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ओरछा: नए सिंहासन पर विराजमान होंगे रामराजा सरकार, डेढ़ साल में वाराणसी के कारीगरों ने किया तैयार
Mon, 16 Mar 2026 12:15 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:15 PM IST
सार
नया सिंघासन करीब सात फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा और लगभग 12 फीट ऊंचा है। यह सिंहासन अपनी भव्यता और नक्काशी के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया है।
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रामराजा सरकार का नया राजसी सिंहासन
- फोटो : संवाद
विस्तार
भगवान रामराजा सरकार के लिए एक नया राजसी सिंहासन तैयार किया है, जिस पर विराजमान होकर वे रामनवमी पर भक्तों को दर्शन देंगे। नया सिंहासन वाराणसी के कारीगरों ने डेढ़ साल में तैयार किया है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह भव्य सिंहासन एक निजी संस्था ने भेंट किया है। इसे बनाने में लगभग 18 महीने का समय लगा। जबकि, अंतिम फिनिशिंग और पॉलिशिंग में करीब ढाई महीने अतिरिक्त लगे। सिंहासन को तैयार करने का काम वाराणसी के प्रसिद्ध कारीगर राजा कलसेरा और उनकी छह सदस्यीय टीम ने किया है।
100 साल पुरानी शीशम की लकड़ी का उपयोग
नया सिंघासन करीब सात फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा और लगभग 12 फीट ऊंचा है। यह सिंहासन अपनी भव्यता और नक्काशी के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसके निर्माण में करीब दो क्विंटल 100 साल पुरानी शीशम की लकड़ी का उपयोग किया गया है। इसकी सजावट और मजबूती के लिए मिश्रित धातु जर्मन सिल्वर का भी प्रयोग किया है, जिससे इसकी राजसी आभा और अधिक निखर कर सामने आई है। फाउंडेशन से जुड़े सुलभ अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले भी संस्था की ओर से मंदिर में ढोल, नगाढ़े और पालकी भेंट की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर भगवान रामराजा सरकार इसी नए सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे, जिससे इस ऐतिहासिक परंपरा में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।
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मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह भव्य सिंहासन एक निजी संस्था ने भेंट किया है। इसे बनाने में लगभग 18 महीने का समय लगा। जबकि, अंतिम फिनिशिंग और पॉलिशिंग में करीब ढाई महीने अतिरिक्त लगे। सिंहासन को तैयार करने का काम वाराणसी के प्रसिद्ध कारीगर राजा कलसेरा और उनकी छह सदस्यीय टीम ने किया है।
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100 साल पुरानी शीशम की लकड़ी का उपयोग
नया सिंघासन करीब सात फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा और लगभग 12 फीट ऊंचा है। यह सिंहासन अपनी भव्यता और नक्काशी के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसके निर्माण में करीब दो क्विंटल 100 साल पुरानी शीशम की लकड़ी का उपयोग किया गया है। इसकी सजावट और मजबूती के लिए मिश्रित धातु जर्मन सिल्वर का भी प्रयोग किया है, जिससे इसकी राजसी आभा और अधिक निखर कर सामने आई है। फाउंडेशन से जुड़े सुलभ अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले भी संस्था की ओर से मंदिर में ढोल, नगाढ़े और पालकी भेंट की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर भगवान रामराजा सरकार इसी नए सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे, जिससे इस ऐतिहासिक परंपरा में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।
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