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भूख से तड़प - तड़प कर हो रही है गायों की मौत
ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2016 01:13 AM IST
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मोंठ (झांसी)। शाहजहांपुर में खुली दुग्ध डेयरी में एक-एक कर गायों की मौत भूख से हो रही है। डेयरी में न तो चारे का इंतजाम है और न ही भूसे का। अन्य अनियमितताएं भी वहां हावी हैं। शनिवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है।
स्थिति यह है कि मौके पर पहुंचे एसडीएम राकेश गुप्ता व तहसीलदार सुरेंद्र बहादुर सिंह के सामने ही दो गायों की मौत हो गई। एसडीएम ने डेयरी प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
शिखर दुग्ध डेयरी नई दिल्ली द्वारा शाहजहांपुर में खोली गई डेयरी में एक- एक कर हो रही गायों की मौत की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद शनिवार को एसडीएम राकेश गुप्ता व तहसीलदार सुरेंद्र बहादुर सिंह के अलावा पशु चिकित्सा विभाग की चार सदस्यीय टीम ने वहां पहुंच कर जांच की। अफसरों को डेयरी में 199 गाय मिलीं, जिनमें तीन मरणासन्न स्थिति में थीं।
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डेयरी में ब मुश्किल मात्र एक क्विंटल भूसा रखा मिला, वह भी खाने के लायक नहीं था। गायों के सामने भूसा अथवा चारा नहीं डाला गया था। गायों की स्थिति दयनीय थी।
यह देखकर एसडीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने वहीं से थाना प्रभारी शाहजहांपुर तथा पशु चिकित्साधिकारी मोंठ को टेलीफोन पर निर्देश दिए कि गायों को एक बाड़े में बांधकर भूखा रखना, मानक के अनुसार चारा, भूसा आदि न देना पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आता है। संबंधित कंपनी शिखर दुग्ध डेयरी नई दिल्ली के संचालकों तथा स्थानीय स्तर पर प्रबंधन देख रहे लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए तथा संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
एसडीएम ने पशु चिकित्साधिकारी से पूछा कि निजी कंपनी की मृत गायों का पोस्टमार्टम किसके निर्देश पर किया जाता है? अगर पोस्टमार्टम करना नैतिक ड्यूटी है तो यह भी देखा जाए कि गायों को भर पेट भोजन मिल रहा है या नहीं? हालत देख कर लग रहा है कि बीमा पाने के लिये जानबूझ कर गायों को भूखा रखा जा रहा है, जिससे उनकी मौत हो और कंपनी के लोग बीमा राशि प्राप्त कर लें? एसडीएम ने पशु चिकित्साधिकारी से कहा कि तत्काल विभागीय स्तर पर गायों को चारा एवं भूसा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
एसडीएम ने डेयरी पर काम देख रहे प्रेमनारायण झा, अतुल सक्सेना एवं ग्राम निवासी डेयरी के ट्रस्टी रामजी राजपूत से नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी हालत में गाय भूखी न रहें, उन्हें भूसा एवं चारा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। एसडीएम एवं तहसीलदार ने उन किसानों के भी बयान लिए, जिन्होंने पिछले साल कंपनी को अनुबंध के तहत भूसा, चारा उपलब्ध कराया था, लेकिन उन लोगों को पैसा नहीं मिला।
करीब दो दर्जन से अधिक किसानों ने बताया कि कंपनी पर दस लाख रुपये से अधिक बकाया है। डेयरी में काम करने वाले मजदूरों को भी मजदूरी नहीं मिली है। मजदूरों ने भी हजारों रुपये बकाया होने की शिकायत की।
जांच के बाद उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लखन लाल त्रिपाठी ने बताया कि डेयरी में न गायों के लिए शेड मानक के अनुसार है और न ही खाने का इंतजाम है। प्रबंधन की लापरवाही व पर्याप्त मात्रा में चारा व भूसा न मिलने के कारण गायों की मौत हो रही है।
तालाब के भराव क्षेत्र में डेयरी बना देने से गायों के भोजन के साथ लीवर फ्लू भी पहुंच रहे हैं, इस कारण भी वह कमजोर हो रही हैँ। उन्होंने बताया कि समय-समय पर गायों के स्वास्थ्य व खुराक के संबंध में सलाह दी गई पर डेयरी प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जांच टीम में उनके साथ डा. ए. के दौदेरिया, डा. राम सिंह व बालकृष्ण भी मौजूद रहे।
पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर भी आ सकते हैं लपेटे में
एसडीएम राकेश गुप्ता का कहना है कि जिन पशु चिकित्सकों ने गायों का पोस्टमार्टम किया है, उनकी भी जांच कराई जाएगी। क्यों कि इस संबंध में विभागीय अफसरों एवं जिला प्रशासन को अवगत नहीं कराया गया है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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स्थिति यह है कि मौके पर पहुंचे एसडीएम राकेश गुप्ता व तहसीलदार सुरेंद्र बहादुर सिंह के सामने ही दो गायों की मौत हो गई। एसडीएम ने डेयरी प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
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शिखर दुग्ध डेयरी नई दिल्ली द्वारा शाहजहांपुर में खोली गई डेयरी में एक- एक कर हो रही गायों की मौत की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद शनिवार को एसडीएम राकेश गुप्ता व तहसीलदार सुरेंद्र बहादुर सिंह के अलावा पशु चिकित्सा विभाग की चार सदस्यीय टीम ने वहां पहुंच कर जांच की। अफसरों को डेयरी में 199 गाय मिलीं, जिनमें तीन मरणासन्न स्थिति में थीं।
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डेयरी में ब मुश्किल मात्र एक क्विंटल भूसा रखा मिला, वह भी खाने के लायक नहीं था। गायों के सामने भूसा अथवा चारा नहीं डाला गया था। गायों की स्थिति दयनीय थी।
यह देखकर एसडीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने वहीं से थाना प्रभारी शाहजहांपुर तथा पशु चिकित्साधिकारी मोंठ को टेलीफोन पर निर्देश दिए कि गायों को एक बाड़े में बांधकर भूखा रखना, मानक के अनुसार चारा, भूसा आदि न देना पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आता है। संबंधित कंपनी शिखर दुग्ध डेयरी नई दिल्ली के संचालकों तथा स्थानीय स्तर पर प्रबंधन देख रहे लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए तथा संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
एसडीएम ने पशु चिकित्साधिकारी से पूछा कि निजी कंपनी की मृत गायों का पोस्टमार्टम किसके निर्देश पर किया जाता है? अगर पोस्टमार्टम करना नैतिक ड्यूटी है तो यह भी देखा जाए कि गायों को भर पेट भोजन मिल रहा है या नहीं? हालत देख कर लग रहा है कि बीमा पाने के लिये जानबूझ कर गायों को भूखा रखा जा रहा है, जिससे उनकी मौत हो और कंपनी के लोग बीमा राशि प्राप्त कर लें? एसडीएम ने पशु चिकित्साधिकारी से कहा कि तत्काल विभागीय स्तर पर गायों को चारा एवं भूसा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
एसडीएम ने डेयरी पर काम देख रहे प्रेमनारायण झा, अतुल सक्सेना एवं ग्राम निवासी डेयरी के ट्रस्टी रामजी राजपूत से नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी हालत में गाय भूखी न रहें, उन्हें भूसा एवं चारा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। एसडीएम एवं तहसीलदार ने उन किसानों के भी बयान लिए, जिन्होंने पिछले साल कंपनी को अनुबंध के तहत भूसा, चारा उपलब्ध कराया था, लेकिन उन लोगों को पैसा नहीं मिला।
करीब दो दर्जन से अधिक किसानों ने बताया कि कंपनी पर दस लाख रुपये से अधिक बकाया है। डेयरी में काम करने वाले मजदूरों को भी मजदूरी नहीं मिली है। मजदूरों ने भी हजारों रुपये बकाया होने की शिकायत की।
जांच के बाद उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लखन लाल त्रिपाठी ने बताया कि डेयरी में न गायों के लिए शेड मानक के अनुसार है और न ही खाने का इंतजाम है। प्रबंधन की लापरवाही व पर्याप्त मात्रा में चारा व भूसा न मिलने के कारण गायों की मौत हो रही है।
तालाब के भराव क्षेत्र में डेयरी बना देने से गायों के भोजन के साथ लीवर फ्लू भी पहुंच रहे हैं, इस कारण भी वह कमजोर हो रही हैँ। उन्होंने बताया कि समय-समय पर गायों के स्वास्थ्य व खुराक के संबंध में सलाह दी गई पर डेयरी प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जांच टीम में उनके साथ डा. ए. के दौदेरिया, डा. राम सिंह व बालकृष्ण भी मौजूद रहे।
पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर भी आ सकते हैं लपेटे में
एसडीएम राकेश गुप्ता का कहना है कि जिन पशु चिकित्सकों ने गायों का पोस्टमार्टम किया है, उनकी भी जांच कराई जाएगी। क्यों कि इस संबंध में विभागीय अफसरों एवं जिला प्रशासन को अवगत नहीं कराया गया है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।