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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में आंख के ड्रॉप न शुगर की दवा
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झांसी। मेडिकल कॉलेज में जीवनरक्षक दवा की बात तो दूर आंखों की ड्राप, शुगर की दवा और इंसुलिन तक नहीं। विटामिन-के और विटामिन बी-12 तक की दवाओं का संकट है। ऐसे में ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही रैं। इसकी वजह उप्र. मेडिकल सप्लाई काॅरपोरेशन से पर्याप्त दवाओं की आपूर्ति नहीं होना है। इसका दंश गंभीर रोगियों को झेलना पड़ रहा है। मौजूदा स्थिति में मेडिकल कॉलेज में सीएमसी और मॉक्सीक्लेब आई ड्रॉप तक नहीं हैं। मेटफार्मिन, इंसुलिन 30/70, इंसुलिन-आर, इंसुलिन ग्लारजिम नहीं हैं। इस वजह से शुगर के रोगियों को डॉक्टर दवा तो लिख रहे हैं, उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
दर्द से राहत का इंजेक्शन भी नहीं
एंटीबायोटिक इंजेक्शन क्लिंडामाइसिन, डॉक्सीन इंजेक्शन जैसे एंटीबायोटिक भी नहीं हैं। रोगियों को दर्द में लगाया जाना वाला इंजेक्शन ट्रामाडोल भी कई माह से नहीं है। जीवनरक्षक इंजेक्शन एड्रेनालाइन बिटार्ट्रेट, दिल की धीमी धड़कन नियंत्रित करने वाला एट्रोपिन सल्फेट, खून पतला करने का हेपरिन सोडियम, सर्जरी बाद की दिक्कत दूर करने वाला इंजेक्शन नियोस्टिग्माइन इंजेक्शन का भी संकट बना हुआ है।
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जल्द खरीदी जाएंगी दवाएं : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि बृहस्पतिवार को ही दवाओं की उपलब्धता को लेकर बैठक की है। कई जरूरी जीवनरक्षक दवाएं टेंडर के माध्यम से खरीदना शुरू कर दिया है। जल्द ही दवाओं का संकट दूर हो जाएगा।
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सूत्रों के अनुसार ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही रैं। इसकी वजह उप्र. मेडिकल सप्लाई काॅरपोरेशन से पर्याप्त दवाओं की आपूर्ति नहीं होना है। इसका दंश गंभीर रोगियों को झेलना पड़ रहा है। मौजूदा स्थिति में मेडिकल कॉलेज में सीएमसी और मॉक्सीक्लेब आई ड्रॉप तक नहीं हैं। मेटफार्मिन, इंसुलिन 30/70, इंसुलिन-आर, इंसुलिन ग्लारजिम नहीं हैं। इस वजह से शुगर के रोगियों को डॉक्टर दवा तो लिख रहे हैं, उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
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दर्द से राहत का इंजेक्शन भी नहीं
एंटीबायोटिक इंजेक्शन क्लिंडामाइसिन, डॉक्सीन इंजेक्शन जैसे एंटीबायोटिक भी नहीं हैं। रोगियों को दर्द में लगाया जाना वाला इंजेक्शन ट्रामाडोल भी कई माह से नहीं है। जीवनरक्षक इंजेक्शन एड्रेनालाइन बिटार्ट्रेट, दिल की धीमी धड़कन नियंत्रित करने वाला एट्रोपिन सल्फेट, खून पतला करने का हेपरिन सोडियम, सर्जरी बाद की दिक्कत दूर करने वाला इंजेक्शन नियोस्टिग्माइन इंजेक्शन का भी संकट बना हुआ है।
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जल्द खरीदी जाएंगी दवाएं : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि बृहस्पतिवार को ही दवाओं की उपलब्धता को लेकर बैठक की है। कई जरूरी जीवनरक्षक दवाएं टेंडर के माध्यम से खरीदना शुरू कर दिया है। जल्द ही दवाओं का संकट दूर हो जाएगा।