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अब बिना दर्द के होगी नॉर्मल डिलीवरी, 20 फीसदी खून भी कम बहेगा
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब गर्भवती महिलाओं की बिना दर्द के नॉर्मल डिलीवरी हो सकेगी। डॉक्टरों की टीम ने शोध कार्य के दौरान दो इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया, जिसके लगने के बाद गर्भवती महिलाओं को दर्द नहीं हुआ और सामान्य प्रसव भी हो गया। यही नहीं, गर्भवतियों का 20 फीसदी खून भी कम बहा।
कई विकसित देशों में दर्द रहित सामान्य डिलीवरी होती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में भी कुछ बड़े शहरों में बिना दर्द के गर्भवतियों को सामान्य प्रसव कराया जाता है। मगर झांसी समेत बुंदेलखंड में नॉर्मल डिलीवरी कराने पर गर्भवती महिलाओं को काफी पीड़ा सहनी पड़ती है। लेकिन अब गर्भवतियों को ये कष्ट नहीं सहना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज में गायनी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. संजया शर्मा, उप प्राचार्य डॉ. अंशुल जैन, एनेस्थीसिया विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक मित्तल, सीनियर रेजिडेंट आकाशदीप ने शोध कार्य किया है। अस्पताल आईं 150 प्रसूताओं पर कम्बाइंड स्पाइनल एपीड्यूरल इंजेक्शन तकनीक का प्रयोग किया गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को बुपीवेकेन इंजेक्शन लगाया गया। इसके साथ ही कम मात्रा में फेंटानिल की भी डोज दी गई। इन इंजेक्शनों के लगने के बाद गर्भवती महिलाओं को दर्द नहीं हुआ। साथ ही उनमें सुन्नपन भी नहीं आया। आसानी से सामान्य डिलीवरी हो गई। ये शोधपत्र एनेस्थीसिया: ऐस्सेस एंड रिसर्चेस में प्रकाशित हुआ है।
इसलिए कम बहा खून
डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव के समय जब गर्भवती को दर्द होता है तो ब्लड प्रेशर और ह्रदय गति बढ़ जाती है। ऐसे में प्रसव के दौरान खून ज्यादा बहता है। जबकि, दर्द न होने से महिला का बीपी, ह्रदय गति नियंत्रित रहती है। इस वजह से शोध कार्य के दौरान गर्भवती महिलाओं का प्रसव के दौरान 20 प्रतिशत कम खून बहा। ये तकनीकी बुंदेलखंड की गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत मददगार साबित होगी, क्योंकि यहां पर प्रसव को आने वाली कई गर्भवतियों को हीमोग्लोबिन काफी कम रहता है। उन्हें रक्त भी चढ़ाना पड़ता है।
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कई विकसित देशों में दर्द रहित सामान्य डिलीवरी होती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में भी कुछ बड़े शहरों में बिना दर्द के गर्भवतियों को सामान्य प्रसव कराया जाता है। मगर झांसी समेत बुंदेलखंड में नॉर्मल डिलीवरी कराने पर गर्भवती महिलाओं को काफी पीड़ा सहनी पड़ती है। लेकिन अब गर्भवतियों को ये कष्ट नहीं सहना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज में गायनी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. संजया शर्मा, उप प्राचार्य डॉ. अंशुल जैन, एनेस्थीसिया विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक मित्तल, सीनियर रेजिडेंट आकाशदीप ने शोध कार्य किया है। अस्पताल आईं 150 प्रसूताओं पर कम्बाइंड स्पाइनल एपीड्यूरल इंजेक्शन तकनीक का प्रयोग किया गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को बुपीवेकेन इंजेक्शन लगाया गया। इसके साथ ही कम मात्रा में फेंटानिल की भी डोज दी गई। इन इंजेक्शनों के लगने के बाद गर्भवती महिलाओं को दर्द नहीं हुआ। साथ ही उनमें सुन्नपन भी नहीं आया। आसानी से सामान्य डिलीवरी हो गई। ये शोधपत्र एनेस्थीसिया: ऐस्सेस एंड रिसर्चेस में प्रकाशित हुआ है।
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इसलिए कम बहा खून
डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव के समय जब गर्भवती को दर्द होता है तो ब्लड प्रेशर और ह्रदय गति बढ़ जाती है। ऐसे में प्रसव के दौरान खून ज्यादा बहता है। जबकि, दर्द न होने से महिला का बीपी, ह्रदय गति नियंत्रित रहती है। इस वजह से शोध कार्य के दौरान गर्भवती महिलाओं का प्रसव के दौरान 20 प्रतिशत कम खून बहा। ये तकनीकी बुंदेलखंड की गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत मददगार साबित होगी, क्योंकि यहां पर प्रसव को आने वाली कई गर्भवतियों को हीमोग्लोबिन काफी कम रहता है। उन्हें रक्त भी चढ़ाना पड़ता है।
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