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अब प्रसाधन केंद्र पर पड़े भ्रष्टाचार के छींटे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2016 02:00 AM IST
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b u jhansi news
- फोटो : demopic
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झांसी। बायोमेडिकल साइंस विभाग के भवन में छात्र-छात्राओं के लिए हाल ही में बनकर तैयार हुए प्रसाधन केंद्र पर भ्रष्टाचार के छींटे पड़ गए हैं। निर्माण कार्य में लोकल सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए जेई ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय अधिकारियों से की है।
जेई ने नवनिर्मित प्रसाधन केंद्र की गुणवत्ता की जांच के बाद कुलसचिव और वित्त अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। उनका आरोप है कि जांच में केंद्र में उपयोग की गई टाइल्स लोक निर्माण विभाग की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। प्रतिष्ठित कंपनियों के बजाए पर घटिया क्वालिटी के टाइल्स लगाए गए हैं। इसके अलावा सीवेज के ड्रेन को जो पीवीसी पाइप का लगाया गया है, वह भी लोकल है। जेई के मुताबिक ठेकेदार को घटिया सामग्री लगाने को मना किया गया लेकिन उन्हें बाईपास कर कार्य कराया लिया गया। यहीं नहीं, पत्रावली मांगने पर नहीं उपलब्ध कराई गई। अन्य सामग्री भी घटिया कंपनी की लगाई गई हैं।
जेई का आरोप है कि इस्टीमेट वाली फाइल पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कराकर कार्य पूर्ण कराया गया है। जेई ने बीयू अधिकारियों से पुन: गुणवत्ता के अनुसार कार्य होने तक भुगतान रोकने व फर्जी हस्ताक्षर करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कुलसचिव वीएन सिंह का कहना है कि मामले संज्ञान में आ गया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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जेई ने नवनिर्मित प्रसाधन केंद्र की गुणवत्ता की जांच के बाद कुलसचिव और वित्त अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। उनका आरोप है कि जांच में केंद्र में उपयोग की गई टाइल्स लोक निर्माण विभाग की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। प्रतिष्ठित कंपनियों के बजाए पर घटिया क्वालिटी के टाइल्स लगाए गए हैं। इसके अलावा सीवेज के ड्रेन को जो पीवीसी पाइप का लगाया गया है, वह भी लोकल है। जेई के मुताबिक ठेकेदार को घटिया सामग्री लगाने को मना किया गया लेकिन उन्हें बाईपास कर कार्य कराया लिया गया। यहीं नहीं, पत्रावली मांगने पर नहीं उपलब्ध कराई गई। अन्य सामग्री भी घटिया कंपनी की लगाई गई हैं।
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जेई का आरोप है कि इस्टीमेट वाली फाइल पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कराकर कार्य पूर्ण कराया गया है। जेई ने बीयू अधिकारियों से पुन: गुणवत्ता के अनुसार कार्य होने तक भुगतान रोकने व फर्जी हस्ताक्षर करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कुलसचिव वीएन सिंह का कहना है कि मामले संज्ञान में आ गया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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