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अब ‘ब्लैंक पेपर’ पर नहीं मिलेगी एसी का ‘टिकट’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:46 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी।
रेलवे ने अब एसी कोचों में जर्नी ब्रेक करने पर मिलने वाले ब्लैंक पेपर टिकट (बीपीटी) की सुविधा को समाप्त कर दिया है। यह व्यवस्था खत्म होने से अब यात्रियों को दो अलग-अलग टिकट बनवाकर यात्रा करनी होगी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त चार्ज देना पड़ेगा। हालांकि ब्लैक पेपर टिकट की सुविधा स्लीपर क्लास के यात्रियों के लिए मिलती रहेगी।
झांसी से गुवाहाटी के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। गुवाहाटी जाने के लिए पहले यात्री को झांसी इलाहाबाद जाना पड़ेगा और वहां जर्नी ब्रेक कर दूसरी ट्रेन पकड़नी पड़ेगी। अभी तक होता यह था कि यात्री झांसी से ही गुवाहाटी तक पूरी दूरी का आरक्षित टिकट बनवा लेता था। इससे झांसी से इलाहाबाद तक जाने वाली ट्रेन के टिकट में ही गुवाहाटी तक का पूरा किराया जुड़कर आ जाता था और इलाहाबाद से जो ट्रेन पकड़नी है उसका जीरो राशि पर ब्लैंक पेपर टिकट बन जाता था। इससे यात्री को अलग-अलग किलोमीटर के दो टिकट नहीं बनवाने पड़ते थे और एक साथ पूरे किलोमीटर का टिकट बनने से फायदा भी बहुत हो जाता था। एक अनुमान के हिसाब से झांसी से गुवाहाटी तक दो अलग-अलग टिकट बनवाने पर अगर दो हजार रुपये किराया पड़ता है तो बीपीटी टिकट में करीब तीन सौ रुपये की बचत हो जाती थी। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया एक जुलाई से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
एक जुलाई से पहले के टिकट मोडीफाइड नहीं होगी
जीएसटी का असर आरक्षित टिकटों में मिलने वाली मोडीफाइड सुविधा पर भी पड़ा है। रेलवे एक जुलाई से पहले बने आरक्षित टिकटों पर मोडीफाइड की सुविधा भी नहीं दे रहा है। बता दें कि आरक्षित टिकट बनने के बाद अगर कोई यात्री यात्रा तिथि में परिवर्तन कराना चाहता है तो वह मोडीफाइड टिकट सुविधा का लाभ लेकर रुपये बचा सकता है। इस सुविधा में प्रति यात्री 20 रुपये ही कटते है। जबकि, कोई यात्री टिकट निरस्त कराके दूसरा बनवाता है तो स्लीपर क्लास के कंफर्म टिकट पर प्रति यात्री 120 और एसी क्लास में 195 रुपये कटते हैं। वेटिंग टिकट पर स्लीपर क्लास में प्रति यात्री 60 और एसी में 90 रुपये कटते हैं।
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रेलवे ने अब एसी कोचों में जर्नी ब्रेक करने पर मिलने वाले ब्लैंक पेपर टिकट (बीपीटी) की सुविधा को समाप्त कर दिया है। यह व्यवस्था खत्म होने से अब यात्रियों को दो अलग-अलग टिकट बनवाकर यात्रा करनी होगी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त चार्ज देना पड़ेगा। हालांकि ब्लैक पेपर टिकट की सुविधा स्लीपर क्लास के यात्रियों के लिए मिलती रहेगी।
झांसी से गुवाहाटी के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। गुवाहाटी जाने के लिए पहले यात्री को झांसी इलाहाबाद जाना पड़ेगा और वहां जर्नी ब्रेक कर दूसरी ट्रेन पकड़नी पड़ेगी। अभी तक होता यह था कि यात्री झांसी से ही गुवाहाटी तक पूरी दूरी का आरक्षित टिकट बनवा लेता था। इससे झांसी से इलाहाबाद तक जाने वाली ट्रेन के टिकट में ही गुवाहाटी तक का पूरा किराया जुड़कर आ जाता था और इलाहाबाद से जो ट्रेन पकड़नी है उसका जीरो राशि पर ब्लैंक पेपर टिकट बन जाता था। इससे यात्री को अलग-अलग किलोमीटर के दो टिकट नहीं बनवाने पड़ते थे और एक साथ पूरे किलोमीटर का टिकट बनने से फायदा भी बहुत हो जाता था। एक अनुमान के हिसाब से झांसी से गुवाहाटी तक दो अलग-अलग टिकट बनवाने पर अगर दो हजार रुपये किराया पड़ता है तो बीपीटी टिकट में करीब तीन सौ रुपये की बचत हो जाती थी। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया एक जुलाई से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
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एक जुलाई से पहले के टिकट मोडीफाइड नहीं होगी
जीएसटी का असर आरक्षित टिकटों में मिलने वाली मोडीफाइड सुविधा पर भी पड़ा है। रेलवे एक जुलाई से पहले बने आरक्षित टिकटों पर मोडीफाइड की सुविधा भी नहीं दे रहा है। बता दें कि आरक्षित टिकट बनने के बाद अगर कोई यात्री यात्रा तिथि में परिवर्तन कराना चाहता है तो वह मोडीफाइड टिकट सुविधा का लाभ लेकर रुपये बचा सकता है। इस सुविधा में प्रति यात्री 20 रुपये ही कटते है। जबकि, कोई यात्री टिकट निरस्त कराके दूसरा बनवाता है तो स्लीपर क्लास के कंफर्म टिकट पर प्रति यात्री 120 और एसी क्लास में 195 रुपये कटते हैं। वेटिंग टिकट पर स्लीपर क्लास में प्रति यात्री 60 और एसी में 90 रुपये कटते हैं।
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