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अब जल्द दूर होगा पीलिया, तीन नए वेंटिलेटर से बढ़ेगी सुविधा

Mon, 28 Dec 2020 12:56 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2020 12:56 AM IST
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Now start joindish treatment child, three ventiletter manchine find
मेडिकल कॉलेज की न्यू बॉर्न सिक केयर यूनिट में बच्चों का चल रहा उपचार। - फोटो : REPORTERS
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में न्यू बॉर्न सिक केयर यूनिट (एसएनसीयू) को और आधुनिक बनाया जाएगा। यहां कई आधुनिक मशीनें आएंगी। पीलिया से छुटकारा पहले की तुलना में आधे समय में मिल जाएगा। इसके अलावा 18 बेड और चार नए वेंटिलेटर भी बढ़ेंगे। इससे झांसी ही नहीं, पूरे बुंदेलखंड के मरीजों को राहत मिलेगी।
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एसएनसीयू में पीलिया, कम विकसित फेफड़े, सांस की समस्या, देर से रोना, कम वजन, दौरे, संक्रमण होने, प्री मेच्योर समेत विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित नवजात बच्चों को भर्ती किया जाता है। झांसी के अलावा ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा समेत पूरे बुंदेलखंड के मरीज यहां भर्ती होते हैं। अभी यहां पर 18 बेड हैं और किसी-किसी दिन तो 50 मरीज को भर्ती करना पड़ता है। ऐसे में यहां पर बेड की संख्या बढ़ाने का प्रयास लंबे समय से चल रहा था। अब 18 बेड बढ़ाने और आधुनिक मशीनें खरीदने की अनुमति मिल गई है। यहां पर बेराफोन मशीन आएगी, जिससे बच्चों की श्रवण शक्ति की जांच की जाएगी। दरअसल, गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को ज्यादा दिन तक वेंटिलेटर पर रखने, एंटीबायोटिक आदि चलाने के कारण श्रवण शक्ति पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
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अब बेराफोन मशीन से तीन महीने तक स्क्रीनिंग की जाती रहेगी। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत उपचार शुरू हो सकेगा। वहीं, इंफ्यूजन पंप के जरिए सटीक मात्रा में दवाएं पहुंच सकेंगी। रेडिएंट वार्मर और आएंगे, जिससे नवजात बच्चे को जांच आदि कराने के लिए जाना पड़े तो शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा। एंटीबायोटिक के मिश्रण के दौरान संक्रमण जाने की आशंका कम रहे, इसके लिए लैमिनर एयर फ्लो सिस्टम मददगार साबित होगा। ठंड के दौरान जांच आदि के लिए नवजात को ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर के जरिए भेजा जा सकेगा, ताकि बच्चे के शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। मल्टीपैरा मॉनीटर के जरिए बीपी, पल्स, ऑक्सीजन आदि का पता चलता रहेगा। तुरंत पीलिया की जांच के लिए एलईडी फोटोथेरेपी मशीन आ रही है। इससे एक-दो दिन में ही छुट्टी कर दी जाएगी। ट्यूबलाइट और सीएफएल मशीन से पहले छह से सात दिन लगते थे। इससे बच्चे को गर्माहट भी नहीं होगी। खास बात ये है कि चार वेंटिलेटर भी बढ़ेंगे।
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डीआईसी बिल्डिंग के नीचे बनेगा वार्ड
एसएनसीयू की विस्तार डीआईसी बिल्डिंग में किया जाएगा। बिल्डिंग के नीचे 18 बेड का वार्ड तैयार होगा। यह इसलिए भी राहत भरा होगा कि लेबर रूम के ठीक बगल में बना हुआ है। इसके अलावा इमरजेंसी भी पास ही है। ऐसे में नवजात को लाने में देरी भी नहीं होगी।
आप भी कर सकते हैं मदद
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि नवजात बच्चों के इलाज को और सुलभ बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्था या कोई भी आम व्यक्ति मदद कर सकता है। मदद को इच्छुक व्यक्ति बाल रोग विभाग के अधिकारियों से मिलकर जरूरी संसाधन उपलब्ध करा सकता है।

डीआईसी बिल्डिंग के नीचे एसएनसीयू का 18 बेड का अलग वार्ड बनाया जाएगा। वहीं, एसएनसीयू के लिए कई नई आधुनिक मशीनें खरीदने की भी स्वीकृति मिल चुकी है। यहां पर चार वेंटिलेटर समेत बेराफोन, रेडिएंट वार्मर, इंफ्यूजन पंप, लैमिनर एयर फ्लो सिस्टम, ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर, मल्टीपैरा मॉनीटर, एलईडी फोटोथेरेपी समेत कई मशीनें आएंगी। इससे बुंदेलखंड के मरीजों को सुलभ इलाज मिल सकेगा। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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