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बुंदेलखंड के नौ बांध नहीं भर सके, लगातार छठवें साल भी नहीं भरा सपरार बांध

Sun, 21 Aug 2022 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 01:21 AM IST
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Nine dams of Bundelkhand could not be filled, Saparar dam was not filled even for the sixth consecutive year
झांसी। मानूसनी सीजन के खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बावजूद बुंदेलखंड के नौ बांध इस वर्ष भी नहीं भरे जा सके। वहीं मऊरानीपुर स्थित सपरार बांध लगातार छठे वर्ष खाली रह गया। बांध न भर पाने से इन इलाकों में रबी की फसल को सिंचाई का पानी नहीं मिल सकेगा। तमाम इलाकों में पीने का पानी का संकट भी खड़ा होगा।
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यूपी में सर्वाधिक 33 बांध बुंदेलखंड में हैं। इनमें 12 बांध झांसी, सात ललितपुर, दो छतरपुर, एक पन्ना, चार चित्रकूट, छह महोबा एवं एक बांध हमीरपुर में है। बुंदेलखंड के कई इलाकों में पिछले कई वर्ष से सामान्य बारिश भी नहीं हो रही। इस वजह से छोटी नदियों पर बने बांध नहीं भर पाते सिर्फ बेतवा, धसान, केन जैसी बड़ी नदी पर बने बांध ही भरे पाते हैं। इस वर्ष भी सपरार, पथरई, सिजार, उर्मिल जैसी छोटी बरसाती नदियों पर बने बांध नहीं भरे जा सके हैं।
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मऊरानीपुर स्थित सपरार बांध पिछले छह साल से नहीं भर सका। सिंचाई अभियंताओं के मुताबिक आखिरी बार वर्ष 2017 में भरा गया था। इसके बाद से यह अभी तक नहीं भरा जा सका। बांध की क्षमता 2692 मिलियन घन फुट पानी स्टोर करने की है, लेकिन इस दफा महज 498 मिलियन घन फुट पानी ही भर सका। जबकि पिछले वर्ष 807 मिलियन घन फुट पानी भरा गया था। अभियंताओं का कहना है सपरार नदी का कैचमैंट इलाका टीकमगढ़ के आसपास का है, लेकिन यहां बारिश न होने से यह बांध नहीं भर पाता। बुंदेलखंड के दूसरे सूखे बांधों का भी यही हाल है। यह सभी बांध कैचमेंट इलाके में पर्याप्त बारिश न होने की वजह से नहीं भर पाते। अधिशासी अभियंता अजय कुमार भारती का कहना है कि इन बांधों के न भरने से सिंचाई का पानी दे पाना संभव नहीं होगा।
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अब तक यह बांध रह गए खाली
बांध स्थान जलाशय की क्षमता (मिलियन घन मीटर) संग्रहित पानी (मिलियन घन मीटर)
सपरार झांसी 76 14.10
सजनम ललितपुर 83.50 22.06
सिजार झांसी 5.44 0.27
ओहन चित्रकूट 38.58 3.59
उर्मिल महोबा 116.35 10.32
क्योलारी महोबा 11 1.10
बड़वार झील झांसी 40.38 6.91
बरुआ चित्रकूट 24.91 3.85
मझगवां महोबा 28.78 3.98
केन-बेतवा नदी जुड़ने से भर सकेंगे यह बांध
केन-बेतवा लिंक परियोजना के जमीन पर उतरने के बाद यह सभी बांध मानसूनी बारिश पर निर्भर नहीं रहेंगे। केन-बेतवा लिंक परियोजना की मदद से यह बांध भी मानसूनी सीजन में आसानी से भर जाएंगे। अधीक्षण अभियंता शीलचंद्र उपाध्याय का कहना है कि केन-बेतवा नदी परियोजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे सूखे पड़े बांध भी भरे जा सकें।
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