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सिर्फ तीन डॉक्टरों के सहारे चल रहा महिला अस्पताल
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झांसी। जिला महिला अस्पताल में सालों से चिकित्सकों की कमी है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगातार डॉक्टरों की मांग की जा रही है। लेकिन विभाग द्वारा कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिसका खामियाजा अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि अब सिर्फ तीन ही डॉक्टरों के सहारे अस्पताल को चलाया जा रहा है।
अस्पताल में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना तीन सौ से चार सौ महिलाएं इलाज कराने के लिए आतीं हैं। जिनमें से अधिकतर गर्भवती महिलाएं होती हैं। अस्पताल में सिर्फ तीन ही चिकित्सक होने के कारण बमुश्किल एक ही चिकित्सक ओपीडी में बैठकर गर्भवती महिलाओं का इलाज कर परामर्श दे पाती है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। आलम यह है कि एक महिला चिकित्सक लेबर रूम व एक चिकित्सक की ड्यूटी को ऑपरेशन थिएटर में लगाया जाता है।
सबसे अधिक दिक्कत उस समय होती है जब एक चिकित्सक की ड्यूटी रात में लगाई जाती है तो वह दूसरे दिन रेस्ट पर रहतीं हैं। जिसके चलते कुल दो ही चिकित्सक मौजूद रहतीं हैं। ऐसे में ओटी, लेबर रूम व ओपीडी में मरीजों को परामर्श देना किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि कोरोना काल में सीएमओ द्वारा ओपीडी में परामर्श देने के लिए चिकित्सकों को नियुक्त किया गया था। लेकिन अब उनकी ड्यूटी को नहीं लगाया जाता है।
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इस संबंध में एडी हेल्थ बीके सिन्हा ने बताया कि महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र लिखकर चिकित्सकों की मांग की गई है। जल्द ही चिकित्सकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा। मंगलवार को अस्पताल का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति को देखा जाएगा।
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अस्पताल में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना तीन सौ से चार सौ महिलाएं इलाज कराने के लिए आतीं हैं। जिनमें से अधिकतर गर्भवती महिलाएं होती हैं। अस्पताल में सिर्फ तीन ही चिकित्सक होने के कारण बमुश्किल एक ही चिकित्सक ओपीडी में बैठकर गर्भवती महिलाओं का इलाज कर परामर्श दे पाती है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। आलम यह है कि एक महिला चिकित्सक लेबर रूम व एक चिकित्सक की ड्यूटी को ऑपरेशन थिएटर में लगाया जाता है।
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सबसे अधिक दिक्कत उस समय होती है जब एक चिकित्सक की ड्यूटी रात में लगाई जाती है तो वह दूसरे दिन रेस्ट पर रहतीं हैं। जिसके चलते कुल दो ही चिकित्सक मौजूद रहतीं हैं। ऐसे में ओटी, लेबर रूम व ओपीडी में मरीजों को परामर्श देना किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि कोरोना काल में सीएमओ द्वारा ओपीडी में परामर्श देने के लिए चिकित्सकों को नियुक्त किया गया था। लेकिन अब उनकी ड्यूटी को नहीं लगाया जाता है।
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इस संबंध में एडी हेल्थ बीके सिन्हा ने बताया कि महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र लिखकर चिकित्सकों की मांग की गई है। जल्द ही चिकित्सकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा। मंगलवार को अस्पताल का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति को देखा जाएगा।