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नशा करने वाला ही नहीं पूरा परिवार हो रहा बर्बाद

Wed, 27 Mar 2019 01:10 AM IST
देवेंद्र कुमार अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: देवेंद्र कुमार Updated Wed, 27 Mar 2019 01:10 AM IST
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nsa karne bala hi nhi pura pariwar ho rha barwad
hospital, jhansi news - फोटो : demo
स्मैक, चरस के शौकीन लोग अपने साथ-साथ पूरे परिवार को बर्बाद कर रहे हैं। नौकरी-पेशा वाले भी पूरा पैसा स्मैक व चरस पर खर्च कर रहे हैं। परिवार के भरण-पोषण को एक रुपये भी उनके पास नहीं बच रहा है। वहीं, जो नशेबाज बेरोजगार होते हैं, वो घर की जरूरी चीजों, सोने-चांदी के आभूषणों को बेचकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं।
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महानगर में जगह-जगह पर फैला हुआ नशे का कारोबार बड़ा व्यापार का रूप ले चुका है। झांसी में गांजा, चरस के साथ बड़े पैमाने पर स्मैक की बिक्री हो रही है। युवा से लेकर अधेड़ तक इसकी चपेट में हैं। स्मैक, चरस, गांजा का नशा करने वाले  अपनी सेहत से खिलवाड़ तो कर ही रहे हैं, वहीं, उनका शौक परिवार पर भी काफी भारी पड़ रहा है। स्मैक समेत अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने के लिए नशेड़ी घर की वस्तुओं, आभूषणों तक को बेच दे रहे हैं। रोकटोक करने पर परिवार के साथ मारपीट और विवाद कर रहे हैं।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में बने पुनर्वास केंद्र में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। परिवारीजन डॉक्टरों से रो-रोकर नशा छुड़वाने तक की गुहार लगा रहे हैं। पुनर्वास केंद्र के समन्वयक डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि झांसी में स्मैक और चरस का लोग ज्यादा सेवन करते हैं। केंद्र में हर महीने पांच-छह मरीज स्मैक और इतने ही चरस छुड़वाने के लिए आ रहे हैं।
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शौक पूरा करने को जमीन तक बेच दी
समथर के बेलमा गांव में कई लोग स्मैक के लती हैं। यहां के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मानसिक रोग विभाग के पुनर्वास केंद्र में इसी गांव के 40 वर्षीय व्यक्ति को परिजन स्मैक की लत छुड़वाने के लिए इलाज करवाने लाए थे। परिजनों ने डॉक्टर को बताया कि स्मैक के चक्कर में वह व्यक्ति जमीन तक बेच चुका है। पहले खेती बाड़ी करता था लेकिन जब से नशे का शौक चढ़ा कुछ भी काम करना बंद कर दिया। नशे में आए दिन परिवार में झगड़ा और मारपीट करता है। केंद्र के चिकित्सक ने बताया कि व्यक्ति का छह माह तक इलाज किया गया। उसके बाद मरीज केंद्र आया ही नहीं।


कमाई कम पड़ गई तो बेचने लगा गहने
शहर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत रहने वाला 25 वर्षीय व्यापार करने वाले युवक को स्मैक की लत लग गई थी। वह व्यापार से होने वाली पूरी आय को स्मैक का सेवन करने में खर्च कर देता था। धीरे-धीरे उसका शौक इतना बढ़ गया कि कमाई तक कम पड़ने लगी। इसके बाद उसने घर पर रखे गहने तक बेचने शुरू कर दिए। घर वालों ने स्मैक पीने से रोका तो आए दिन झगड़ा करने लगा। रोज-रोज की विवाद से परेशान होकर घर वाले मेडिकल कॉलेज के पुनर्वास केंद्र लाए। डॉक्टरों ने बताया कि यहां युवक का चार-पांच महीने तक इलाज किया। दवाएं और काउंसलिंग करके नशे की लत से छुटकारा दिलाया।
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