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अब पीएचडी की फर्जी डिग्री थमाई
ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2015 01:34 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की एक और फर्जी डिग्री का मामला सामने आया है। जालसाजों ने इस बार पीएचडी की फर्जी डिग्री बांटी है। मामले का खुलासा होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री बनाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। एक नए मामले में जालसाजों ने कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले छात्र को फर्जी डिग्री थमा दी। विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस विभाग के शिक्षक डॉ. सीबी सिंह के निर्देशन में छात्र को पीएचडी करने की बात दर्शाई गई है।
इसका खुलासा तब हुआ जब छात्र ने खुद ही डिग्री में दीक्षांत समारोह की तिथि अंकित न होने पर डॉ. सिंह को पत्र लिख दिया। छात्र ने शिक्षक से समारोह की तारीख उपलब्ध कराने की मांग की है। जैसे ही यह पत्र शिक्षक को प्राप्त हुआ वह भौचक्के रह गए। उन्होंने इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष प्रो. एमएल मौर्या को दी।
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विभागाध्यक्ष ने पूरे प्रपत्र देखने के बाद कार्रवाई के लिए कुलपति के पास भेज दिया। डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि वह उक्त छात्र के गाइड कभी नहीं बने। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है।
आरडीसी से लेकर पंजीकरण तक
पीएचडी डिग्री के इस फर्जीवाड़े में छात्र को ‘थाली’ में करीब-करीब सब कुछ ‘परोसा’ गया है। इकोनॉमिक्स विषय में यह फर्जी डिग्री है। छात्र द्वारा भेजे गए प्रपत्रों में आरडीसी की मीटिंग, सदस्यों की लिस्ट से लेकर पंजीकरण संख्या तक का उल्लेख है। प्रपत्रों में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति, कुलसचिव की मुहर लगी हुई है।
मिला सुराग, खुल सकता है राज
फर्जी पीएचडी की डिग्री लेने वाले छात्र ने जो पत्र इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस विभाग के शिक्षक को भेजा है, उसमें पते का भी जिक्र किया गया है। बीयू अधिकारियों का कहना है कि अब पुलिस की मदद से पते के आधार पर छात्र को दबोचा जाएगा। एक बार अगर छात्र हिरासत में आ गया तो वह कई राज उगल सकता है और फर्जी डिग्री बनाने वाले रैकेट का खुलासा हो सकता है।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री बनाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। एक नए मामले में जालसाजों ने कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले छात्र को फर्जी डिग्री थमा दी। विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस विभाग के शिक्षक डॉ. सीबी सिंह के निर्देशन में छात्र को पीएचडी करने की बात दर्शाई गई है।
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इसका खुलासा तब हुआ जब छात्र ने खुद ही डिग्री में दीक्षांत समारोह की तिथि अंकित न होने पर डॉ. सिंह को पत्र लिख दिया। छात्र ने शिक्षक से समारोह की तारीख उपलब्ध कराने की मांग की है। जैसे ही यह पत्र शिक्षक को प्राप्त हुआ वह भौचक्के रह गए। उन्होंने इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष प्रो. एमएल मौर्या को दी।
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विभागाध्यक्ष ने पूरे प्रपत्र देखने के बाद कार्रवाई के लिए कुलपति के पास भेज दिया। डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि वह उक्त छात्र के गाइड कभी नहीं बने। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है।
आरडीसी से लेकर पंजीकरण तक
पीएचडी डिग्री के इस फर्जीवाड़े में छात्र को ‘थाली’ में करीब-करीब सब कुछ ‘परोसा’ गया है। इकोनॉमिक्स विषय में यह फर्जी डिग्री है। छात्र द्वारा भेजे गए प्रपत्रों में आरडीसी की मीटिंग, सदस्यों की लिस्ट से लेकर पंजीकरण संख्या तक का उल्लेख है। प्रपत्रों में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति, कुलसचिव की मुहर लगी हुई है।
मिला सुराग, खुल सकता है राज
फर्जी पीएचडी की डिग्री लेने वाले छात्र ने जो पत्र इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस विभाग के शिक्षक को भेजा है, उसमें पते का भी जिक्र किया गया है। बीयू अधिकारियों का कहना है कि अब पुलिस की मदद से पते के आधार पर छात्र को दबोचा जाएगा। एक बार अगर छात्र हिरासत में आ गया तो वह कई राज उगल सकता है और फर्जी डिग्री बनाने वाले रैकेट का खुलासा हो सकता है।