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जेल की रसोई में अब मशीनों से बनेगा कैदियों का खाना

Tue, 04 Jan 2022 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jan 2022 12:45 AM IST
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Now the food of prisoners will be made with machines in the kitchen of the jail
झांसी। जिला कारागार की रसोई को आधुनिक बनाया जाएगा। खाना बनाने के लिए यहां आधुनिक मशीनें लगेंगी। इनमें हाथ के बजाय मशीनों से खाना तैयार होगा। नई पाकशाला की स्थापना अगले दो माह के भीतर पूरी कर लिए जाने की उम्मीद है।
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जिला कारागार में रोजाना करीब 1500 लोगों के लिए दोनों पालियों की रसोई तैयार होती है। अभी रोटी, सब्जी, दाल आदि बनाने में कैदियों की मदद ली जाती थी लेकिन, मैनुअल होने की वजह से इसमें काफी समय लगता है। प्रत्येक पाली का भोजन तैयार करने में करीब पचास कैदियों को जुटना पड़ता है। अब जेल प्रशासन इसमें सुधार करने की कवायद में कर रहा है। इसके लिए रसोईघर का आधुनिकीकरण कराया जा रहा है। जेल के भीतर पुराने गोदाम को तोड़कर 350 वर्ग मीटर के बड़े हिस्से में विशाल रसोई घर तैयार होगा। इस नई रसोई घर में पचास से अधिक लोग एक साथ काम कर सकते हैं। यहां रोटी बनाने के लिए दो बड़ी रोटी मेकर मशीनें लगेंगी। आटा गूंथने की मशीन अलग होगी। लोई काटने का काम भी मशीन से ही होगा। सब्जी कटर से सब्जी कटेगी। दाल एवं चावल पकाने के लिए तीन नए बड़े बर्नर लगेंगे। कोरोना महामारी को देखते हुए नई पाकशाला में हाइजीन का भी विशेष ख्याल रखा जाएगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल के मुताबिक जमीन आदि चिह्नित कर ली गई है। यह कार्य नए वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उनका कहना है कि इसकी जरुरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। खाना तैयार होने में लगने वाले समय में भी कटौती होगी।
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छह घंटे में तैयार होती है एक टाइम की रसोई
कारागार में रोजाना करीब पंद्रह सौ लोगों के लिए दोनों टाइम का खाना पकता है। इसे अभी मैनुअल तरीके से बनाया जाता है। जेल अफसरों का कहना है इतने लोगों की रसोई तैयार करने में करीब छह घंटे लगता है। समय पर खाना तैयार करने के लिए सुबह चार बजे से इसका काम शुरू करा दिया जाता है। 10 बजे तक खाना बनता है। शाम की पाली का खाना दोपहर तीन बजे से बनना आरंभ हो जाता है। मशीनों के इस्तेमाल से करीब 50 प्रतिशत समय कम हो जाएगा। कोरोना काल में मशीनों के इस्तेमाल से साफ-सुथरा कैदियों को मुहैया होगा। जेल में रोटी फुलाने के लिए नारियल की झाड्ू का इस्तेमाल होता था। अब रोटियां सिर्फ मशीनों से ही बनाई जाएंगी।
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