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यूपी में ओवल आकार के कान सबसे ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2016 12:40 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फोरेंसिक साइंस विभाग के एक छात्र द्वारा तैयार किए गए ‘इयर बायोमेट्रिक’ नामक प्रोजेक्ट में शोध से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में अंडाकार (ओवल) आकार वाले व्यक्तियों की संख्या सबसे अधिक होती है। 290 व्यक्तियों के कान के सैंपल लेने पर 60 फीसदी अंडाकार आकार वाले लोग मिले हैं।
मनुष्य के शारीरिक अंगों में से कान सबसे विशिष्ट स्थान रखता है, क्योंकि दुनिया में किन्हीं दो व्यक्तियों के कान एक जैसे नहीं होते हैं। यहां तक की एक ही मनुष्य के दोनों कानों में भी बारीक भिन्नता होती है। मनुष्य के कानों की संरचना दस सालों तक बदलने के बाद एक समान हो जाती है। हालांकि, आकार बढ़ता रहता है।
बीयू के फोरेंसिक साइंस विभाग के छात्र मुरली मनोहर यादव द्वारा यूपी के अलग-अलग जनपदों के 290 व्यक्तियों पर किए गए शोध में अंडाकार आकार के 60 फीसदी, गोलाकार के 15.86 फीसदी, आयताकार के 12.41 फीसदी, त्रिभुजाकार के 8.62 फीसदी, बहुभुजाकार के 3.10 फीसदी लोग पाए गए हैं। वहीं, कान के निचले हिस्से की बात करें तो गोलाकार के 43.44 फीसदी, धनुषाकार के 40.34 फीसदी, त्रिभुजाकार के 4.13 फीसदी और आयताकार के 12.06 फीसदी व्यक्ति पाए गए हैं।
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बी-वाई कम्यूनिटी पर भी हुआ काम
फोरेंसिक साइंस विभाग में कान पर यह पहला शोध नहीं है, इससे पहले भी विभाग के प्रवक्ता प्रदीप यादव कान पर अध्ययन कर चुके है। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र के ब्राह्मण-यादव (बी-वाई) व्यक्तियों पर शोध से पता लगाया था कान की संरचना के आधार पर कम्यूनिटी का पता लगाया जा सकता है। यही नहीं, आपदा पीड़ितों की शिनाख्त में भी कान किस तरह मददगार हो सकता है, इसकी भी उन्होंने जानकारी की थी।
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मनुष्य के शारीरिक अंगों में से कान सबसे विशिष्ट स्थान रखता है, क्योंकि दुनिया में किन्हीं दो व्यक्तियों के कान एक जैसे नहीं होते हैं। यहां तक की एक ही मनुष्य के दोनों कानों में भी बारीक भिन्नता होती है। मनुष्य के कानों की संरचना दस सालों तक बदलने के बाद एक समान हो जाती है। हालांकि, आकार बढ़ता रहता है।
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बीयू के फोरेंसिक साइंस विभाग के छात्र मुरली मनोहर यादव द्वारा यूपी के अलग-अलग जनपदों के 290 व्यक्तियों पर किए गए शोध में अंडाकार आकार के 60 फीसदी, गोलाकार के 15.86 फीसदी, आयताकार के 12.41 फीसदी, त्रिभुजाकार के 8.62 फीसदी, बहुभुजाकार के 3.10 फीसदी लोग पाए गए हैं। वहीं, कान के निचले हिस्से की बात करें तो गोलाकार के 43.44 फीसदी, धनुषाकार के 40.34 फीसदी, त्रिभुजाकार के 4.13 फीसदी और आयताकार के 12.06 फीसदी व्यक्ति पाए गए हैं।
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बी-वाई कम्यूनिटी पर भी हुआ काम
फोरेंसिक साइंस विभाग में कान पर यह पहला शोध नहीं है, इससे पहले भी विभाग के प्रवक्ता प्रदीप यादव कान पर अध्ययन कर चुके है। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र के ब्राह्मण-यादव (बी-वाई) व्यक्तियों पर शोध से पता लगाया था कान की संरचना के आधार पर कम्यूनिटी का पता लगाया जा सकता है। यही नहीं, आपदा पीड़ितों की शिनाख्त में भी कान किस तरह मददगार हो सकता है, इसकी भी उन्होंने जानकारी की थी।