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कैंसर ही नहीं, तंबाकू के सेवन से दिल भी कमजोर होता, गर्भधारण में आती दिक्कत
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झांसी। आमतौर पर लोगों को लगता है कि तंबाकू का सेवन करने से सिर्फ कैंसर होता है। मगर इससे दिल की बीमारियां होने से लेकर महिलाओं को गर्भधारण करने तक में दिक्कत आती है। झांसी समेत बुंदेलखंड में पुरुषों के अलावा कई महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं। ऐसे में उन्हें इससे बचना चाहिए।
तंबाकू में निकोटीन होता है। मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गौतम ने बताया कि कई महिलाओं के गर्भधारण न कर पाने की अहम वजह तंबाकू का सेवन होता है। तंबाकू खाने और धूम्रपान करने वाली महिलाओं के प्रजनन प्रणाली में दिक्कत आ जाती है। इसका सेवन शुक्राणु में डीएनए को भी प्रभावित करता है। यदि महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं तो कइयों की प्री मैच्योर डिलीवरी हो जाती है। जिनके नौ महीने में बच्चे होते हैं, उनका वजन कम रह जाता है। वहीं, फिजीशियन डॉ. रजत जैन ने बताया कि तंबाकू अथवा धूम्रपान दिल और शरीर की खून की नलियों को सिकोड़ व सख्त कर देता है। इससे खून का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता है। हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। साथ ही पैरों में गैंगरीन की बीमारी भी हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में हर महीने 50 फीसदी यानी 40 से 45 मरीजों में हार्ट अटैक और लकवा होने की वजह तंबाकू या धूम्रपान का सेवन करना मिलता है।
60 फीसदी कैंसर रोगी मुख्य और फेफड़े के
मेडिकल कॉलेज इस साल कैंसर के 281 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ है। रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि इनमें फेफड़े और मुख कैंसर के ही 60 प्रतिशत रोगी हैं। कॉलेज में इन मरीजों की कीमोथेरेपी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर कैंसर की सर्जरी भी होती है।
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तंबाकू में निकोटीन होता है। मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गौतम ने बताया कि कई महिलाओं के गर्भधारण न कर पाने की अहम वजह तंबाकू का सेवन होता है। तंबाकू खाने और धूम्रपान करने वाली महिलाओं के प्रजनन प्रणाली में दिक्कत आ जाती है। इसका सेवन शुक्राणु में डीएनए को भी प्रभावित करता है। यदि महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं तो कइयों की प्री मैच्योर डिलीवरी हो जाती है। जिनके नौ महीने में बच्चे होते हैं, उनका वजन कम रह जाता है। वहीं, फिजीशियन डॉ. रजत जैन ने बताया कि तंबाकू अथवा धूम्रपान दिल और शरीर की खून की नलियों को सिकोड़ व सख्त कर देता है। इससे खून का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता है। हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। साथ ही पैरों में गैंगरीन की बीमारी भी हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में हर महीने 50 फीसदी यानी 40 से 45 मरीजों में हार्ट अटैक और लकवा होने की वजह तंबाकू या धूम्रपान का सेवन करना मिलता है।
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60 फीसदी कैंसर रोगी मुख्य और फेफड़े के
मेडिकल कॉलेज इस साल कैंसर के 281 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ है। रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि इनमें फेफड़े और मुख कैंसर के ही 60 प्रतिशत रोगी हैं। कॉलेज में इन मरीजों की कीमोथेरेपी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर कैंसर की सर्जरी भी होती है।
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