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अब माल भाड़े पर भी देना है टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jul 2017 01:02 AM IST
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- फोटो : demo
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जीएसटी के दायरे में ट्रांसपोर्टर भी आ गए हैं। पहले ट्रांसपोर्ट से माल मंगाने पर टैक्स नहीं लगता था, लेकिन अब जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी से माल मंगाने वाले व्यापारी को भाड़े पर भी टैक्स देना है। यदि ट्रांसपोर्टर अपंजीकृत व्यापारी का माल लाता है तो उसे यह टैक्स खुद जमा करना पड़ेगा।
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद भी अभी भी व्यापारी कई नियमों की से अनभिज्ञ है। जीएसटी में व्यवस्था की गई है कि पंजीकृत कारोबारी अथवा सरकारी और अर्द्ध सरकारी विभाग ट्रांसपोर्ट के जरिये किसी पंजीकृत व्यापारी को माल पहुंचाते हैं तो माल खरीदने वाले व्यापारी को भाड़े पर रिवर्स टैक्स देना है। इस व्यवस्था में दोनों बेचने और खरीदने वाले दोनों पंजीकृत होना चाहिए। यदि ट्रांसपोर्टर किसी अपंजीकृत कारोबारी का माल लाता है तो यह टैक्स ट्रांसपोर्टर को ही भरना है। मालूम हो कि, पूर्व में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी। इतना जरूर था कि अगर सचल दल ट्रांसपोर्टर के पास से टैक्स चोरी का माल पकड़ लेते थे तो जुर्माना ट्रांसपोर्टर को भरना पड़ता था।
वाणिज्य कर विभाग के हेल्प डेस्क प्रभारी सहायक कमिश्नर अभिषेक गुप्ता ने बताया कि नियम का पालन नप करने वाले व्यापारियों को जुर्माना भरना होगा।
इनसे लें मदद
वाणिज्य कर कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। डेस्क पर सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक सहायक कमिश्नर आशीष सक्सेना (मोबाइल नंबर 7235002636), सीटीओ जयप्रकाश (7235002667) और दोपहर दो से रात आठ बजे तक सहायक कमिश्नर रमेश चंद्र पांडे (7235002634) और सीटीओ असीम राजपूत (7235002666) बैठ रहे हैं। इन अधिकारियों के मोबाइल नंबर के अलावा 0510-2370922 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
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जीएसटी के दायरे में ट्रांसपोर्टर भी आ गए हैं। पहले ट्रांसपोर्ट से माल मंगाने पर टैक्स नहीं लगता था, लेकिन अब जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी से माल मंगाने वाले व्यापारी को भाड़े पर भी टैक्स देना है। यदि ट्रांसपोर्टर अपंजीकृत व्यापारी का माल लाता है तो उसे यह टैक्स खुद जमा करना पड़ेगा।
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद भी अभी भी व्यापारी कई नियमों की से अनभिज्ञ है। जीएसटी में व्यवस्था की गई है कि पंजीकृत कारोबारी अथवा सरकारी और अर्द्ध सरकारी विभाग ट्रांसपोर्ट के जरिये किसी पंजीकृत व्यापारी को माल पहुंचाते हैं तो माल खरीदने वाले व्यापारी को भाड़े पर रिवर्स टैक्स देना है। इस व्यवस्था में दोनों बेचने और खरीदने वाले दोनों पंजीकृत होना चाहिए। यदि ट्रांसपोर्टर किसी अपंजीकृत कारोबारी का माल लाता है तो यह टैक्स ट्रांसपोर्टर को ही भरना है। मालूम हो कि, पूर्व में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी। इतना जरूर था कि अगर सचल दल ट्रांसपोर्टर के पास से टैक्स चोरी का माल पकड़ लेते थे तो जुर्माना ट्रांसपोर्टर को भरना पड़ता था।
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वाणिज्य कर विभाग के हेल्प डेस्क प्रभारी सहायक कमिश्नर अभिषेक गुप्ता ने बताया कि नियम का पालन नप करने वाले व्यापारियों को जुर्माना भरना होगा।
इनसे लें मदद
वाणिज्य कर कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। डेस्क पर सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक सहायक कमिश्नर आशीष सक्सेना (मोबाइल नंबर 7235002636), सीटीओ जयप्रकाश (7235002667) और दोपहर दो से रात आठ बजे तक सहायक कमिश्नर रमेश चंद्र पांडे (7235002634) और सीटीओ असीम राजपूत (7235002666) बैठ रहे हैं। इन अधिकारियों के मोबाइल नंबर के अलावा 0510-2370922 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
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