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अब मेडिकल कॉलेज में नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी
Wed, 24 Apr 2019 01:06 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 24 Apr 2019 01:06 AM IST
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- फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब ऑक्सीजन की कमी से मरीजों को जूझना नहीं पड़ेगा। एक-दो दिन में कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाएगा। इसके लिए 12 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्लांट में एक महीने तक के लिए जरूरी गैस रिजर्व में रहेगी।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में 50 बच्चों समेत 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह ऑक्सीजन खत्म होना बताया गया था। इस पर तत्काल योगी सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का आदेश जारी कर दिया था। टेंडर के बाद मेडिकल कॉलेज में प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ। अब यह काम पूरा हो गया है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के लिए एक महीने तक के लिए जरूरी 20 हजार किलो ऑक्सीजन भी उपलब्ध करा दी गई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि एक-दो दिन में लिक्विड गैस प्लांट से अलग-अलग विभागों में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। जापान की कंपनी ने प्लांट तैयार किया है। कंपनी का हेड क्वार्टर कलकत्ता में है। ऐसे में कंपनी को जीपीएस के जरिए ऑक्सीजन की खपत की जानकारी मिलती रहेगी। जैसे ही ऑक्सीजन की कमी होगी, कंपनी कलकत्ता से ऑक्सीजन भेज देगी। कंपनी का इंजीनियर कॉलेज के 12 कर्मचारियों को प्लांट से संबंधित प्रशिक्षण दे रहा है। सीएमएस ने बताया कि सिलेंडर की तुलना में प्लांट से गैस सस्ती पड़ रही है।
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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में 50 बच्चों समेत 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह ऑक्सीजन खत्म होना बताया गया था। इस पर तत्काल योगी सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का आदेश जारी कर दिया था। टेंडर के बाद मेडिकल कॉलेज में प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ। अब यह काम पूरा हो गया है।
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वहीं, मेडिकल कॉलेज के लिए एक महीने तक के लिए जरूरी 20 हजार किलो ऑक्सीजन भी उपलब्ध करा दी गई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि एक-दो दिन में लिक्विड गैस प्लांट से अलग-अलग विभागों में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। जापान की कंपनी ने प्लांट तैयार किया है। कंपनी का हेड क्वार्टर कलकत्ता में है। ऐसे में कंपनी को जीपीएस के जरिए ऑक्सीजन की खपत की जानकारी मिलती रहेगी। जैसे ही ऑक्सीजन की कमी होगी, कंपनी कलकत्ता से ऑक्सीजन भेज देगी। कंपनी का इंजीनियर कॉलेज के 12 कर्मचारियों को प्लांट से संबंधित प्रशिक्षण दे रहा है। सीएमएस ने बताया कि सिलेंडर की तुलना में प्लांट से गैस सस्ती पड़ रही है।
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