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प्राचीन शिव मंदिरों का होगा कायाकल्प
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गोविंद चौराहा स्थित मढ़िया महादेव मंदिर परिसर के सभी प्राचीन मंदिरों को दिया जाएगा आर्कषक स्वरू
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झांसी। बुंदेलखंड के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में स्थापित अति प्राचीन शिव मंदिरों का पुरातत्व विभाग कायाकल्प करेगा। इनके संरक्षण के लिए वह प्रस्ताव बन चुका है। साथ ही गोविंद चौराहा स्थित मढ़िया महादेव मंदिर परिसर के सभी प्राचीन मंदिरों को आकर्षक स्वरूप देने के लिए विभाग ने तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।
झांसी और उसके आस पास के इलाकों में 10 वीं सदी से लेकर 18 वी सदी तक के बेहद प्राचीन मंदिर मौजूद है। इनमें खास बात यह है, कि शिव पुराण सहित अन्य ग्रंथों में मौजूद भगवान शिव के विभिन्न रूपों को मूर्तियों में दर्शाया गया है। इसके साथ ही मंदिरों में नक्काशियां, चित्रकारी भी अद्भुत है। यह मंदिर संरक्षित रहे ऐसे में पुरातत्व विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें दौन का शिव मंदिर, मऊरानीपुर का केदारेश्वर मंदिर, डुमरई में लखेरी नदी में बने शिवलिंग, चांदपुर का हजारिया महादेव मंदिर, पचवारा का शिव मंदिर, पाली का नील कंठेश्वर मंदिर, गैराहा का शिव मंदिर आदि है। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के अनुसार इन शिवालयों के संरक्षण की प्रक्रिया चल रही है। उनके अनुसार मढ़िया महादेव मंदिर व उसके आस पास मौजूद प्राचीन शिव मंदिरों के विकास कार्य के लिए शासन को तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें जीर्णोद्धार, उद्यानीकरण सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे।
17 वी सदी के बने है मढ़िया महादेव के मंदिर
गोविंद चौराहा स्थित प्राचीन मढ़िया महादेव मंदिर व उसके आसपास मौजूद शिव मंदिरों के निर्माण 17 वीं - 18 वीं सदी के दौरान आदि शंकराचार्य के अनुयायी गोसाईं संप्रदाय के लोगों द्वारा कराए गए थे। मुख्य मंदिर से लगे करीब 12 छोटे बडे़ मंदिर है। जिन्हें समाधि मंदिर भी कहते है। इनके शिखर काफी आकर्षक नजर आते है।
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झांसी और उसके आस पास के इलाकों में 10 वीं सदी से लेकर 18 वी सदी तक के बेहद प्राचीन मंदिर मौजूद है। इनमें खास बात यह है, कि शिव पुराण सहित अन्य ग्रंथों में मौजूद भगवान शिव के विभिन्न रूपों को मूर्तियों में दर्शाया गया है। इसके साथ ही मंदिरों में नक्काशियां, चित्रकारी भी अद्भुत है। यह मंदिर संरक्षित रहे ऐसे में पुरातत्व विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें दौन का शिव मंदिर, मऊरानीपुर का केदारेश्वर मंदिर, डुमरई में लखेरी नदी में बने शिवलिंग, चांदपुर का हजारिया महादेव मंदिर, पचवारा का शिव मंदिर, पाली का नील कंठेश्वर मंदिर, गैराहा का शिव मंदिर आदि है। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के अनुसार इन शिवालयों के संरक्षण की प्रक्रिया चल रही है। उनके अनुसार मढ़िया महादेव मंदिर व उसके आस पास मौजूद प्राचीन शिव मंदिरों के विकास कार्य के लिए शासन को तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें जीर्णोद्धार, उद्यानीकरण सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे।
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17 वी सदी के बने है मढ़िया महादेव के मंदिर
गोविंद चौराहा स्थित प्राचीन मढ़िया महादेव मंदिर व उसके आसपास मौजूद शिव मंदिरों के निर्माण 17 वीं - 18 वीं सदी के दौरान आदि शंकराचार्य के अनुयायी गोसाईं संप्रदाय के लोगों द्वारा कराए गए थे। मुख्य मंदिर से लगे करीब 12 छोटे बडे़ मंदिर है। जिन्हें समाधि मंदिर भी कहते है। इनके शिखर काफी आकर्षक नजर आते है।
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