{"_id":"57b8b22f4f1c1bff136ec203","slug":"not-accept-to-go-to-jail","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल जाना स्वीकार नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेल जाना स्वीकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2016 01:10 AM IST
विज्ञापन
busnismn metting, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। वाणिज्य कर कार्यालय में शनिवार को जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापारियों ने अपने सुझाव रखे।
वाणिज्य कर सभागार में आयोजित कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर व एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू (अपील) रवि सेठ ने जीएसटी की बारीकियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे जोनल कमिश्नर एम एल गुप्ता ने व्यापारियों से सुझाव मांगे।
इस दौरान उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल से अध्यक्ष संजय पटवारी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की तरफ से महानगर अध्यक्ष रामतीर्थ सिंघल, संजय सर्राफ, बृज बिहारी सोनी, प्रमोद अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, पुनीत अग्रवाल, राजेश शर्मा, सुनील अग्रवाल, उमेश गुप्ता, राजेश शर्मा, विनीत अग्रवाल, रामजी खरया, , संतोष साहू, शैलेंद्र जैन, मान सिंह यादव, जीतेश हयारण, विजय गुप्ता मौजूद थे। कार्यशाला में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू दयाशंकर तिवारी, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) शशांक शेखर मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी एवं प्रवर्तन) रमेश चंद्र राजपूत, सरिता सिंह अधिकारी मौजूद थे।
सुझाव
------
- मामूली गलतियों में व्यापारियों को जेल भेजने का नियम खत्म करें। सिर्फ अर्थ दंड लगे।
- अभी लघु उद्योगों में डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं देना है। मगर, इसमें दस लाख रुपये तक की सीमा है। इस सीमा को बढ़ाकर डेढ़ करोड़ कर दिया जाए।
विज्ञापन
-रिटर्न दाखिल करने और टैक्स जमा करने आदि का इंतजाम ऑन लाइन के साथ ही मैन्यूअली भी हो।
- आईटीसी क्लेम का भुगतान तत्काल हो।
- रजिस्ट्रेशन के लिए टर्नओवर की न्यूनतम सीमा 25 लाख रुपये वार्षिक हो।
- व्यापारी का वार्षिक एसेसमेंट किसी एक ही विभाग में हो।
- मंडी शुल्क को समाप्त कर इसे भी जीएसटी में समाहित करें।
- पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी में शामिल किया जाए।
- तंबाकू एवं तंबाकू उत्पाद भी शामिल हो।
- व्यापारी कल्याण कोष की स्थापना हो।
विज्ञापन
वाणिज्य कर सभागार में आयोजित कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर व एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू (अपील) रवि सेठ ने जीएसटी की बारीकियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे जोनल कमिश्नर एम एल गुप्ता ने व्यापारियों से सुझाव मांगे।
इस दौरान उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल से अध्यक्ष संजय पटवारी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की तरफ से महानगर अध्यक्ष रामतीर्थ सिंघल, संजय सर्राफ, बृज बिहारी सोनी, प्रमोद अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, पुनीत अग्रवाल, राजेश शर्मा, सुनील अग्रवाल, उमेश गुप्ता, राजेश शर्मा, विनीत अग्रवाल, रामजी खरया, , संतोष साहू, शैलेंद्र जैन, मान सिंह यादव, जीतेश हयारण, विजय गुप्ता मौजूद थे। कार्यशाला में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू दयाशंकर तिवारी, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) शशांक शेखर मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी एवं प्रवर्तन) रमेश चंद्र राजपूत, सरिता सिंह अधिकारी मौजूद थे।
विज्ञापन
सुझाव
------
- मामूली गलतियों में व्यापारियों को जेल भेजने का नियम खत्म करें। सिर्फ अर्थ दंड लगे।
- अभी लघु उद्योगों में डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं देना है। मगर, इसमें दस लाख रुपये तक की सीमा है। इस सीमा को बढ़ाकर डेढ़ करोड़ कर दिया जाए।
विज्ञापन
-रिटर्न दाखिल करने और टैक्स जमा करने आदि का इंतजाम ऑन लाइन के साथ ही मैन्यूअली भी हो।
- आईटीसी क्लेम का भुगतान तत्काल हो।
- रजिस्ट्रेशन के लिए टर्नओवर की न्यूनतम सीमा 25 लाख रुपये वार्षिक हो।
- व्यापारी का वार्षिक एसेसमेंट किसी एक ही विभाग में हो।
- मंडी शुल्क को समाप्त कर इसे भी जीएसटी में समाहित करें।
- पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी में शामिल किया जाए।
- तंबाकू एवं तंबाकू उत्पाद भी शामिल हो।
- व्यापारी कल्याण कोष की स्थापना हो।