काफी हद तक पूरी कर सकेंगे। मेडिकल कॉलेज में अलग से लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट (एलओपी) बना है।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत सामने आई थी। उस समय प्राइवेट से लेकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए सप्लायरों के पास लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती थी। इस वजह से कई अस्पतालों में मरीजों को भर्ती ही नहीं किया, तो कइयों ने एडमिट रोगियों को अस्पताल से निकाल दिया। ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की जान भी गई। इसको मद्देनजर रखते हुए प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों, सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने के निर्देश दिए। इसी का परिणाम रहा कि झांसी में कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही 10 ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हैं। इनमें दो प्लांट मेडिकल कॉलेज में बने हैं।
चार नर्सिंगहोमों ने भी लग गए प्लांट
सरकारी स्वास्थ्य इकाइयां ही नहीं शहर के मां पीतांबरा केयर एंड क्योर समेत चार प्राइवेट अस्पतालों ने भी अपने यहां ऑक्सीजन लग गए हैं। प्लांट की क्षमता के हिसाब से कहीं रोजाना 25 तो कही 40 सिलिंडर के आसपास ऑक्सीजन गैस बन रही है। ऐसे में इन अस्पतालों को बाहर से लेने की जरूरत नहीं पड़ती है।
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कहां-कितने प्लांट बने
...............................
स्वास्थ्य इकाई बेड क्षमता प्लांट क्षमता
सीएचसी रानीपुर 75 500
सीएचसी समथर 75 500
सीएचसी बड़ागांव 75 500
सीएचसी बरुआसागर 75 500
सीएचसी गरौठा 75 500
रेलवे अस्पताल 100 500
कैंट अस्पताल 100 500
जिला अस्पताल 100 850
मेडिकल कॉलेज 100 1000
(नोट: प्लांट क्षमता लीटर प्रति मिनट में है।)
वर्जन..
झांसी में सरकारी अस्पतालों में 10 ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। ऐसे में अब दूसरी लहर जैसी स्थिति आई तो ये प्लांट ही काफी हद तक ऑक्सीजन की मांग पूरी कर सकेंगे। - डॉ. एनके जैन, जिला समन्वयक, ऑक्सीजन प्लांट।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत सामने आई थी। उस समय प्राइवेट से लेकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए सप्लायरों के पास लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती थी। इस वजह से कई अस्पतालों में मरीजों को भर्ती ही नहीं किया, तो कइयों ने एडमिट रोगियों को अस्पताल से निकाल दिया। ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की जान भी गई। इसको मद्देनजर रखते हुए प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों, सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने के निर्देश दिए। इसी का परिणाम रहा कि झांसी में कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही 10 ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हैं। इनमें दो प्लांट मेडिकल कॉलेज में बने हैं।
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चार नर्सिंगहोमों ने भी लग गए प्लांट
सरकारी स्वास्थ्य इकाइयां ही नहीं शहर के मां पीतांबरा केयर एंड क्योर समेत चार प्राइवेट अस्पतालों ने भी अपने यहां ऑक्सीजन लग गए हैं। प्लांट की क्षमता के हिसाब से कहीं रोजाना 25 तो कही 40 सिलिंडर के आसपास ऑक्सीजन गैस बन रही है। ऐसे में इन अस्पतालों को बाहर से लेने की जरूरत नहीं पड़ती है।
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कहां-कितने प्लांट बने
...............................
स्वास्थ्य इकाई बेड क्षमता प्लांट क्षमता
सीएचसी रानीपुर 75 500
सीएचसी समथर 75 500
सीएचसी बड़ागांव 75 500
सीएचसी बरुआसागर 75 500
सीएचसी गरौठा 75 500
रेलवे अस्पताल 100 500
कैंट अस्पताल 100 500
जिला अस्पताल 100 850
मेडिकल कॉलेज 100 1000
(नोट: प्लांट क्षमता लीटर प्रति मिनट में है।)
वर्जन..
झांसी में सरकारी अस्पतालों में 10 ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। ऐसे में अब दूसरी लहर जैसी स्थिति आई तो ये प्लांट ही काफी हद तक ऑक्सीजन की मांग पूरी कर सकेंगे। - डॉ. एनके जैन, जिला समन्वयक, ऑक्सीजन प्लांट।